*"निकाल इसी बात पे सौ का नोट"*
***राजीव तनेजा***
[image: Corrupt_Traffic_Cop_Cartoon]<http://lh3.ggpht.com/_gBWg3KQX_z0/SkagRFdk0qI/AAAAAAAAAr8/34hcfeA-qHo...>
“रुक...अबे रुक"....
"ज्जी...मैँ?"....
"ओर तेरा फूफ्फा?"...
"जी...बोलिए"...
"बेट्टे!....बोलूँगा तो मैँ जरूर और सुणेगा बी तू जरूर"अपनी मूँछों को ताव दे
बैरियर पे खड़ा सिपाही बोला
"हाँ जी!...बोलिए"...
"के बात?....तैन्ने दीखया कोणी यो गज भर लाम्बा... ठाढा सा(तगड़ा) पूरे अढाई
किलो का हाथ?"...
"ज्जी....शायद!...म्रेरा ध्यान दूसरी तरफ था"...
"वोई तो...*निकाल इसी बात पै सौ का नोट*"...
"सौ का नोट?...वो किसलिए?"....
"वो इसलिए मेरे फूफ्फा...के मन्ने आज घर पै बाहमण(ब्राहमण) जीमाणे सैं"....
"तो?"...
"अरे मेरे ताऊ!....मैन्ने घण्णी कुफात(मेहनत) कर के तैन्ने रुकवाया सै के
नई?"...
"जी...रुकवाया तो है"...
"तो हरजाणा कोण भरेगा?.....मैँ के तू?"...
"जी मैँ"...
"तो *निकाल इसी बात पे सौ का नोट*"...
"लेकिन सर!...ना तो मैँने लाल बत्ती जम्प की है और ना ही मैँ बिना ड्राईविंग
लाईसैंस के गाड़ी चला रहा हूँ और हैलमेट भी मैँने 'आई.एस.आई' मार्का वाला पहना
हुआ है"...
"ओ बेट्टे!...तैन्ने तो म्हारे दुश्मण देश का टोप्पा पहण्या सै"...
"ईब्ब तो बेट्टे...तू गया काम से"...
"तू जाणता कोणी....म्हारे साब जी घण्णे सख्त किस्म के इनसान
सैं.....देशद्रोहियाँ ने तो वो कति ना बक्शें...किसी भी कीमत पे छोड़ें कोणी"...
"ओर आज...आज तो साब जी वैसे भी घण्णे गुस्से में सैं"......
"क्या बात?....बीवी ने कहीं.......
"स्साले!...म्हारे साब जी का मजाक उड़ावे सै?"....
"ईब्ब तो बेट्टे...तेरी खैर कोणी"....
"सुसरे!...म्हारे साब जी की दुखती रग पे हाथ रखै सै.....ईब्ब तो बेट्टे तैने
तेरा बाप बी कोणी बचा सके"...
"लगा अपनी फटफटी ने सैड पे ओर अपणे इस 'आई.एस.आई' के टोप्पे ने तार के छांह मे
आ ज्या"सिपाही गुस्से से चिल्लाता हुआ बोला...
"तेरा रिमांड तो बेट्टे!...ईब्ब साहब जी आप ही लेवेंगे"...
"साब जी!...इस लौण्डे ने आप ही सूधा(सीधा) करो...घण्णा कानून झाड़ रिया सै और
म्हारे लाख मणा करणे के बावजूद आपके फैमिली मैटर को सरेआम पब्लिक में उछालण की
कोशिश कर रिया सै"....
"कामयाब तो कोणी होया ना?"...
"म्हारे होते हुए कोई ओर क्यूँकर कामयाब हो जावेगा?"...
"के बके सै?"..
"सॉरी जनाब!...गलती से मुँह से निकल गया"...
"हम्म!...
"क्यों बे?....कित्त का सै तू?"उसे इग्नोर कर काँस्टेबल मुझे घूरता हुआ बोला...
"जी....शालीमार बाग का"....
"के बात?....घणा एण्डी बणे सै?"...
