*हर दुआ कुबूल हो आपकी,* * हर तमन्ना साकार हो,* * महफिलों सी **रहे **रोशन जिंदगी,* * कभी न जीवन में वीरानी हो,* * हमारे तरफ से आप सभी को* ** *"नवरात्र की ढेरों शुभकामनाएँ" **एवं * ** * ** **"ईद मुबारक हो!!!"*
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Main aap jaisa matter hindi me kaise likh, bana aur bhej sakta hun. Please tell me so that I can write in Hindi. Thanks.
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From: Dinesh R Saroj <dineshrsa...@gmail.com>
To: hindibhasha@googlegroups.com
Sent: Monday, September 21, 2009 9:04:03 AM
Subject: [Hindi Bhasha] "नवरात्र की ढेरों शुभकामनाएँ" एवं "ईद मुबारक हो!!!"
हर दुआ कुबूल हो आपकी,
हर तमन्ना साकार हो,
महफिलों सी रहे रोशन जिंदगी,
कभी न जीवन में वीरानी हो,
हमारे तरफ से आप सभी को
"नवरात्र की ढेरों शुभकामनाएँ"
एवं
"ईद मुबारक हो!!!"
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Dinesh Saroj
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२१ सितम्बर २००९ ६:४४ PM को, Jeevan Mittal <mitta...@delhiwalah.com> ने लिखा:
Navratra ki shubhkamnaye to theak hai per doosari....? kyon? jabki 15 august aur 26 janwari ko unki bherh itni nahi hoti jitna veh log tajmahal aur roads per karte hai,,,,? iska kya matlab hua yeh samajh ke bahar hai? sath hi ve log hamare kisi tyohar ki shubhkamnayen publicaly nahi dete....? sochiye.....varna jo log polio drops/ parivar niojan / nagrikta ke bare me ghambhir nahi hai aur din dooni rat chogni apni sankhaya bada rahe hai aur yahi raftar rahi to bahut jaldi veh hi dikhenge bharat me hum nahi rahenge....jaisa kuch din pahale indian mujahiddin ne hamare news papers me vigaypti prakashit karvai ki 5 sal me bharat se hindoon ka naan nishan mita denge..? kahan hai hamari bhartiyata ki bhavna....nagrikta ki bhavna..? ya gulami aur maska parast hi hamari pahachan ban gai hai....? -eak bhartiya nagrik
आपकी वतनपरस्ती एवं उससे जुडी चिंता के लिये आपको सलाम!!!
आपकी चिंता एवं उसके उपलक्ष्य में आपने जो ताजमहल एवं सडकों पर भीड़ वाली बात कही है मैं भी उससे इत्तेफाक रखता हूँ| परन्तु १५ अगस्त एवं २६ जनवरी में इकठ्ठे भीड़ में से आप किसी हिन्दू, मुस्लिम या किसी ईसाई को पृथक कैसे कर पायेंगे? क्या ऐसा कोई चस्मा है? क्या कहीं भीड़ के आंकड़े निर्दिष्ट किये हुए है? या हम बस ऐसा मान लेते है और अपने मन में अवधारणा बना लेते है|
जब आप ताजमहल एवं सडकों पर भीड़ वाली बात करते हैं, तब शायद आप यह भूल जाते है या यूँ कहे की नजरअंदाज कर देते है की उससे कहीं कहीं ज्यादा भीड़ मुंबई एवं अन्य जगहों पर गणेश पंडालों में गणेश जी के दर्शन के लिए उमड़ती है तथा चतुर्दशी के दिन गणेश विसर्जन करने आये श्रध्हलुओं की होती है, जिसे संभालना प्रशासन के लोगों के लिए सिरदर्द बन जाता है| मुंबई के जन्माष्टमी को भी शायद आप भूल गए जिसमे इस बार swine flu के संक्रमण के भय के बावजूद भी भारी भीड़ उमड़ पड़ी थी| एसे और भी कई उधाहरण मैं प्रस्तुत कर सकता हूँ जैसे कुम्भ का मेला ईत्यादी| क्या आपने कभी क्रिकेट मैच में जुटे भीड़ को उनके जाती-धर्म के आधार पर आंकने की कोशिश की है?
आज भारत देश एक धर्म निरपेक्ष देश के रूप में अपनी संप्रभुता बना चुका है.... और भारतीय संविधान ने सभी धर्मों को उनकी संप्रभुता और स्वतंत्रता बनाये रखने का पुर-पूरा अधिकार दिया है| और इसपर न ही आप ना ही मैं और ना ही कोई और प्रश्न उठा सकता है|
और रही "इंडियन मुजाहिद्दीन" के ५ सालों में हिन्दुओं का नामों निशां मिटाने की तो उसके लिए आप निश्चिंत रहें.... ऐसी कोशिशे सदियों से होती आ रही हैं पर सदा ही नाकाम भी होती रही हैं!!! भारतीय संस्कृति इतनी उदार और परिपक्कव है की यह सभी को अपने में समाहित कर लेती है!!!
