हे प्रभु, मेरे हृदय-निवासी!
मेरी कमजोरियों, अवगुण और दुर्विचारों को दूर करो।
मुझमें सब प्रकार के सद्गुण विकसित करो! मुझे पवित्र करो,
ताकि मैं आपकी करूणा और कृपा पाने योग्य बनूं!
आप ही सब आत्माओं के सूत्रधार हो जो सबको जोड़ते हो।
आपही समस्त ब्रह्माण्ड में व्यापक हैं और सबका आधार हैं।
मैं सदा आपका स्मरण करता रहूं!
O LORD, THE INDEWELLER OF MY HEART!
REMOVE MY WEAKNESSES, DEFECTS AND
EVIL THOUGHTS. LET ME DEVELOP ALL
SUBLIME VIRTUES! MAKE ME PURE SO THAT
I MAY BE ABLE TO RECEIVE THY GRACE
AND BLESSINGS! THOU ART THE THREAD-
SOUL THAT CONNECTS ALL BEINGS.
THOU PERVADEST ALL, PERMEATEST AND
INTERPENETRATEST ALL THINGS OF THIS UNIVERSE.
LET ME REMEMBER THEE ALWAYS!
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दीन-दुखियों की सेवा करो। भगवान के सेवकों की सेवा ही भगवान की सच्ची भक्ति है।
सेवक विजय अनन्त, 788, सेक्टर 16, पंचकूला, चंडीगढ़,
+919815900159, http://vijayanant.blogspot.com
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हे प्रभु, अज्ञान को दूर करने वाले! आप ही करूणा के सागर हैं!
मुझे लोभ, वासना, अह्म, ईर्ष्या और शत्रुता से मुक्त करो।
मुझे समस्त विश्व में सुख, शान्ति और आनन्द फैलाने की शक्ति दो।
मैं अपने शरीर, मन और बुद्धि से तुम्हारी और सृष्टि के जीवों की सेवा करूं।
मैं सबको अपना स्वरूप मान कर प्रेम करूं!
हे करूणा के सागर, मेरा तुम्हें बारम्बार नमस्कार है!
O LORD, THE DISPELLER OF IGNORANCE.
THOU ART ALL-MERCIFUL LORD!
LET ME BE FREE FROM GREED, LUST, EGOISM,
JEALOUSY AND HATRED. I MAY RADIATE JOY,
PEACE AND BLISS TO THE WHOLE WORLD.
LET ME UTILISE THIS BODY, MIND AND SENSES IN
THY SERVICE AND IN THE SERVICE OF THE CREATURES.
LET ME LOVE ALL AS MY OWN SELF!
SALUTATIONS UNTO THEE, O LORD OF COMPASSION!