"ना जी"...
"सुण!...इस सुसरे ने अड़े छोड़ ओर तू एक काम कर"सिपाही की तरफ मुखातिब होते हुए
काँस्टेबल बोला....
"जी....जी जनाब"...
"तू उस ट्राले वाल्ले से सुलट के आ....सुसरा!...बिना एंट्री दिए ही खिसकण के
चक्कर में दीख रैया सै मन्ने"...
"जा!...तब तक मैँ इस सुसरे के पेंच ढील्ले करता हूँ"...
"जी जनाब"...
"ओर सर जी...हैलमेट भी पाकिस्तानियों का पहणेया सै पट्ठे ने"सिपाही काँस्टेबल
के कान में फुसफुसाता हुआ बोला....
"हम्म..."काँस्टेबल ने मुझे ऊपर से नीचे तक गौर से निहारा और बोला...."नाम
बता"...
"ज्जी...र...र..रा..
"ओए...ये र....र...रा कर के मन्ने रागणी(हरियाणवी लोक गीत) ना सुणा ओर सीधी
तरिया अपणा नाम बता"कान खुजाते हुए काँस्टेबल बोला ...
"जी...रा....राजी...
"राजी तो बेट्टे तन्ने मैँ करूँगा जब तेरे घर पै...रेड मारण तांई पूरी फोर्स
भेजूँगा"....
"सूधी तरियाँ क्लीयर कट अपणा पूरा नाम बता....
"जी...राजीव"...
"जी राजीव?....के बात?...थारे में 'जी' पहले लगावें हैँ ओर 'नाम' बाद में?"...
"ना जी...नाम पहले ओर जी बाद में"....
"तो इसका मतबल्ल तेरा नाम राजीव है"....
जी"...
"ओ.के...ईब्ब अच्छे बच्चों की तरिया यो बी साफ-साफ बता दे कि तू किसके लिए
ओर....कितने सालों से जासूसी करे सै?...थम्हारे...यहाँ कौन-कौन से और कितने
एजेंट सैं?"
"सर!...आपको गलतफहमी हुई है...मैँ....मैँ तो पक्का खालिस देशभक्त हूँ...आप
चाहें तो बेशक मेरी बीवी से पूछ लें"...
"ओए...मन्ने औरतां के मुँह लगणे का शौक कोणी"....
"माँ कसम....पक्का बाल-ब्रह्मचारी सूँ".....
"सर!...मैँ सच कह रहा हूँ....आप खुद चैक कर लें...कपड़े भी मैँ स्वदेशी याने के
होम मेड इस्तेमाल करता हूँ"...
"होम मेड का मतबल्ल स्वदेशी होवे है?".....
"ज्जी...वो दरअसल मेरा मतबल्ल...ऊप्स सॉरी मेरा मतलब था कि....
"स्साले हरामखोर!...'रे बैन' का इम्पोर्टेड गॉगल लगा के मण्णे बेवकूफ बणावे
सै?"....
"तेरे जीस्से छत्तीस को तो मैँ रोज झोट्टाराम के खेत में चराऊँ सूँ"...
"सर!...ये झोट्टाराम कौन?"सिपाही वापिस आ काँस्टेबल के कान में फुसफुसाता हुआ
बोला...
"मेरे ताऊ का फूफ्फा...और कौण?"...
"सर!...आपको गलतफहमी हुई है...मैँ...मैँ तो....
"यो मैँ...मैँ कर के मिमियाणा छोड़ और सीधी तरह बता के कब से तू देश के साथ
गद्दारी कर रहा है?"....
"सर!...मैँ तो सर सीधा-साधा लेखक प्राणी हूँ...मैँ भला अपने ही देश के साथ
गद्दारी क्यों करने लगा?"...
"तू....तू लेखक सै?"मुझे ऊपर से नीचे तक गौर से निहारते हुए काँस्टेबल बोला...
"ज्जी...जी सर"...
"स्साले!...पहले क्यूँ नहीं
...
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