कोई भी जागरूक माता-पिता अपने बच्चों को पोलियो टिका से वांच्छित नहीं रखेंगे .... और यदि कोई रखता है तो मैं समझता हूँ वे नासमझ हैं, उन्हें जागरुक बनाने की जरुरत है| इसे धर्म-जाती के आधार से देखना मुझे तर्क सांगत लगता है| और यदि कोई धार्मिक गुरु पोलियो टिका न देने की सलाह या फतवा देता है तो मैं इसे धर्मान्धता और अज्ञानता ही कहूँगा|
परिवारनियोजन एक गंभीर मुद्दा है, जिस तरह जनसँख्या विस्फोट हो रहा है यह निकट भविष्य के लिए बहुत ही बड़ी समस्या बनता जा रहा है| पर मैं फिर कहना चाहूँगा इस विषय को भी एक रंग के चश्मे से न देखें| आपको केवल मुस्लिम परिवार ही नहीं अपितु हर धर्म के परिवार मिल जायेंगे जो बच्चों को ईश्वर का रूप कहते हैं और परिवार नियोजन के नाम से कन्नी काटते हैं| मैंने एक हिन्दू धर्मगुरु (किसी का नाम नहीं लेना चाहूँगा) के पुस्तक में उन्हें यह सन्देश देते पाया है की भारत देश में हिन्दुओं की संख्या बढाइये सरकार के परिवार नियोजन को तवज्जो न दें? इसके बारे में आप क्या कहेंगे??? मैं तो इसे धर्मान्धता ही कहूँगा फिर चाहे कोई भी धर्म गुरु ऐसा क्यों न कहे|
रही भारतीय नागरिकता की बात, तो भाईजी, तो जो मुस्लिम खुद को भारतीय या हिन्दुस्तानी कहलाना पसंद नहीं करते थे (या जैसी भी परिस्थिति रही हो) १९४७ में ही भारत छोड़ चले गए थे| और जो देश छोड़ कर नहीं गए यहीं रह गए आप उन्हें देशप्रेमी कहने के बजाय उन्हें एक विशेष रंग के चश्में से देख रहे हैं!!! यह कहाँ तक तर्कसंगत है??? आप यह भूल जाते हैं की मुस्लिमों के आलावा कुछ गैर मुस्लिम (हिन्दू, सिख एवं अन्य) १९४७ में भारत नहीं आये थे और जहां थे वहीँ बसे रहे, उन्हें अपनी जन्मभूमि से प्रेम था चाहे अब वह अखंड भारत देश का हिस्सा न रहा हो| उनका मैं सम्मान करता हूँ| और जो मुस्लिम यहाँ रह गए हैं उनका भी सम्मान करता हूँ|
कृपया हमारे राजनीतिज्ञों एवं तथाकथित कट्टरपंथीयों की तरह अखंड भारत देश को जाती-धर्म के चश्में से मत देखें| कम से कम मैं इतना कह ही सकता हुं की मेरे जितने भी गैर हिन्दू मित्र या जानने वाले लोग हैं वे मुझे हर हिंन्दु धार्मिक त्योहारों की शुभकामना के साथ साथ स्वतंत्रता दिवस एवं गणतंत्र दिवस की बधाई देते है| और मैं इसी पर विश्वास करता हुं| और तो और कुछ तो मेरे साथ मंदिरों में आकर प्रार्थना करने में जरा भी संकोच नहीं करते| और मैं स्वयं भी दरगाहों, मजारों, गिरिजाघरों में उसी श्रध्दा से जाता हूँ जैसे की मंदिरों में|
मैं सर्वधर्म समभाव में यकीन रखता हूँ, और हर धर्म को सामान रूप से आदर भी देता हूँ| और मेरा सभी महानुभावों से निवेदन है की मानव धर्म को सभी जाती-धर्मों से सर्वोपरि समझे| वैस हर इंसान अपनी विचारधारा के लिए स्वतंत्र है| सुनी-सुनाई बातों में कितना सत्य है या कितनी छलावा यह मैं नहीं कह सकता| hindibhashaGroup पर भी गैर हिन्दू
...
बेशक़!! जो भारतीय अपने आपको हिन्दुस्तानी कहलाना मंज़ूर नहिं करते उन्हें भारत में रहना ही नही चाहिये। बताईये कौन सा मज़हब-धर्म वतन से नफरत सिखाता है? मैं उसे धर्म- मज़हब नहिं क्हुंगी। हम सब भारतीय ही हैं। और रहेंगे। ईस देश को तोडनेवाली ताक़्तों से नफरत है मुझे। मेरा हिन्दुस्तान "महान" है। जहां मेरा जन्म हुआ वो भारत को मेरा सलाम है। रज़िया मिर्ज़ा 2009/9/25 Dinesh R Saroj <dineshrsa...@gmail.com>
> आपकी वतनपरस्ती एवं उससे जुडी चिंता के लिये आपको सलाम!!!
> आपकी चिंता एवं उसके उपलक्ष्य में आपने जो ताजमहल एवं सडकों पर भीड़ वाली बात > कही है मैं भी उससे इत्तेफाक रखता हूँ| परन्तु १५ अगस्त एवं २६ जनवरी में > इकठ्ठे भीड़ में से आप किसी हिन्दू, मुस्लिम या किसी ईसाई को पृथक कैसे कर > पायेंगे? क्या ऐसा कोई चस्मा है? क्या कहीं भीड़ के आंकड़े निर्दिष्ट किये हुए > है? या हम बस ऐसा मान लेते है और अपने मन में अवधारणा बना लेते है|
> जब आप ताजमहल एवं सडकों पर भीड़ वाली बात करते हैं, तब शायद आप यह भूल जाते है > या यूँ कहे की नजरअंदाज कर देते है की उससे कहीं कहीं ज्यादा भीड़ मुंबई एवं > अन्य जगहों पर गणेश पंडालों में गणेश जी के दर्शन के लिए उमड़ती है तथा > चतुर्दशी के दिन गणेश विसर्जन करने आये श्रध्हलुओं की होती है, जिसे संभालना > प्रशासन के लोगों के लिए सिरदर्द बन जाता है| मुंबई के जन्माष्टमी को भी शायद > आप भूल गए जिसमे इस बार swine flu के संक्रमण के भय के बावजूद भी भारी भीड़ उमड़ > पड़ी थी| एसे और भी कई उधाहरण मैं प्रस्तुत कर सकता हूँ जैसे कुम्भ का मेला > ईत्यादी| क्या आपने कभी क्रिकेट मैच में जुटे भीड़ को उनके जाती-धर्म के आधार पर > आंकने की कोशिश की है?
