महत्वपूर्ण सूचना...ब्लॉगिंग पर हिंदी में महत्वपूर्ण किताब...ब्योरा चाहिए

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चण्डीदत्त शुक्ल-chandidutt shukla

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Jan 1, 2010, 8:27:52 AM1/1/10
to hindi...@googlegroups.com

सभी ब्लॉगर बंधु

नए साल पर नई सूचना...

हिंदी ब्लॉगिंग पर एक महत्वपूर्ण किताब का प्रकाशन हो रहा है. मार्च तक किताब प्रकाशित होने की पूरी संभावना है. 
पुस्तक में शामिल करने के लिए कृपया ये जानकारी मुहैया कराएं. ब्योरा कृपया मेरे ई-मेल chandidu...@gmail.com पर भेजें.

अपना विवरण / परिचय
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टिप्पणीकारों का महत्व
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कहां से मिली प्रेरणा, कब शुरू किया ब्लॉग
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महत्वपूर्ण
1. कृपया ई-मेल की सब्जेक्ट लाइन में ज़रूर लिखें....blog-book : (your name)
जैसे- blog-book : chandiduttshukla

2. विवरण यूनिकोड में भेजें और इसके लिए तीन दिन का समय ही लें. पुस्तक में कुछ इनपुट जोड़ना बाकी रह गया है और किताब इसी माह के अंत में प्रोडक्शन के लिए चली जाएगी.

-- एक अनुरोध और है.
मेरे पास जितने ब्लॉगर्स का मेल आईडी है, मैं उन्हें तो सूचना भेज ही रहा हूं. यदि आपके परिचय सूत्र में कोई अन्य साथी हैं, तो उन्हें भी कृपया ये ई-मेल फारवर्ड कर दें.


धन्यवाद,


चण्डीदत्त शुक्ल
टेलिविजन पत्रकार
नोएडा

मेरा मोबाइल नंबर है 09873779183.

harshanvardhan tiwary

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Jan 3, 2010, 3:55:09 AM1/3/10
to hindi...@googlegroups.com

 


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ACHARYA DR H.V.TIWARY

FORMER VICECHANCELLOR

PhD IISC Bangalore, Prof of Electronics Retd RSU, Ex IAUP Fellow Australia, Ex Common Wealth Fellow London & IEEE Member, USA , Computer Society, National Advisory Committee NSFD India, Chief Trustee SRLS Trust, Former Dean & Chairman Electronics Board Of Studies, Nominator International Asian- Megasaysay Award Expert committee member, UGC, NAAC, AICTE, NIT, Selection committee all over India Won and Felicitated Several  National Level Awards & One Gold Medal at Bombay.

Address: Gyanparisar Adjacent Ravishankar University Campus Raipur 492010 C.G. INDIA

Mob09977304050, Tele0771-2262997,  website&blog:www.shriram-satya-


 




From: चण्डीदत्त शुक्ल-chandidutt <chandidu...@gmail.com>
To: hindi...@googlegroups.com
Sent: Fri, 1 January, 2010 6:57:52 PM
Subject: [Hindi Bhasha] महत्वपूर्ण सूचना...ब्लॉगिंग पर हिंदी में महत्वपूर्ण किताब...ब्योरा चाहिए
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suresh kumar

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Jan 3, 2010, 4:41:42 AM1/3/10
to hindi...@googlegroups.com
Priy Chandidutt jee:

Main Suresh Hun.  Pala Hun Bihar Main, Dakshin Bharatiya hun.  Ranchi mein 30 baras raha un. taamil meri matru bhaasha hai.. hindi v angreji mein nipun hun.  CARE naam kee swachhik sanstha key  saath untees barsh kaarya kiya bhaarat evam  videsho main.

snatak hun(B.Com), raanchi vishwavidhyalay sey.  Aaajkal hindi evam angreji anuwaad ka karya karta hun(Frelancer0.  Merey yogya koi seva hogi to batayenge.  Main chennai mei rahta hun.

spoken Hindi ki class leta hun..  Mera  profile salagn hai..

doorbaash sankya   9840643690.

dhanyawaad.

suresh

2010/1/1 चण्डीदत्त शुक्ल-chandidutt shukla <chandidu...@gmail.com>
CVsureshgmail.doc

डॉ. रूपचंद्र शास्त्री "मयंक"

