आज की मेरी कविता
सदा वीर जवानों को सलाम करुँगा
माँ भारत माते, क्या तेरे सपूत हैं
बलिवेदी पर चढकर तुम्हारी रक्षा करते
माता पिता भाई बहन छोड आते
इनकी भावनाओं को महसूस करुँगा
सदा वीर जवानों को सलाम करुँगा॥
खंडहर हिमखंड एक समान मानते
मरुथल जलथल में सदा जागते
कोई होगा किसान का बेटा
होगा अफसर का बेटा याद करुँगा
सदा वीर जवानों को सलाम करुँगा॥
नस नस में भरा है मात्र देशप्रेम
शरम आयेगी आजकल व्यवस्था देख
एसी कमरे में बैठकर आदेश देत
अपने ही दुश्मन बने अब क्या करुँगा
सदा वीर जवानों को सलाम करुँगा॥
सीमा पर डटकर खडे हो पत्पर
दुश्मन तो दुश्मन है बाहरी भीतरी
दिखा दो आत्मबल नहीं किसी से कम
तुम सा वीर जवान हो नहीं डरुँगा
सदा वीर जवानों को सलाम करुँगा॥
खैर नहीं ऐसे वैसों की तू पालनहार
मिटा दे दुश्मनों का नामों निशान
बन जाए देश का एक एक वीर जवान
पल पल तेरी वीर गाथा मैं गाउँगा
सदा वीर जवानों को सलाम करुँगा॥
कोई संग चले या छोड अकेला
अब न मंदिर न मस्जिद जाउँगा
पहले वीर शहीदों को माथा टेकुँगा
हवाओं में घटाओं में पैगाम भेजूँगा
सदा वीर जवानों को सलाम करुँगा॥
डॉ. सुनील कुमार परीट, बेलगांव, कर्नाटक 08867417505