> आज भारत देश एक धर्म निरपेक्ष देश के रूप में अपनी संप्रभुता बना चुका है.... > और भारतीय संविधान ने सभी धर्मों को उनकी संप्रभुता और स्वतंत्रता बनाये रखने > का पुर-पूरा अधिकार दिया है| > और इसपर न ही आप ना ही मैं और ना ही कोई और प्रश्न उठा सकता है|
> और रही "इंडियन मुजाहिद्दीन" के ५ सालों में हिन्दुओं का नामों निशां मिटाने > की तो उसके लिए आप निश्चिंत रहें.... ऐसी कोशिशे सदियों से होती आ रही हैं पर > सदा ही नाकाम भी होती रही हैं!!! भारतीय संस्कृति इतनी उदार और परिपक्कव है की > यह सभी को अपने में समाहित कर लेती है!!!
> कोई भी जागरूक माता-पिता अपने बच्चों को पोलियो टिका से वांच्छित नहीं रखेंगे > .... और यदि कोई रखता है तो मैं समझता हूँ वे नासमझ हैं, उन्हें जागरुक बनाने > की जरुरत है| इसे धर्म-जाती के आधार से देखना मुझे तर्क सांगत लगता है| और यदि > कोई धार्मिक गुरु पोलियो टिका न देने की सलाह या फतवा देता है तो मैं इसे > धर्मान्धता और अज्ञानता ही कहूँगा|
> परिवारनियोजन एक गंभीर मुद्दा है, जिस तरह जनसँख्या विस्फोट हो रहा है यह निकट > भविष्य के लिए बहुत ही बड़ी समस्या बनता जा रहा है| पर मैं फिर कहना चाहूँगा इस > विषय को भी एक रंग के चश्मे से न देखें| आपको केवल मुस्लिम परिवार ही नहीं > अपितु हर धर्म के परिवार मिल जायेंगे जो बच्चों को ईश्वर का रूप कहते हैं और > परिवार नियोजन के नाम से कन्नी काटते हैं| मैंने एक हिन्दू धर्मगुरु (किसी का > नाम नहीं लेना चाहूँगा) के पुस्तक में उन्हें यह सन्देश देते पाया है की भारत > देश में हिन्दुओं की संख्या बढाइये सरकार के परिवार नियोजन को तवज्जो न दें? > इसके बारे में आप क्या कहेंगे??? मैं तो इसे धर्मान्धता ही कहूँगा फिर चाहे कोई > भी धर्म गुरु ऐसा क्यों न कहे|
> रही भारतीय नागरिकता की बात, तो भाईजी, तो जो मुस्लिम खुद को भारतीय या > हिन्दुस्तानी कहलाना पसंद नहीं करते थे (या जैसी भी परिस्थिति रही हो) १९४७ में > ही भारत छोड़ चले गए थे| और जो देश छोड़ कर नहीं गए यहीं रह गए आप उन्हें > देशप्रेमी कहने के बजाय उन्हें एक विशेष रंग के चश्में से देख रहे हैं!!! यह > कहाँ तक तर्कसंगत है??? आप यह भूल जाते हैं की मुस्लिमों के आलावा कुछ गैर > मुस्लिम (हिन्दू, सिख एवं अन्य) १९४७ में भारत नहीं आये थे और जहां थे वहीँ बसे > रहे, उन्हें अपनी जन्मभूमि से प्रेम था चाहे अब वह अखंड भारत देश का हिस्सा न > रहा हो| उनका मैं सम्मान करता हूँ| और जो मुस्लिम यहाँ रह गए हैं उनका भी > सम्मान करता हूँ|
> कृपया हमारे राजनीतिज्ञों एवं तथाकथित कट्टरपंथीयों की तरह अखंड भारत देश को > जाती-धर्म के चश्में से मत देखें| कम से कम मैं इतना कह ही सकता हुं की मेरे > जितने भी गैर हिन्दू मित्र या जानने वाले लोग हैं वे मुझे हर हिंन्दु धार्मिक > त्योहारों की शुभकामना के साथ साथ स्वतंत्रता दिवस एवं गणतंत्र दिवस की बधाई > देते है| और मैं इसी पर विश्वास करता हुं| और तो और कुछ तो मेरे साथ मंदिरों > में आकर प्रार्थना करने में जरा भी संकोच
> बेशक़!! जो भारतीय अपने आपको हिन्दुस्तानी कहलाना मंज़ूर नहिं करते उन्हें भारत > में रहना ही नही चाहिये। बताईये कौन सा मज़हब-धर्म वतन से नफरत सिखाता है? मैं > उसे धर्म- मज़हब नहिं क्हुंगी। हम सब भारतीय ही हैं। और रहेंगे। ईस देश को > तोडनेवाली ताक़्तों से नफरत है मुझे। मेरा हिन्दुस्तान "महान" है। > जहां मेरा जन्म हुआ वो भारत को मेरा सलाम है। > रज़िया मिर्ज़ा > 2009/9/25 Dinesh R Saroj <dineshrsa...@gmail.com>
> प्रिय मोहनजी,
>> आपकी वतनपरस्ती एवं उससे जुडी चिंता के लिये आपको सलाम!!!
>> आपकी चिंता एवं उसके उपलक्ष्य में आपने जो ताजमहल एवं सडकों पर भीड़ वाली बात >> कही है मैं भी उससे इत्तेफाक रखता हूँ| परन्तु १५ अगस्त एवं २६ जनवरी में >> इकठ्ठे भीड़ में से आप किसी हिन्दू, मुस्लिम या किसी ईसाई को पृथक कैसे कर >> पायेंगे? क्या ऐसा कोई चस्मा है? क्या कहीं भीड़ के आंकड़े निर्दिष्ट किये हुए >> है? या हम बस ऐसा मान लेते है और अपने मन में अवधारणा बना लेते है|
>> जब आप ताजमहल एवं सडकों पर भीड़ वाली बात करते हैं, तब शायद आप यह भूल जाते है >> या यूँ कहे की नजरअंदाज कर देते है की उससे कहीं कहीं ज्यादा भीड़ मुंबई एवं >> अन्य जगहों पर गणेश पंडालों में गणेश जी के दर्शन के लिए उमड़ती है तथा >> चतुर्दशी के दिन गणेश विसर्जन करने आये श्रध्हलुओं की होती है, जिसे संभालना >> प्रशासन के लोगों के लिए सिरदर्द बन जाता है| मुंबई के जन्माष्टमी को भी शायद >> आप भूल गए जिसमे इस बार swine flu के संक्रमण के भय के बावजूद भी भारी भीड़ उमड़ >> पड़ी थी| एसे और भी कई उधाहरण मैं प्रस्तुत कर सकता हूँ जैसे कुम्भ का मेला >> ईत्यादी| क्या आपने कभी क्रिकेट मैच में जुटे भीड़ को उनके जाती-धर्म के आधार पर >> आंकने की कोशिश की है?