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Jan 4, 2010, 11:20:22 PM1/4/10
to hindi...@googlegroups.com
अपना विवरण / परिचय

डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
आयु-59 वर्ष, पुरुष
निवास-स्थानः खटीमा, जिला-ऊधमसिंहनगर
(उत्तराखण्ड) पिन कोड-262308
मोबाइल नं.-09368499921,09808181890
फोन/फैक्सः 05943-250207

फ़ोटो
इस विवरण के साथ संलग्न है।

मूल व्यवसाय
शिक्षा

ब्लॉगिंग में चुनौती,
पद्य रचनाओं  के साथ
 
टिप्पणीकारों का महत्व
जैसे पुस्तक का महत्व समीक्षा है, वैसे ही पोस्ट का महत्व टिप्पणियों से है।
टिप्पणीकार ब्लॉगर का उत्साहवर्धन करते हैं।

आपकी नज़र में टॉप-10 ब्लॉग
7. कर्मनाशा
8. अनुनाद
आपके ब्लॉग का विषय और लिंक...

विषय- पद्य का ब्लॉग (उच्चारण) 
विषय- गद्य का ब्लॉग (शब्दों का दंगल) http://uchcharandangal.blogspot.com/
विषय- गद्य का ब्लॉग (मयंक) 
विषय- चर्चा का ब्लॉग (चर्चा मंच) 

कहां से मिली प्रेरणा, कब शुरू किया ब्लॉग

मित्र रावेंद्रकुमार रवि से प्रेरणा मिली।

21 जनवरी,2009 से ब्लॉगिंग शुरू की।

नए ब्लॉगर्स को आपका संदेश

उत्कर्षों के उच्च शिखर पर चढ़ते जाओ।
पथ आलोकित है, आगे को बढ़ते जाओ।।



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१ जनवरी २०१० ६:५७ PM को, चण्डीदत्त शुक्ल-chandidutt shukla <chandidu...@gmail.com> ने लिखा:


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कहां से मिली प्रेरणा, कब शुरू किया ब्लॉग
नए ब्लॉगर्स को आपका संदेश

डॉ. रूपचंद्र शास्त्री "मयंक"
टनकपुर रोड, खटीमा,
ऊधमसिंहनगर, उत्तराखंड, भारत - 262308.
फोनः05943-250207, 09368499921
270520081470.jpg

Dinesh Mali

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Jan 5, 2010, 4:03:08 AM1/5/10
to hindi...@googlegroups.com

अपना विवरण / परिचय


 

दिनेश कुमार माली
पेशे से खनन-अभियंता पर नशा लेखन का. राजस्थान के सिरोही में जन्मे, पले, बढे और एम.बी.एम. अभियांत्रिकी महाविद्यालय, जोधपुर से खनन अभियांत्रिकी में स्नातक डिग्री ,भारतीय पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण संस्थान, नई दिल्ली से पोस्ट-ग्रेजुएट डिप्लोमा इन इकॉलोजी एंड एन्वैरोमेंट तथा इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय से एम.बी.ए. की डिग्री प्राप्त की और सम्प्रति ओडिशा में कोल इंडिया की अनुषंगी कंपनी महानदी कोल-फील्ड्स लिमिटेड की खुली खदान सम्ब्लेश्वरी, ईब-घाटी क्षेत्र में खान-अधीक्षक के रूप में कार्यरत हैं.हिंदी अनुवाद तथा हिंदी में शोध-पत्र के लिए कोल इंडिया तथा महानदी कोल फील्ड्स लिमिटेड द्वारा समय समय पर राजभाषा सम्मान से सम्मानित. प्रकाशित पुस्तक : न हन्यते email.id:- siroh...@gmail.com

फ़ोटो
इस विवरण के साथ संलग्न है।


मूल व्यवसाय

नौकरी  


ब्लॉगिंग में चुनौती,
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आपकी नज़र में टॉप-10 ब्लॉग
1.sense and sensuality
2.feminine fragrance
3.India
4.Bal-kahaniya
5.Bal Upanyaas
5.. उड़न तश्तरी 
6. शब्दों का सफर
7.. Hindi Blog Tips
8. जनोक्ति
9. मौजे सागर
10. दीक्षा

आपके ब्लॉग का विषय और लिंक...

