हास्यिका: अथ श्री चमचा पुराण : कुछ दोहे

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anand pathak

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Jun 19, 2009, 11:17:41 AM6/19/09
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राजनीति चमचागिरी यही सार  यही तत्व
जितने चमचे साथ हों उतना अधिक महत्त्व
 
मनसा वाचा कर्मणा ना होगा जो भक्त
वह चमचा रह जाएगा आजीवन अभिशप्त
 
नेता से पहले मिले चमचा जी से आप
'सूटकेस' का वज़न देख कारज लेते भांप
 
चमचों के दो वर्ग हैं 'घर-घूसर' और  'भक्त '
घर-घूसर निर्धन करे , भक्त  चूस ले रक्त
 
'घर-घूसर' घर में घुसे पीकदान ले आय
तेल लगा मालिस करे नेता जी का काय
 
भक्त चरण में लोटता नेता जी का दास
जितनी आवे 'डालियाँ' रख ले अपने पास
 
'भैया' 'मालिक ' मालकिन' जिसके कन्धों पर
ऐसे सेवक  को कहे  चमचा  'घर-घूसर'
 
|| अथ श्री चमचा पुराण प्रथमोध्याय ||
 
--आनंद

rajiv taneja

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Jun 20, 2009, 10:34:54 PM6/20/09
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मज़ेदार

2009/6/19 anand pathak <akpath...@gmail.com>



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राजीव तनेजा
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