प्रार्थना

1 view
Skip to first unread message

Vijay Anant

unread,
Jan 4, 2010, 9:14:44 AM1/4/10
to hindibhasha संग्रह सदस्य


हे प्रभु, मेरे हृदय-निवासी!

मेरी कमजोरियों, अवगुण और दुर्विचारों को दूर करो।

मुझमें सब प्रकार के सद्गुण विकसित करो! मुझे पवित्र करो,

ताकि मैं आपकी करूणा और कृपा पाने योग्य बनूं!

आप ही सब आत्माओं के सूत्रधार हो जो सबको जोड़ते हो।

आपही समस्त ब्रह्माण्ड में व्यापक हैं और सबका आधार हैं।

मैं सदा आपका स्मरण करता रहूं!

 

O LORD, THE INDEWELLER OF MY HEART!

REMOVE MY WEAKNESSES, DEFECTS AND

EVIL THOUGHTS. LET ME DEVELOP ALL

SUBLIME VIRTUES! MAKE ME PURE SO THAT

I MAY BE ABLE TO RECEIVE THY GRACE

AND BLESSINGS! THOU ART THE THREAD-

SOUL THAT CONNECTS ALL BEINGS.

THOU PERVADEST ALL, PERMEATEST AND

INTERPENETRATEST ALL THINGS OF THIS UNIVERSE.

LET ME REMEMBER THEE ALWAYS!

~~~~~

दीन-दुखियों की सेवा करो। भगवान के सेवकों की सेवा ही भगवान की सच्ची भक्ति है।

सेवक विजय अनन्त, 788, सेक्टर 16, पंचकूला, चंडीगढ़,

+919815900159,  http://vijayanant.blogspot.com

यदि आप सभी संदेश पढ़ना चाहते हैं, यहां देखें-

http://groups.google.com/group/anant-sevashram

PRAYER - 04.01.2010.pdf

Vijay Anant

unread,
Jan 5, 2010, 7:07:29 AM1/5/10
to hindibhasha संग्रह सदस्य


हे प्रभु, अज्ञान को दूर करने वाले! आप ही करूणा के सागर हैं!

मुझे लोभ, वासना, अह्म, ईर्ष्या और शत्रुता से मुक्त करो।

मुझे समस्त विश्व में सुख, शान्ति और आनन्द फैलाने की शक्ति दो।

मैं अपने शरीर, मन और बुद्धि से तुम्हारी और सृष्टि के जीवों की सेवा करूं।

मैं सबको अपना स्वरूप मान कर प्रेम करूं!

हे करूणा के सागर, मेरा तुम्हें बारम्बार नमस्कार है!

 

O LORD, THE DISPELLER OF IGNORANCE.

THOU ART ALL-MERCIFUL LORD!

LET ME BE FREE FROM GREED, LUST, EGOISM,

JEALOUSY AND HATRED. I MAY RADIATE JOY,

PEACE AND BLISS TO THE WHOLE WORLD.

LET ME UTILISE THIS BODY, MIND AND SENSES IN

THY SERVICE AND IN THE SERVICE OF THE CREATURES.

LET ME LOVE ALL AS MY OWN SELF!

SALUTATIONS UNTO THEE, O LORD OF COMPASSION!

PRAYER - 05.01.2010.pdf
Reply all
Reply to author
Forward
0 new messages