संघर्ष से सफलता तक : प्रदीप की कहानी
एक अपना स्कूल के छात्र की प्रेरणादायक यात्रा
शुरुआत जहाँ से हुई :
प्रदीप, पिता श्री राजकुमार व माता श्रीमती आरती देवी का बेटा, 2013 से 2016 तक अपना स्कूल तातियागंज में कक्षा 2 से 5 तक पढ़ा। यहीं से उसके सपनों को पंख मिले। आई.आई.टी. कानपुर के भैया-दीदी जबअपना केंद्र पढ़lने आते, प्रदीप खूब मन लगाकर सीखता।
मंजिल की तलाश :
आदर्श इंटर कॉलेज, तातियागंज अमिलिहा से कक्षा 6 से 10वीं तक और सरस्वती शिक्षा केंद्र, चौबेपुर से कक्षा 11-12 (विज्ञान संकाय, बायोलॉजी) अपना स्कूल की सहायता से पूर्ण की। बचपन से क्रिकेट का शौक था, पर दिल में देश सेवा का जज़्बा भी था। उसने आर्मी, नेवी, एयरफोर्स तीनों के लिए दिन-रात मेहनत की। ग्राउंड क्लियर किया, पेपर पास किया, पर मेडिकल में रह गया।
हार नहीं मानी :
कई बार रास्ता बदला, पर चलना नहीं छोड़ा। बी.एस.सी. में एडमिशन लिया, पर परीक्षा नहीं दे पाया। बी.फार्मा शुरू किया, पर पैसों की कमी से 6 महीने में छोड़ना पड़ा। फिर दिल्ली गया, नौकरी की, पैसे जोड़े। बी.पी.टी. किया और अस्पताल में 3 साल काम किया। वेतन कम था तो फिर नई राह पकड़ी।
आज की उड़ान :
आज प्रदीप अहमदाबाद की AUTOCOMP CORPORATION PANSE PVT. LTD में काम कर रहा है। Plot No. AV 37, Sanand II Industrial Estate, GIDC। 6 महीने हो गए। 6 भाई-बहनों वाले घर से निकलकर उसने खुद अपना रास्ता बनाया।
सीख:
प्रदीप की कहानी बताती है कि असफलता अंत नहीं है। मेडिकल में फेल हुआ तो रास्ता बदला, पैसे कम पड़े तो कमाकर पढ़ा। गिरकर उठना ही असली जीत है।
क - ख - ग सीखोगे अगर, कठिन न होगी कोई डगर..."_ - अपना स्कूल का यही गीत प्रदीप ने सच कर दिखाया।