>> आज भारत देश एक धर्म निरपेक्ष देश के रूप में अपनी संप्रभुता बना चुका है.... >> और भारतीय संविधान ने सभी धर्मों को उनकी संप्रभुता और स्वतंत्रता बनाये रखने >> का पुर-पूरा अधिकार दिया है| >> और इसपर न ही आप ना ही मैं और ना ही कोई और प्रश्न उठा सकता है|
>> और रही "इंडियन मुजाहिद्दीन" के ५ सालों में हिन्दुओं का नामों निशां मिटाने >> की तो उसके लिए आप निश्चिंत रहें.... ऐसी कोशिशे सदियों से होती आ रही हैं पर >> सदा ही नाकाम भी होती रही हैं!!! भारतीय संस्कृति इतनी उदार और परिपक्कव है की >> यह सभी को अपने में समाहित कर लेती है!!!
>> कोई भी जागरूक माता-पिता अपने बच्चों को पोलियो टिका से वांच्छित नहीं रखेंगे >> .... और यदि कोई रखता है तो मैं समझता हूँ वे नासमझ हैं, उन्हें जागरुक बनाने >> की जरुरत है| इसे धर्म-जाती के आधार से देखना मुझे तर्क सांगत लगता है| और यदि >> कोई धार्मिक गुरु पोलियो टिका न देने की सलाह या फतवा देता है तो मैं इसे >> धर्मान्धता और अज्ञानता ही कहूँगा|
>> परिवारनियोजन एक गंभीर मुद्दा है, जिस तरह जनसँख्या विस्फोट हो रहा है यह >> निकट भविष्य के लिए बहुत ही बड़ी समस्या बनता जा रहा है| पर मैं फिर कहना >> चाहूँगा इस विषय को भी एक रंग के चश्मे से न देखें| आपको केवल मुस्लिम परिवार >> ही नहीं अपितु हर धर्म के परिवार मिल जायेंगे जो बच्चों को ईश्वर का रूप कहते >> हैं और परिवार नियोजन के नाम से कन्नी काटते हैं| मैंने एक हिन्दू धर्मगुरु >> (किसी का नाम नहीं लेना चाहूँगा) के पुस्तक में उन्हें यह सन्देश देते पाया है >> की भारत देश में हिन्दुओं की संख्या बढाइये सरकार के परिवार नियोजन को तवज्जो न >> दें? इसके बारे में आप क्या कहेंगे??? मैं तो इसे धर्मान्धता ही कहूँगा फिर >> चाहे कोई भी धर्म गुरु ऐसा क्यों न कहे|
>> रही भारतीय नागरिकता की बात, तो भाईजी, तो जो मुस्लिम खुद को भारतीय या >> हिन्दुस्तानी कहलाना पसंद नहीं करते थे (या जैसी भी परिस्थिति रही हो) १९४७ में >> ही भारत छोड़ चले गए थे| और जो देश छोड़ कर नहीं गए यहीं रह गए आप उन्हें >> देशप्रेमी कहने के बजाय उन्हें एक विशेष रंग के चश्में से देख रहे हैं!!! यह >> कहाँ तक तर्कसंगत है??? आप यह भूल जाते हैं की मुस्लिमों के आलावा कुछ गैर >> मुस्लिम (हिन्दू, सिख एवं अन्य) १९४७ में भारत नहीं आये थे और जहां थे वहीँ बसे >> रहे, उन्हें अपनी जन्मभूमि से प्रेम था चाहे अब वह अखंड भारत देश का हिस्सा न >> रहा हो| उनका मैं सम्मान करता हूँ| और जो मुस्लिम यहाँ रह गए हैं उनका भी >> सम्मान करता हूँ|
>> कृपया हमारे राजनीतिज्ञों एवं तथाकथित कट्टरपंथीयों की तरह अखंड भारत देश को >> जाती-धर्म के चश्में से मत देखें| कम से कम मैं इतना कह ही सकता हुं की मेरे >> जितने भी गैर हिन्दू मित्र या जानने वाले लोग हैं वे मुझे हर हिंन्दु धार्मिक >> त्योहारों की शुभकामना के साथ साथ स्वतंत्रता दिवस एवं गणतंत्र दिवस की बधाई >> देते
दिनेश जी ........ मोहन जी को संबोधित करते हुए आपने सधे शब्दों में बातें रखी हैं . इसे समुदायिक ब्लॉग "सच बोलना मना है <http://www.janokti.blogspot.com>" पर पोस्ट कर रहा हूँ .
> बेशक़!! जो भारतीय अपने आपको हिन्दुस्तानी कहलाना मंज़ूर नहिं करते उन्हें भारत >> में रहना ही नही चाहिये। बताईये कौन सा मज़हब-धर्म वतन से नफरत सिखाता है? मैं >> उसे धर्म- मज़हब नहिं क्हुंगी। हम सब भारतीय ही हैं। और रहेंगे। ईस देश को >> तोडनेवाली ताक़्तों से नफरत है मुझे। मेरा हिन्दुस्तान "महान" है। >> जहां मेरा जन्म हुआ वो भारत को मेरा सलाम है। >> रज़िया मिर्ज़ा >> 2009/9/25 Dinesh R Saroj <dineshrsa...@gmail.com>
>> प्रिय मोहनजी,
>>> आपकी वतनपरस्ती एवं उससे जुडी चिंता के लिये आपको सलाम!!!