भारतीय साहित्य में सरोजिनी साहू एक चर्चित नाम . अंग्रेजी और ओडिया दोनों भाषाओँ में अपने सक्षम लेखन-कार्य के लिए जाने-पहचाने इस व्यक्तित्व की कहानियों में नारीत्व का अहसास , सूक्ष्म निरीक्षण शक्ति, गहरा जीवनबोध तथा कलात्मक परिधियों को ऊंचाई तक पहुंचा पाने का श्रेय कहानीकार को जाता है. उनकी चंद चुनी हुई कहानियों का अनुवाद हिंदी पाठकों के लिए पहुंचाने हेतु मेरा यह ब्लॉग. पाठकों को पसंद आये तो समझूंगा मेरा श्रम सार्थक हुआ.

http://sarojinisahoostories.blogspot.com/


कहां से मिली प्रेरणा, कब शुरू किया ब्लॉग

डॉ सरोजिनी साहू से से प्रेरणा मिली।


1 जून ,2009 से ब्लॉगिंग शुरू की।


नए ब्लॉगर्स को आपका संदेश

निज भाषा उन्नति अहै,
सब उन्नति को मूल
बिन निज भाषा-ज्ञान के,
मिटत न हिय को सूल । -- भारतेन्दु हरिशचन्द्र


 
2010/1/5 डॉ. रूपचंद्र शास्त्री "मयंक" <roopchand...@gmail.com>
mali.jpg

Kiran Rajpurohit Nitila

unread,
Jan 5, 2010, 7:05:16 AM1/5/10
to hindi...@googlegroups.com
किरण राजपुरोहित नितिला
 
बी ए सितार राजस्थानी साहित्य ,एम ए राजनीति
-नया ज्ञानोदय, परिवार पत्रिका, सेतु, मुक्ता, तत्सम, मधुमती, दीप ज्योति, अहिल्या प्रयास आदि से कहानियां।
-कादम्बिनी, मधुमती, समग्र दृश्टि, सरस्वती सुमन, कथा सागर, साहित्य चंद्रिका, मानसी,प्रयास,दीप ज्योति, साहित्य सागर,  अहिल्या साहित्य अमृत मालवा आदि में कवितायें।
-अहा!जिंदगी, दीप ज्योति, माणक, षिश्ट विनोद, समग्र दृश्टि, मधुरिमा  साहित्य सागर आदि से लघु कथायें व संस्मरण प्रकाषित।
...साहित्य अमृत,समग्र दृश्टि,अक्षर पर्व,से रेखाचित्र व अन्य पत्रिकाओं में पेंटिग मुख पृश्ठ पर प्रकाषित।
-ई -पत्रिकायें अभिव्यक्ति, स्वर्ग विभा, साहित्य कुंज आदि से कहानी,कवितायें,रेखाचित्र,लघु कथा ,तैल चित्र व रेखाचित्र प्रकाषित।
-अक्षर पर्व,साहित्य प्रोत्साहन, साहित्य चंद्रिका  से रेखाचित्र प्रकाषित ।    -पत्रिकाओं के मुख पृश्ठ पर चित्र।
-2007 हस्त षिल्प मेला ,जोधपुर व 2008 में तैल चित्रों की युगल प्रदर्षनी व पंेटिंग सेमीनार का आयोजन।
पता-  डाॅ नरेन्द्रसिंह राजपुरोहित
सामु स्वा केन्द्र ,तखतगढ 306912,जिला पाली ‘राजस्थान’
दूरभाश 02933220502,9829202502, 9460903131


 साहित्य ब्लाॅग   www.bhorkipehlikiran.blogspot.com
पेंटिंग रेखाचित्र फोटोग्राफी ब्लाॅग www.kiranrajpurohit.blogspot.com

मूल व्यवसाय........
             गृहिणी,पंेटिग

.टिप्पणीकारों का महत्व.........
हर कार्य को आगे बढाने में इंसान को प्रोत्साहन नामक ईंधन की आवष्यकता है। उसी का एक रुप है ब्लाॅगर के लिए टिप्पणी । इसके बिना ब्लाॅग और ब्लाॅगर दोनों निश्प्राण है।

ब्लाॅग का विशय.............भोर की पहली किरण ...........साहित्य ब्लाॅग
             म्ेारी कृति........पेंटिग रेखाचित्र व फोटोग्राफी

  लिंक .http://bhorkipehlikiran.blogspot.com
          http://kiranrajpurohit.blogspot.com

