महरबां

1 view
Skip to first unread message

SURINDER RATTI

unread,
Nov 19, 2009, 12:23:14 AM11/19/09
to hindi...@googlegroups.com

मित्रो, एक रचना आपके सामने पेश कर रहा हूँ - सुरिन्दर रत्ती

 

महरबां
अगर मुट्ठी में है वो आसमां,
कोई न कहेगा तुमको नातवाँ

शहंशाह जैसी होगी ज़िन्दगी,
हर लम्हा मस्ती भरा जवां

हर शख्स की जुबां पे नाम,
तेरा चर्चा होगा हर सू बायां

चमक-दमक में लिपटी ज़ीस्त,
काले अँधेरे फिर ठहरेंगे कहाँ

हर शे क़दमों में हाज़िर पल में,
मयस्सर हुआ है बिहिश्त यहाँ

रब ने बनाया हो जिसका नसीबा,
"रत्ती" कौन रोकेगा सब महरबां

शब्दार्थ
नातवाँ = कमज़ोर, ज़ीस्त = जीवन,
मयस्सर = उपलब्ध, बिहिश्त = स्वर्ग

हर सू = चारो तरफ
Pls. visit my blog. http://surinderratti.blogspot.com


Reply all
Reply to author
Forward
0 new messages