merii kalam - मेरी कलम

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Rahul Upadhyaya

unread,
Nov 17, 2009, 2:13:28 AM11/17/09
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मेरी कलम
राहुल उपाध्याय
 
कोई पूछे कि न पूछे
ये कलम मुझको बुलाती है
हर मोड़ पे, हर हाल में
ये गीत सुनाती है
 
शमा जलती है, बुझती है
मिट जाती है जल कर
दिनकर आ के, जगमगा के
चला जाता है थक कर
इक कलम ही है
जो दु:ख-सुख में
मेरा साथ निभाती है
 
ताज हो, तख्त हो, दौलत हो
ज़माने भर की
उस पे बंदिश कि
न कहो बात अपने मन की
ऐसी ज़िंदगी भी कहीं
ज़िंदगी कही जाती है
 
कोई पक्षपात करे, द्वेष करे
जाल बिछाए
कोई नेता हो, अभिनेता हो
या लाख कमाए
सब के वादों को, इरादों को
ये साफ दिखाती है
 
कोई रूठे, कोई फूले
या कोई आँख दिखाए
बन के यमदूत भी
'गर आप मुझे लाख डराए
ये न रूकी है
न रुकती है
न रोकी जाती है
 
सिएटल
16 नवम्बर 2009
 
A picture may be worth a thousand words. But mere words can inspire millions



jai saini

unread,
Nov 18, 2009, 2:08:00 AM11/18/09
to hindi...@googlegroups.com
na ruke aapki kalm kabhi dua hum bhagwan se ye karte hai 
milta rahe sat sada aapka ummed aapse yahi rakhte hai

2009/11/17 Rahul Upadhyaya <upad...@yahoo.com>
मेरी कलम
राहुल उपाध्याय
 
कोई पूछे कि न पूछे
ये कलम मुझको बुलाती है
हर मोड़ पे, हर हाल में

ये गीत सुनाती है
 
शमा जलती है, बुझती है
मिट जाती है जल कर
दिनकर आ के, जगमगा के
चला जाता है थक कर
इक कलम ही है
जो दु:ख-सुख में
मेरा साथ निभाती है
 
ताज हो, तख्त हो, दौलत हो
ज़माने भर की

उस पे बंदिश कि
न कहो बात अपने मन की
ऐसी ज़िंदगी भी कहीं
ज़िंदगी कही जाती है
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