  ...इंटरनेट पर ई पत्रिकाओं के अलावा अपनी अभिव्यक्ति की आवष्यकता बहुत महसूस हो रही थी। लेकिन कुछ सूझ नही रहा था। फिर ब्लॅाग का पता चला । लगा यह तो कोई उंची चीज है। हम वहां तक नही पहुंच सकते । फिर एक बार भास्कर में आषीश खंडेलवाल का एक लेख पढा ब्लाॅगिंग पर । बस रास्ता मिल गया। आषीश जी ने तो इसे बायें हाथ से जितना आसान बना दिया।आषीश जी का आभार बयान नही किया जा सकता ।
अपैल 09में अपना पहला ब्लाॅग बनाया । फिर दूसरा भी।

संदेष...........
एक रचना की सार्थकता पत्रिका में प्रकाषन से ही है। उसी का दूसरा रुख है ब्लाॅगिंग। अपनी अभिव्यक्ति के साथ नए प्रयोग इस के बिना संभव नही। मेरी पेंटिग

2010/1/1 चण्डीदत्त शुक्ल-chandidutt shukla <chandidu...@gmail.com>

ummedsingh baid

unread,
Jan 6, 2010, 3:51:51 AM1/6/10
to hindi...@googlegroups.com

name- Sadhak ummedsingh baid
link..... sahiasha.wordpress.com.
mobile-09903094508
e-mail- umme...@gmail.com

विचार के आयाम में – मैं.

हिन्दू-राष्ट्र-वादी संस्कार था. शेष समुदायों को या तो कमतर मानता था, या विरोध करता, अथवा फ़िर हिन्दुत्व के विस्तार के रूपमें स्वीकारता था.

संघर्ष से विजय-प्राप्ति लक्ष्य था, निरन्तर कर्म-प्रधान चर्या थी. राम-मन्दिर आन्दोलन हेतु जेल-यात्रा के बाद लिखना शुरु किया. लेख, कवितायें, नाटक,संस्मरण, रिपोर्ट, शोध-पत्र आदि लिखे-छपे.

गीता-उपनिषद, जैन दर्शन, बौद्ध, कुरान, बाईबिल आदि दर्शनों में जीवन के सूत्र ढूँढता था, ओशो एवं जे.कृष्णामूर्ति को काफ़ी पढा-समझा. समकालीन अधिकांश साहित्यकार, उपन्यास,नाटक,लेख,काव्य आदि पढे.संस्कृत, गुजराती,मराठी,राजस्थानी,हिन्दी,अंग्रेजी आदि भाषायें विचार को प्रभावित करती रहीं.

प्रश्न किन्तु बङे ही होते गये, जीना बोझिल हुआ.

 

१८ मार्च,२००९ जीवन-विद्या से परिचयके बाद-

१- मानव जाति एक- वसुधैव कुटुम्बकम.

२- संघर्ष नहीं, सह-अस्तित्व है. बदलाव के लिये अब तक के सभी आन्दोलनों से दूर.

३- स्व-अध्ययन. कार्य-व्यवहारमें अपनी आशा-विचार-इच्छा को जान लेता हूँ.

४- पहले का व्ज़िच्ज़्ज़्रिक संग्रह अपने-आप व्यवस्थित हो गया है. व्यर्थता और मूर्खता का स्मरण भी मुस्कान देकर लौट जाता है. लिखना अब भी जारी है.

 

व्यवहार के स्तर पर

अनिश्चित आचरण था, प्रायः दुखी ही करता था.

मानव-मानव में कई स्तर पर भेद कर रखे थे- देश-प्रान्त,भाषा-बोली, पहनावा-खान-पान, धर्म-जाति, सम्प्रदाय-शिक्षा, धन-पद, उम्र-लिंग, और अपनी तत्कालीन संचरणशील मनःस्थिति—इतनी भेद-रेखायें थी. इनसे प्रभावित आचरण था. इन सबके कारण आचरण की निश्चितता हो ही नहीं सकती थी. स्वयं दुखी होकर अपने परिवेशमें दुःख ही बाँटता था. शरीर थक जाता था, गुस्सा, खीज और निराशा के भीव कई बार  आत्म-हत्या तक उठे. बीमारियां पा ली. पेट की अनियमितता और चर्म-रोग के कारण सामान्य दिन-चर्या में भी बाधायें थी.