>>> आपकी चिंता एवं उसके उपलक्ष्य में आपने जो ताजमहल एवं सडकों पर भीड़ वाली बात >>> कही है मैं भी उससे इत्तेफाक रखता हूँ| परन्तु १५ अगस्त एवं २६ जनवरी में >>> इकठ्ठे भीड़ में से आप किसी हिन्दू, मुस्लिम या किसी ईसाई को पृथक कैसे कर >>> पायेंगे? क्या ऐसा कोई चस्मा है? क्या कहीं भीड़ के आंकड़े निर्दिष्ट किये हुए >>> है? या हम बस ऐसा मान लेते है और अपने मन में अवधारणा बना लेते है|
>>> जब आप ताजमहल एवं सडकों पर भीड़ वाली बात करते हैं, तब शायद आप यह भूल जाते >>> है या यूँ कहे की नजरअंदाज कर देते है की उससे कहीं कहीं ज्यादा भीड़ मुंबई एवं >>> अन्य जगहों पर गणेश पंडालों में गणेश जी के दर्शन के लिए उमड़ती है तथा >>> चतुर्दशी के दिन गणेश विसर्जन करने आये श्रध्हलुओं की होती है, जिसे संभालना >>> प्रशासन के लोगों के लिए सिरदर्द बन जाता है| मुंबई के जन्माष्टमी को भी शायद >>> आप भूल गए जिसमे इस बार swine flu के संक्रमण के भय के बावजूद भी भारी भीड़ उमड़ >>> पड़ी थी| एसे और भी कई उधाहरण मैं प्रस्तुत कर सकता हूँ जैसे कुम्भ का मेला >>> ईत्यादी| क्या आपने कभी क्रिकेट मैच में जुटे भीड़ को उनके जाती-धर्म के आधार पर >>> आंकने की कोशिश की है?
>>> आज भारत देश एक धर्म निरपेक्ष देश के रूप में अपनी संप्रभुता बना चुका >>> है.... और भारतीय संविधान ने सभी धर्मों को उनकी संप्रभुता और स्वतंत्रता बनाये >>> रखने का पुर-पूरा अधिकार दिया है| >>> और इसपर न ही आप ना ही मैं और ना ही कोई और प्रश्न उठा सकता है|
>>> और रही "इंडियन मुजाहिद्दीन" के ५ सालों में हिन्दुओं का नामों निशां मिटाने >>> की तो उसके लिए आप निश्चिंत रहें.... ऐसी कोशिशे सदियों से होती आ रही हैं पर >>> सदा ही नाकाम भी होती रही हैं!!! भारतीय संस्कृति इतनी उदार और परिपक्कव है की >>> यह सभी को अपने में समाहित कर लेती है!!!
>>> कोई भी जागरूक माता-पिता अपने बच्चों को पोलियो टिका से वांच्छित नहीं >>> रखेंगे .... और यदि कोई रखता है तो मैं समझता हूँ वे नासमझ हैं, उन्हें जागरुक >>> बनाने की जरुरत है| इसे धर्म-जाती के आधार से देखना मुझे तर्क सांगत लगता है| >>> और यदि कोई धार्मिक गुरु पोलियो टिका न देने की सलाह या फतवा देता है तो मैं >>> इसे धर्मान्धता और अज्ञानता ही कहूँगा|
>>> परिवारनियोजन एक गंभीर मुद्दा है, जिस तरह जनसँख्या विस्फोट हो रहा है यह >>> निकट भविष्य के लिए बहुत ही बड़ी समस्या बनता जा रहा है| पर मैं फिर कहना >>> चाहूँगा इस विषय को भी एक रंग के चश्मे से न देखें| आपको केवल मुस्लिम परिवार >>> ही नहीं अपितु हर धर्म के परिवार मिल जायेंगे जो बच्चों को ईश्वर का रूप कहते >>> हैं और परिवार नियोजन के नाम से कन्नी काटते हैं| मैंने एक हिन्दू धर्मगुरु >>> (किसी का नाम नहीं लेना चाहूँगा) के पुस्तक में उन्हें यह सन्देश देते पाया है >>> की भारत देश में हिन्दुओं की संख्या बढाइये सरकार के परिवार नियोजन को तवज्जो न >>> दें? इसके बारे में आप क्या कहेंगे??? मैं तो इसे धर्मान्धता ही कहूँगा फिर >>> चाहे कोई भी धर्म गुरु ऐसा क्यों न कहे|
>>> रही भारतीय नागरिकता की बात, तो भाईजी, तो जो मुस्लिम खुद को भारतीय या >>> हिन्दुस्तानी कहलाना पसंद नहीं करते थे (या जैसी भी परिस्थिति रही हो) १९४७ में >>> ही भारत छोड़ चले गए थे| और जो देश छोड़ कर नहीं गए यहीं रह गए आप उन्हें >>> देशप्रेमी कहने के बजाय उन्हें एक विशेष रंग के चश्में से देख रहे हैं!!! यह >>> कहाँ तक तर्कसंगत है??? आप यह भूल जाते हैं की मुस्लिमों के आलावा कुछ गैर >>> मुस्लिम (हिन्दू, सिख एवं अन्य) १९४७ में भारत नहीं आये थे और जहां थे वहीँ बसे >>> रहे, उन्हें अपनी जन्मभूमि से प्रेम था चाहे अब वह अखंड भारत देश का हिस्सा न >>> रहा हो| उनका मैं सम्मान करता हूँ| और जो मुस्लिम यहाँ रह गए हैं उनका भी >>> सम्मान करता हूँ|
>>> कृपया हमारे राजनीतिज्ञों एवं तथाकथित कट्टरपंथीयों की तरह अखंड भारत देश को >>> जाती-धर्म के चश्में से मत देखें| कम से
जरुर कीजिये, जितने ज्यादा लोग सहभागी हो और भला.....
