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''संस्कार अपनी परिभाषा और संस्कृति अपनी पहचान कभी नहीं खोते''
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GWALIOR TIMES  
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 More options Nov 7, 7:38 am
From: "GWALIOR TIMES" <promor...@hotmail.com>
Date: Sat, 7 Nov 2009 18:08:56 +0530
Local: Sat, Nov 7 2009 7:38 am
Subject: ''संस्कार अपनी परिभाषा और संस्कृति अपनी पहचान कभी नहीं खोते''

''संस्कार अपनी परिभाषा और संस्कृति अपनी पहचान कभी नहीं खोते''
महिला कवि सम्मेलन में ''आओ बनायें अपना मध्यप्रेदश'' की भावनाओं से ओतप्रोत हुए श्रोता
ग्वालियर 06 नवम्बर 09। कलावीथिका का प्रांगण गुरूवार की शाम ''आओ बनायें अपना मध्यप्रदेश'' के भाव से ओतप्रोत कविताओं से गुंजायमान हो गया। 'मध्यप्रदेश'' पर केन्द्रित कविताओं की सुरीली तान नगर की जानी-मानी कवियित्रियों द्वारा छेड़ी गईं। मध्यप्रदेश सप्ताह के तहत यह महिला कवि सम्मेलन जिला प्रशासन एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किये जा रहे विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों की कड़ी में आयोजित किया गया।
        कवि सम्मेलन का आगाज शहर की नवोदित कवियित्री कुमारी रागिनी द्वारा प्रस्तुत माँ सरस्वती की वंदना के साथ हुआ। बाद में एक से बढ़कर एक कविता ने सुधीय श्रोताओं को कभी रोमांचित तो कभी मध्यप्रदेश को स्वर्णिम बनानेकी भावना से ओतप्रोत किया।
        शहर की सुप्रसिध्द कवियत्री श्रीमती कुन्दा जोगलेकर ने कुछ इस अंदाज में अपनी कविता पढ़ी '' यकीन है मुझे कि संस्कार अपनी परिभाषा और संस्कृति अपनी पहचान कभी नहीं खोते''। उन्होंने इससे पहले मध्यप्रदेश पर केन्द्रित कविता प्रस्तुत की। उसके बोल थे '' कला संस्कृति संस्कारों को सदा समर्पित मध्यप्रदेश''। उदयीमान कवियत्री डॉ. मुक्ता सिकरवार ने '' न इब्तदा से डरिये न अंजाम से जिंदगी गुजरेगी आराम से ''गजल प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरीं। डॉ. मुक्ता सिकरवार ने'' गालव ऋषि की तपोभूमि पर परंपरायें करती वंदन'' कविता भी प्रस्तुत की।
        श्रीमती आरती खेड़कर ने ' मध्यप्रदेश की लोक संस्कृति ''सुनाती आपको आज आरती'' और श्रीमती सुनीति बैस को सुकूने दिल मिला वो कम नहीं हैं, मुझे तो अब कोई भी गम नहीं हैं। कविता पर श्रोताओं की खूब दाद मिली। श्रीमती पुष्पा सीसोदिया ने अपनी कविता ''तुमने कभी चांद को लहरों पर मचलते देखा है, अगर नहीं देखा है तो देखे माँ की गोद में मचलते हुए अर्ध्द चन्द्राकार लेटे दूध पीते शिशु को'' प्रस्तुत कर श्रोताओं को वात्सल्य रस से भाव विभोर कर दिया। श्रीमती आरती खेड़कर ने '' मध्यप्रदेश की लोक संस्कृति सुनाती आपको आज आरती''' और नगर की वरिष्ठ महिला साहित्यकार डॉ. अन्नपूर्णा भदौरिया ने '' सुजला, सुफलां शस्य श्यामलां इसका है संदेश। हमारा प्यारा मध्यप्रदेश। कविता प्रस्तुत की। कवि सम्मेलन का संचालन कर रहीं श्रीमती कादम्बरी आर्य को अपनी गजल '' मुल्क का चेहरा सजाया जायेगा, चांद धरती पर उतारा जायेगा, हो चुका चर्चा जमाने का बहुत, घर का आंगन कब बुहारा जायेगा। की प्रस्तुति पर कलावीथिका में मौजूद एक-एक श्रोता की वाहवाही मिली। इनके अलावा श्रीमती ललित किशोरी शर्मा ने भी काव्यपाठ किया।
        हास्य व्यंग के क्षेत्र में देश के सुप्रिसिध्द हस्ताक्षर श्री प्रदीप चौबे सहित सुविख्यात कवि श्री प्रकाश मिश्र, श्री राज चड्डा, वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार श्री राकेश 'अचल' तथा नगर के अन्य सुधीय श्रोताओं ने कवि सम्मेलन की दर्शक दीर्घा की शोभा बढ़ाई। कवि सम्मेलन में भाग लेने आई सभी कवियत्रियों को महिला श्रोताओं ने शॉल व श्रीफल भेंटकर जिला प्रशासन एवं जन संपर्क विभाग की ओर से सम्मानित किया। अन्त में संयुक्त संचालक जनसंपर्क श्री सुभाष अरोड़ा ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।


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