 

१८ मार्च २००९ से लगातार स्व-अध्ययन में हूँ, पूर्व-परिचितों के साथ व्यवहार की सीमा फोन तक है, अतः समीक्षा नहीं हो सकती. परिवारी जन- पत्नी-बच्चे कभी-कभी स्वीकारते हैं कि व्यवहार संवरा है, आशंका मुक्त नहीं हुये. सोचमें बदलावका प्रभाव स्वयं में देख पाता हूँ. आनन्द काल लम्बा होता है, व्यवधान काल छोटा होने लगा है. शरीर सामान्यतः थकता नहीं. दिनचर्या स्थिर-व्यवस्थित हुई- तो विचारे हुये सारे काम होने लगे हैं. कार्य विलम्बित न होनेका सुख-संतोष-आनन्द पाता हूँ. जिन प्रसंगो में अहंकार खङा हो जाता है, उसे देख पाता हूँ- पर अब प्रायश्चित और अवसाद नहीं आता.

 

कार्य

संघर्ष-जन्य तोङ-फ़ोङ के कार्यसे जुङा था. आन्दोलन का भाव निरन्तर चलता था. अधिकतर परिवारसे दूर प्रवास पर रहता था, इस कारण स्वास्थ्य सदा संकट में रहता था. दिनचर्या में अनियमितता का दुष्प्रभाव कार्यों पर पङता था. सही समझा तो पाया कि कार्य-व्यवहार के स्तर पर या तो शून्य था अथवा विपरीत. सांसारिक-आर्थिक दायित्वों से कटा एक गैर-जिम्मेदार,अनिश्चित और असहनीय व्यक्ति रहा हूँ.

सह-अस्तित्व की सहमति बनी तो संघर्ष के सारे आयाम या तो शेष हो गये, या कम हो रहे हैं. प्रवास कम होते-होते अत्यल्प है. जमीन और गायके साथ श्रम शुरु हुआ. लाडनूँ के अपने पैतृक घरको अध्ययन-केन्द्र मानकर स्वयं का अध्ययन कार्य-व्यवहार-विचार में शुरु हुआ है. कार्य अब ६० वर्ष की उम्रमें शुरु कर रहा हूँ.

 

अनुभव.

जिन बातों को अनुभव मानता था, वे सब परम्परा, शिक्षा और अपनी गलतियों का पुलिन्दा है.

शिक्षा- विज्ञान स्नातक, कानून में फ़ेल. साहित्य,दर्शन में स्नातकोतर. शोध कार्य निष्ठा पूर्वक पूरा करके डिग्री नहीं ली.  व्यवस्था (मेनेजमेंट).

ध्यान-साधना- विपश्यना के कई शिविर किये. प्रेक्षा-प्रशिक्षक रहा. योग-प्रशिक्षक. शरीर पर कई दुःसाहसिक प्रयोग किये. वनों-गुफ़ाओं के एकान्त में रहा.

सानाजिक कार्य- विद्यार्थी-कालमें स्काऊट. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का प्रचारक रहा. विद्यार्थी परिषद, विश्व हिन्दू परिषद,कल्याऊ आश्रम, एकल-विद्यालय,विद्या भारती, गायत्री परिवार,अणुव्रत, जीवन-विज्ञान, संस्कृत-संभाषण, प्राकृतिक-चिकित्सा आदिके कई शिविर, आन्दोलनों और कार्यक्रमों में सक्रिय रहा. साधु-सन्तों, समाज-शास्त्रियों, चिन्तकों के साथ सामूहिक और् एकान्त        चर्चा-सत्रों में व्यक्ति-परिवार-समाज-राष्ट्र और वैश्विक समस्याओं पर विमर्ष किया. संस्थाओं के चाल-चरित्र को समझ कर छोङा. शरीर-मन-बुद्धि सभी स्तरों पर प्यास बढती रही, एक शापित जीवन बिता रहा था.

बची देह-यात्रा स्वयं के अध्ययन में लगानी है, अन्य कोई योजना नहीं. बदलाव की धारा-दिशा बाहर से अन्दर की ओर बनी है. सार्थक भाव से कार्य-व्यवहार में लगा हूँ.स्वयं की जिम्मेदारी है कि शापित से साधक बनूँ.

अब अनुभव को पहचाना- उसकी तरफ़ बढ रहा हूँ. आनन्दम. कृतज्ञोस्मि. – साधक उम्मेदसिंह बैद.

 







2010/1/5 Dinesh Mali <siroh...@gmail.com>
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