पुलिस द्वारा गिरफ्तारी पर सीआरपीसी में संशोधन

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Nov 24, 2009, 7:28:38 PM11/24/09
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पुलिस द्वारा गिरफ्तारी पर सीआरपीसी में संशोधन

NEW DELHI 24th NOVEMBER 2009

लोक सभा

 

       गृह राज्य मंत्री श्री मुल्लापल्ली रामचन्द्रन ने आज एक प्रश्न के लिखित उत्तर में लोक सभा को बताया कि राष्ट्रीय पुलिस आयोग ने अपनी तीसरी रिपोर्ट में, अन्य बातों के साथ-साथ यह उल्लेख किया है कि पुलिस द्वारा की गयी गिरपऊतारियों में से ज्यादातर गिरपऊतारियां वस्तुत: अपराध की रोकथाम की दृष्टि से न्यायोचित नहीं हैं । उन्होंने बताया कि इस प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए वारंट के बगैर गिरपऊतार करने की पुलिस की शक्ति से संबंधित दण्ड प्रक्रिया संहित (क्ध्द. घ्.क्.) की धारा 41 को हाल ही में दण्ड प्रक्रिया संहिता (संशोधन) विधेयक, 2008 के माध्यम से संशोधित किया गया है । संशोधित धारा  41 (1) के खण्ड (ख) में यह प्रावधान है कि कोई व्यक्ति, जिसने कोई ऐसा संज्ञेय अपरोध किया है, जो सात वर्ष से कम अवधि के कारावास से दण्डनीय है, को युक्तियुक्त शिकायत अथवा विश्वसनीय जानकारी अथवा युक्तियुक्त संदेह के आधार पर गिरपऊतार किया जा सकता है और पुलिस अधिकारी को ऐसी गिरपऊतारी संबंधी कारणों को रिकार्ड करना होगा । उक्त अधिनियम के प्रावधानों को अभी लागू किया जाना है । उन्होंने बताया कि इसी बीच, भारत के विधि आयोग ने दण्ड प्रक्रिया संहिता की संशोधित धारा 41(ख) में पुन: यह संशोधन करने की सिफारिश की है कि पुलिस अधिकारी धारा 41 के तहत गिरपऊतारी करने के लिए ही नहीं बल्कि धारा 41 के तहत गिरपऊतारी करने के कारणों को भी रिकार्ड करने के लिए बाध्य हो । तदनुसार, अन्य बातों के साथ-साथ संसद में एक ऐसा विधेयक पेश करने का प्रस्ताव है जिसमें विधि आयोग द्वारा की गयी सिफारिश की तर्ज पर दण्ड प्रक्रिया संहिता की संशोधित धारा 41 (ख) में संशोधन का प्रस्ताव निहित हो । 

 

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