संदर्भ सामग्री
आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृध्दि रोकने के लिए सरकार द्वारा उठाये गए कदम
27 कार्तिक, 1931
नई दिल्ली,-18 नवम्बर, 2009
सरकार ने आवश्यक वस्तुओं की घरेलू बाजार में उपलब्धता में सुधार लाने और मुद्रास्फीति को सामान्य रखने के लिए अनेक अल्प और मध्यमकालिक कदम उठाये हैं । सरकार ने 5 करोड़ 85 लाख 30 हजार टन खाद्यान्न की रेकार्ड खरीद की है जिसमें 3 करोड़ 30 लाख टन चावल और 2 करोड़ 52 लाख 30 हजार टन गेहूं 30.9.09 तक खरीदा गया । न्यूनतम सुरक्षित भंडार रखने के बाद भी बाजार में उचित कीमत पर कीमतें बनाये रखने के लिए पर्याप्त खाद्यान्न भंडार मौजूद है । 50 लाख टन गेहूं और चावल का सुरक्षित भंडार बना लिया गया है । यह भंडार भारतीय खाद्य निगम द्वारा हर वर्ष बनाये जाने वाले सुरक्षित भंडार के अलावा है । चावल के लिए केन्द्रीय जारी मूल्य गरीबी रेखा से नीचे के लिए 5.65 प्रति किलो और अन्त्योदय अन्न योजना के लिए 2 रूपये प्रति किलोग्राम और गरीबी रेखा से नीचे के लिए गेहूं 4 रूपये 15 पैसे और अन्त्योदय अन्न योजना के लिए 2 रूपये प्रति किलो की दर से रखा गया है जिससे गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों और अन्त्योदय अन्न योजना के लाभभोगियों को खाद्यान्न सुलभ हो।
कीमतों की स्थिति की मंत्रिमंडली मूल्य समिति और सचिवों की समिति की उच्च स्तरीय बैठकों में समय-समय पर समीक्षा की जाती है ।
वित्तीय उपाय-
क. चावल, गेहूं, दालों, खाद्य तेलों (कच्चे) और चीनी तथा मक्के पर आयात शुल्क शून्य तक घटाकर (टीआरक्यू के अंतर्गत 5 लाख टन के अंतर्गत इससे अधिक 15 प्रतिशत शुल्क लागू होगा ।
ख. रिफाइंड एवं हाइड्रोजेनेटेड तेलों एवं वेजीटेबल तेलों पर आयात शुल्क को घटाकर 7.5 प्रतिशत करना ।
ग. भारत सरकार के आदेश के अंतर्गत गन्ना मिलों द्वारा 1.8.09 तक शक्कर के आयात पर कोई शुल्क नहीं लगेगा । (17.4.09 को अधिसूचित)। अब इस आदेश को बढाक़र इसे 31.3.2010 तक लागू कर दिया गया है ।
घ. एसटीसीएमएमटीसी पीईसी और नाफेड द्वारा 10 लाख टन सफेद रिफांड चीनी का आयात शून्य डयूटी पर 1.8.09 तक करने के लिए भारत सरकार द्वारा अनुमति दी जा चुकी है । यह अधिसूचना 17.4.09 को जारी की गई थी । अब इसे बढाक़र 30.11.09 तक कर दिया गया है ।
ड. सभी आयातित शक्कर तथा सफेद रिफाइन्ड चीनी से लेवी हटा ली गई है ।
2. प्रशासनिक उपाय
क. 5 किलो तक के बंद पैकेटों में खाने के तेलों का 10,000 टन तक निर्यात किया जा सकता है । यह सीमा 31 अक्तूबर, 2009 तक लागू रहेगी ।
ख. खाने के तेलों तथा (काबुली चना को छोड़कर) अन्य दालों के निर्यात पर प्रतिबंध
ग. खाने के तेलों के मूल्यों में कोई परिवर्तन नहीं
घ. चावल, धान, दालों, चीनी, खाद्य तेलों तथा तिलहनों के मामले में स्टाक लिमिट आर्डर लागू ।
ड. प्याज (अक्तूबर 2009 के लिए प्रति टन 300 डालर के औसत से) के निर्यात का नियमन करने के लिए न्यूनतम निर्यात मूल्य का इस्तेमाल करना ।
च. राज्योंकेन्द्र शासित प्रदेशों को 15 रूपये प्रति किलोग्राम की रियायत पर दस लाख टन पर आयातित खाद्य तेलों का वितरण
छ. दालों की उपलब्धता बढाने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के प्रतिष्ठानों जैसे -एसटीसी, एमएमटीसी और पीईसी तथा नाफेड को एक स्कीम के तहत दालों का आयात और बिक्री करने की अनुमति दी गई है । इसमें कोई नुकसान हो जाता र्है तो सरकार द्वारा 15 प्रतिशत तक पुन: लौटाया जा सकता है ।
ज. 10 रूपये प्रति कि.ग्रा. की रियायत पर सार्वजनिक वितरण की दुकानों के माध्यम से राज्य सरकारों को आयातित दालोंका वितरण
झ. सरकार ने चीनी कारखानों को घरेलू बाजार में शक्कर बेचने की अनुमति दे दी है और वे टन प्रति टन के हिसाब से निर्यात दायित्व को पूरा कर सकें ।
ण गैर लेवी चीनी की पर्याप्त मात्रा जारी
ट. प्रमुख आवश्यक जीन्सों में भविष्य व्यापार पर पाबंदी
उपरोक्त उपायों के अलावा, सरकार ने कृषि में उत्पादन तथा उत्पादकता में सुधार लाने के उद्देश्य से मध्यम पहलें भी की हैं जैसे - राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्यक्रम, तिलहनों, दालों, आयल पाम और मक्के के समेकित कार्यक्रम, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन तथा राष्ट्रीय कृषि विकास योजना ।