> ताल की मछली
> मंदिर के चैखट पर सिर नवा कर
> मन ही मन उसने कुछ मांगा
> और फिर, पत्नी की देख कर
> अर्थपूर्ण मुस्कराहट के साथ पूछा-
> तुम क्या मांगी?
> पत्नी मुस्करा कर रह गयी.
> फिर एक दिन
> प्यार के क्षणों में
> पत्नी को अपनी बाहों में समेट
> आँखों में आँखें डाल कर
> फुसफुसा कर कहा-
> मुझे प्यारा सा एक बेटा चाहिए...
> और एक दिन
> पत्नी ने अपने पति की गोद में
> एक नवजात शिशु को डालते हुए कहा-
> ये लो....
> पिता झूम कर गा उठे-
> मेरा नाम करेगा रौशन...
> जग में मेरा राज दुलारा
> माँ की आँखों में
> भावुकता के बादल उमर पडे़
> ममत्व की बारिश में सराबोर हो कर
> गुनगुना उठी-
> चंदा है तू, मेरा सूरज है तू
> तू मेरी आँखों का तारा है तू
> जब दुध नहीं उतरा छाती से
> तब माँ ने लेना कम कर दी
> हेमाटानिक कैप्सूल और टानिक...
> बचाए गये पैसे से
> खरीदने लगी- लैक्टोजन मिल्क.
> पिता ओवरटाइम करने लगे
> ताकि एडमिशन करवाया जा सके काॅन्वेंट में,
> घर का एक हिस्सा खाली कर
> लगा दिया गया किराये पर
> ताकि व्यवस्था हो सके
> स्कूल फी, ड्रेस, किताबें वगैरह...
> उन दिनों जब बीमार पड़ा तो-
> पिता ने कर्ज लिए दोस्तों से
> माँ ने गिरवी रख दी टाॅप्स
> उपवास रख कर मन्नतें भी मानी
> ...तब जाकर जान बची उसकी
> और एक दिन
> पिता ने
> गाँव की पुस्तैनी जमीन बेच कर
> ढाई लाख में नौकरी खरीद दी
> माँ ने जेवर का डब्बा
> बहू के हाथों में रख कर बोली-
> ये तू रख ले, शरीर के इस गहने का
> क्या करूँगी ?
> तू तो मेरे घर का गहना है
> न शिकवा, न शिकायत
> न कुछ कहना है.
> और फिर एक दिन
> जब अंतिम पहर का सूरज
> जीवन की नदी की चैड़ाई नापने लगा
> तब सारे प्रश्नवाचक चिन्ह
> रिश्तों को तौलने लगा.
> आखिर ऐसा क्या हुआ कि
> बाथरूम से लगे गलियारे को
> प्लाईवुड से घेर कर
> बनाये गये 8 गुना 7 के कमरे में
> सिमट गये माता-पिता,
> वक्त-बे वक्त
> दो रोटी और अचार
> झनाक से पटकते हुए
> बहू झल्लाती
> पता नहीं और कितने दिन जिंदा रहेंगे.....
> .................
> दोनों एक दूसरे ओर तकते
> पिता थूक घोंटते हुए कहते-
> मुझे भूख नहीं है, तुम खा लो
> माँ आँसू पोछते हुए कहती-
> मुझे भूख नहीं, तुम खा लो.....
> उधर शाम को चाय की चुस्कियाँ लेते
> बेटा नाक-भौं सिकोड़ता-
> यह मैं क्या सुन रहा हूँ
> आजकल आपलोग खाते-पीते नहीं
> और दिन भर फालतू बकर-बकर करते रहते हैं
> मुश्किल हो गया है
> आपलोगों के साथ एडस्ट करना
> ओफ्फ.....
> माँ की आँखों में दूध सूख गया
> पिता के जेहन से वो गाना उतर गया
> एक्वेरियम में सिमट कर रह गये थे
> ताल की मछलियों जैसे माता-पिता.
> विजय रंजन