maNiyaa.N - मणियाँ

0 views
Skip to first unread message

Rahul Upadhyaya

unread,
Nov 20, 2009, 2:26:17 AM11/20/09
to HindiKavita GoogleGroup
मणियाँ
राहुल उपाध्याय
 
फूलों की बगिया ज्यों किश्तों में खिलती है
इंसां की किस्मत भी किश्तों में जगती है
 
भला छाते ही बादल कहीं बरखा भी होती है?
होने-बरसने में यारो इक उम्र गुज़रती है
 
मिलना-बिछड़ना, व हँसना व रोना
इन के ही मिश्रण से शख़्सियत निखरती है
 
जब आता है संकट, हम खुद को परखते हैं
और मूल्यों-विश्वासों की दुनिया सँवरती है
 
जब होता है मन का, तो लगता है अच्छा
जब मन का न हो, तभी तो मणियाँ निकलती हैं
 
सिएटल
19 नवम्बर 2009 
A picture may be worth a thousand words. But mere words can inspire millions


Reply all
Reply to author
Forward
0 new messages