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२५ सितम्बर २००९ ३:२३ PM को, जयराम 'विप्लव'. janokti.com < jay.choudhar...@gmail.com> ने लिखा:
> दिनेश जी ........ मोहन जी को संबोधित करते हुए आपने सधे शब्दों में बातें रखी > हैं . इसे समुदायिक ब्लॉग "सच बोलना मना है > <http://www.janokti.blogspot.com>" पर पोस्ट कर रहा हूँ .
>> बेशक़!! जो भारतीय अपने आपको हिन्दुस्तानी कहलाना मंज़ूर नहिं करते उन्हें भारत >>> में रहना ही नही चाहिये। बताईये कौन सा मज़हब-धर्म वतन से नफरत सिखाता है? मैं >>> उसे धर्म- मज़हब नहिं क्हुंगी। हम सब भारतीय ही हैं। और रहेंगे। ईस देश को >>> तोडनेवाली ताक़्तों से नफरत है मुझे। मेरा हिन्दुस्तान "महान" है। >>> जहां मेरा जन्म हुआ वो भारत को मेरा सलाम है। >>> रज़िया मिर्ज़ा >>> 2009/9/25 Dinesh R Saroj <dineshrsa...@gmail.com>
>>> प्रिय मोहनजी,
>>>> आपकी वतनपरस्ती एवं उससे जुडी चिंता के लिये आपको सलाम!!!
>>>> आपकी चिंता एवं उसके उपलक्ष्य में आपने जो ताजमहल एवं सडकों पर भीड़ वाली >>>> बात कही है मैं भी उससे इत्तेफाक रखता हूँ| परन्तु १५ अगस्त एवं २६ जनवरी में >>>> इकठ्ठे भीड़ में से आप किसी हिन्दू, मुस्लिम या किसी ईसाई को पृथक कैसे कर >>>> पायेंगे? क्या ऐसा कोई चस्मा है? क्या कहीं भीड़ के आंकड़े निर्दिष्ट किये हुए >>>> है? या हम बस ऐसा मान लेते है और अपने मन में अवधारणा बना लेते है|
>>>> जब आप ताजमहल एवं सडकों पर भीड़ वाली बात करते हैं, तब शायद आप यह भूल जाते >>>> है या यूँ कहे की नजरअंदाज कर देते है की उससे कहीं कहीं ज्यादा भीड़ मुंबई एवं >>>> अन्य जगहों पर गणेश पंडालों में गणेश जी के दर्शन के लिए उमड़ती है तथा >>>> चतुर्दशी के दिन गणेश विसर्जन करने आये श्रध्हलुओं की होती है, जिसे संभालना >>>> प्रशासन के लोगों के लिए सिरदर्द बन जाता है| मुंबई के जन्माष्टमी को भी शायद >>>> आप भूल गए जिसमे इस बार swine flu के संक्रमण के भय के बावजूद भी भारी भीड़ उमड़ >>>> पड़ी थी| एसे और भी कई उधाहरण मैं प्रस्तुत कर सकता हूँ जैसे कुम्भ का मेला >>>> ईत्यादी| क्या आपने कभी क्रिकेट मैच में जुटे भीड़ को उनके जाती-धर्म के आधार पर >>>> आंकने की कोशिश की है?
>>>> आज भारत देश एक धर्म निरपेक्ष देश के रूप में अपनी संप्रभुता बना चुका >>>> है.... और भारतीय संविधान ने सभी धर्मों को उनकी संप्रभुता और स्वतंत्रता बनाये >>>> रखने का पुर-पूरा अधिकार दिया है| >>>> और इसपर न ही आप ना ही मैं और ना ही कोई और प्रश्न उठा सकता है|
>>>> और रही "इंडियन मुजाहिद्दीन" के ५ सालों में हिन्दुओं का नामों निशां >>>> मिटाने की तो उसके लिए आप निश्चिंत रहें.... ऐसी कोशिशे सदियों से होती आ रही >>>> हैं पर सदा ही नाकाम भी होती रही हैं!!! भारतीय संस्कृति इतनी उदार और परिपक्कव >>>> है की यह सभी को अपने में समाहित कर लेती है!!!
>>>> कोई भी जागरूक माता-पिता अपने बच्चों को पोलियो टिका से वांच्छित नहीं >>>> रखेंगे .... और यदि कोई रखता है तो मैं समझता हूँ वे नासमझ हैं, उन्हें जागरुक >>>> बनाने की जरुरत है| इसे धर्म-जाती के आधार से देखना मुझे तर्क सांगत लगता है| >>>> और यदि कोई धार्मिक गुरु पोलियो टिका न देने की सलाह या फतवा देता है तो मैं >>>> इसे धर्मान्धता और अज्ञानता ही कहूँगा|
>>>> परिवारनियोजन एक गंभीर मुद्दा है, जिस तरह जनसँख्या विस्फोट हो रहा है यह >>>> निकट भविष्य के लिए बहुत ही बड़ी समस्या बनता जा रहा है| पर मैं फिर कहना >>>> चाहूँगा इस विषय को भी एक रंग के चश्मे से न देखें| आपको केवल मुस्लिम परिवार >>>> ही नहीं अपितु हर धर्म के परिवार मिल जायेंगे जो बच्चों को ईश्वर का रूप कहते >>>> हैं और परिवार नियोजन के नाम से कन्नी काटते हैं| मैंने एक हिन्दू धर्मगुरु >>>> (किसी का नाम नहीं लेना चाहूँगा) के पुस्तक में उन्हें यह सन्देश देते पाया है >>>> की भारत देश में हिन्दुओं की संख्या बढाइये सरकार के परिवार नियोजन को तवज्जो न >>>> दें? इसके बारे में आप क्या कहेंगे??? मैं तो इसे धर्मान्धता ही कहूँगा फिर >>>> चाहे कोई भी धर्म गुरु ऐसा क्यों न कहे|
>>>> रही भारतीय नागरिकता की बात, तो भाईजी, तो जो मुस्लिम खुद को भारतीय या >>>> हिन्दुस्तानी कहलाना पसंद नहीं करते थे (या जैसी भी परिस्थिति रही हो) १९४७ में >>>> ही भारत छोड़ चले गए थे| और जो देश छोड़ कर नहीं गए यहीं रह गए आप उन्हें >>>> देशप्रेमी कहने के बजाय उन्हें एक विशेष रंग के चश्में से देख रहे हैं!!! यह >>>> कहाँ तक तर्कसंगत है??? आप यह भूल जाते हैं की मुस्लिमों के आलावा कुछ गैर >>>> मुस्लिम (हिन्दू, सिख एवं
Kisi kisi ki email me parichay, naam aadi hindi mein hota hai. email to aam taur par english mein hota hai. Hindi mein email pata kaise banta hai.
