Valmiki Ramayana Ayodhya Kanda Sarga 111
Slokas 13, 14, 15, 16, 17 and 18
Bharata tells his charioteer Sumantra -
इह मे स्थण्डिलॆ शीघ्रं कुशानास्तर सारथे /
आर्यं प्रत्युपवेक्ष्यामि यावन्मे न प्रसीदति // 13
अनाहारो निरालोको धनहीनो यथा द्विज: /
शेष्ये पुरस्तात् शालायां यावन्मां प्रतियास्यति // 14
स तु राममवेक्षंतं सुमंत्रं प्रेक्ष्य दुर्मना: /
कुशोत्तरमवस्थाप्य भूमावेवस्थितस्वयम् // 15
तमुवाच महातेजा रामो राजर्षिसत्तम: /
किं मां भरत कुर्वाणं तात प्रत्युपवेक्ष्यसि // 16
बाह्मणोह्येकपार्श्वेन नरान् रोद्धुमिहार्हसि /
न तु मूर्धाभिषिक्तानां विधि: प्रत्युपवेशने // 17
उत्त्तिष्ट नरशार्दूल हित्वैतद्दारुणं व्रतम् /
पुरिवर्यामित: क्षिप्रमयोध्यां याहि राघव // 18
Here Bharatha proclaims his intention to
fast unto death if Rama does not retrun
to Ayodhya. Rama rebukes Bharatha
that a Khatriya is not entitled to take recourse
to this and sticks to his resolve to stay in
the forest.
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