________________________________
From: Dinesh R Saroj <dineshrsa...@gmail.com>
To: hindibhasha@googlegroups.com
Sent: Tuesday, September 22, 2009 8:54:19 AM
Subject: [Hindi Bhasha] Re: "नवरात्र की ढेरों शुभकामनाएँ" एवं "ईद मुबारक हो!!!"
नमस्कार जीवनजी,
हिन्दी में लिखने के लिए आप http://www.google.com/transliterate/indic का उपयोग कर सकते हैं| टाइप हो जाने के बाद उसे compose box में कॉपी/पेस्ट कर दें| gmail में आपको यह सुविधा सीधे compose box में ही मिल जाता है|
------------------------------
With Best Regards,
Dinesh Saroj
Desktop Engineer
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आओ हिंदी में कम्प्युटर सीखें
http://learncomputersinhindi.blogspot.com/ ---------------------------------------------------------------
मेरी रचनाएँ
http://merirachanaein.blogspot.com/ ----------------------------------------------------------------
२१ सितम्बर २००९ ६:४४ PM को, Jeevan Mittal <mitta...@delhiwalah.com> ने लिखा:
Main aap jaisa matter hindi me kaise likh, bana aur bhej sakta hun. Please tell me so that I can write in Hindi. Thanks.
________________________________
From: Dinesh R Saroj <dineshrsa...@gmail.com>
>To: hindibhasha@googlegroups.com
>Sent: Monday, September 21, 2009 9:04:03 AM
>Subject: [Hindi Bhasha] "नवरात्र की ढेरों शुभकामनाएँ" एवं "ईद
> मुबारक हो!!!"
>हर दुआ कुबूल हो आपकी,
>हर तमन्ना साकार हो,
>महफिलों सी रहे रोशन जिंदगी,
>कभी न जीवन में वीरानी हो,
>हमारे तरफ से आप सभी को
>"नवरात्र की ढेरों शुभकामनाएँ"
>एवं
> "ईद मुबारक हो!!!"
>------------------------------
>With Best Regards,
>Dinesh Saroj
>Desktop Engineer
>---------------------------------------------------------------
>आओ हिंदी में कम्प्युटर सीखें
>http://learncomputersinhindi.blogspot.com/
ई-मेल ID अंग्रेजी में ही बन सकती है, अभी तक ई-मेल ID का हिंदी में बनना तकनीकी कारणों से नहीं हो पाया है... जिस पर शोध एवं कार्य जारी है..... हिंदी में किसी वेब साईट का नाम भी अभी नहीं नहीं हो सका है... चूँकि कम्प्युटर की आतंरिक कार्यप्रणाली पूरी तरह से रोमन लिपि पर ही निर्भर करती है और विश्वजाल का पता अथवा ई-मेल ID जिसे एक बार जारी किये जाते हैं वह किसी और को जारी नहीं हो सकते.... इसलिय रोमन एवं देवनागरी लिपि में परस्पर सामंजस्य स्थापित होना भी जरुरी है जो अभी तक नहीं हो पाया है, जिससे की रोमन लिपि में लिखा गया पता तथा देवनागरी लिपि में लिखा हुआ पता अलग-अलग न पहचाना जाये.... इस पर कार्य चल रहा है... उम्मीद की जा रही है की निकट भविष्य में यह संभव भी हो जाये....
पर हाँ आप अपनी व्यक्तिगत जानकारी जैसे नाम हिंदी में रख सकते हैं... ------------------------------ With Best Regards, Dinesh Saroj Desktop Engineer -------------------------------------------------------------- आओ हिंदी में कम्प्युटर सीखें http://learncomputersinhindi.blogspot.com/ --------------------------------------------------------------- मेरी रचनाएँ http://merirachanaein.blogspot.com/ ---------------------------------------------------------------- दिनेश का ब्लाग http://dineshsaroj.blogspot.com/ ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
२९ सितम्बर २००९ २:५६ PM को, Jeevan Mittal <mitta...@delhiwalah.com> ने लिखा:
> Kisi kisi ki email me parichay, naam aadi hindi mein hota hai. email to aam > taur par english mein hota hai. Hindi mein email pata kaise banta hai.
> ------------------------------ > *From:* Dinesh R Saroj <dineshrsa...@gmail.com> > *To:* hindibhasha@googlegroups.com > *Sent:* Tuesday, September 22, 2009 8:54:19 AM > *Subject:* [Hindi Bhasha] Re: "नवरात्र की ढेरों शुभकामनाएँ" एवं "ईद मुबारक > हो!!!"
> नमस्कार जीवनजी,
> हिन्दी में लिखने के लिए आप http://www.google.com/transliterate/indic का > उपयोग कर सकते हैं| टाइप हो जाने के बाद उसे compose box में कॉपी/पेस्ट कर > दें| gmail में आपको यह सुविधा सीधे compose box में ही मिल जाता है|
> ------------------------------ > With Best Regards, > Dinesh Saroj > Desktop Engineer > --------------------------------------------------------------- > आओ हिंदी में कम्प्युटर सीखें > http://learncomputersinhindi.blogspot.com/ > --------------------------------------------------------------- > मेरी रचनाएँ > http://merirachanaein.blogspot.com/ > ----------------------------------------------------------------
> २१ सितम्बर २००९ ६:४४ PM को, Jeevan Mittal <mitta...@delhiwalah.com> ने > लिखा:
>> Main aap jaisa matter hindi me kaise likh, bana aur bhej sakta hun. Please >> tell me so that I can write in Hindi. Thanks.
>> ------------------------------ >> *From:* Dinesh R Saroj <dineshrsa...@gmail.com> >> *To:* hindibhasha@googlegroups.com >> *Sent:* Monday, September 21, 2009 9:04:03 AM >> *Subject:* [Hindi Bhasha] "नवरात्र की ढेरों शुभकामनाएँ" एवं "ईद मुबारक >> हो!!!"
>> *हर दुआ कुबूल हो आपकी,* >> * हर तमन्ना साकार हो,* >> * महफिलों सी **रहे **रोशन जिंदगी,* >> * कभी न जीवन में वीरानी हो,* >> * हमारे तरफ से आप सभी को* >> ** >> *"नवरात्र की ढेरों शुभकामनाएँ" >> **एवं * >> ** >> * ** **"ईद मुबारक हो!!!"*
>> ------------------------------ >> With Best Regards, >> Dinesh Saroj >> Desktop Engineer >> --------------------------------------------------------------- >> आओ हिंदी में कम्प्युटर सीखें >> http://learncomputersinhindi.blogspot.com/ >> --------------------------------------------------------------- >> मेरी रचनाएँ >> http://merirachanaein.blogspot.com/ >> ----------------------------------------------------------------
> ई-मेल ID अंग्रेजी में ही बन सकती है, अभी तक ई-मेल ID का हिंदी में बनना > तकनीकी कारणों से नहीं हो पाया है... जिस पर शोध एवं कार्य जारी है..... हिंदी > में किसी वेब साईट का नाम भी अभी नहीं नहीं हो सका है... चूँकि कम्प्युटर की > आतंरिक कार्यप्रणाली पूरी तरह से रोमन लिपि पर ही निर्भर करती है और विश्वजाल > का पता अथवा ई-मेल ID जिसे एक बार जारी किये जाते हैं वह किसी और को जारी नहीं > हो सकते.... इसलिय रोमन एवं देवनागरी लिपि में परस्पर सामंजस्य स्थापित होना भी > जरुरी है जो अभी तक नहीं हो पाया है, जिससे की रोमन लिपि में लिखा गया पता तथा > देवनागरी लिपि में लिखा हुआ पता अलग-अलग न पहचाना जाये.... इस पर कार्य चल रहा > है... उम्मीद की जा रही है की निकट भविष्य में यह संभव भी हो जाये....
> पर हाँ आप अपनी व्यक्तिगत जानकारी जैसे नाम हिंदी में रख सकते हैं... > ------------------------------ > With Best Regards, > Dinesh Saroj > Desktop Engineer > -------------------------------------------------------------- > आओ हिंदी में कम्प्युटर सीखें > http://learncomputersinhindi.blogspot.com/ > --------------------------------------------------------------- > मेरी रचनाएँ > http://merirachanaein.blogspot.com/ > ---------------------------------------------------------------- > दिनेश का ब्लाग > http://dineshsaroj.blogspot.com/ > ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
> २९ सितम्बर २००९ २:५६ PM को, Jeevan Mittal <mitta...@delhiwalah.com> ने लिखा:
> > Kisi kisi ki email me parichay, naam aadi hindi mein hota hai. email to > aam taur par english mein hota hai. Hindi mein email pata kaise banta hai.
> > ________________________________ > From: Dinesh R Saroj <dineshrsa...@gmail.com> > > To: hindibhasha@googlegroups.com > > Sent: Tuesday, September 22, 2009 8:54:19 AM > > Subject: [Hindi Bhasha] Re: "नवरात्र की ढेरों शुभकामनाएँ" एवं "ईद मुबारक > हो!!!"
> > नमस्कार जीवनजी,
> > हिन्दी में लिखने के लिए आप > http://www.google.com/transliterate/indic का उपयोग कर सकते > हैं| टाइप हो जाने के बाद उसे compose box में कॉपी/पेस्ट कर दें| gmail में > आपको यह सुविधा सीधे compose box में ही मिल जाता है|
> > ------------------------------ > > With Best Regards, > > Dinesh Saroj > > Desktop Engineer
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From: Dinesh R Saroj <dineshrsa...@gmail.com>
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Sent: Tuesday, September 29, 2009 6:20:18 PM
Subject: [Hindi Bhasha] Re: "नवरात्र की ढेरों शुभकामनाएँ" एवं "ईद मुबारक हो!!!"
जीवन जी,
ई-मेल ID अंग्रेजी में ही बन सकती है, अभी तक ई-मेल ID का हिंदी में बनना तकनीकी कारणों से नहीं हो पाया है... जिस पर शोध एवं कार्य जारी है..... हिंदी में किसी वेब साईट का नाम भी अभी नहीं नहीं हो सका है... चूँकि कम्प्युटर की आतंरिक कार्यप्रणाली पूरी तरह से रोमन लिपि पर ही निर्भर करती है और विश्वजाल का पता अथवा ई-मेल ID जिसे एक बार जारी किये जाते हैं वह किसी और को जारी नहीं हो सकते.... इसलिय रोमन
एवं देवनागरी लिपि में परस्पर सामंजस्य स्थापित होना भी जरुरी है जो अभी तक नहीं हो पाया है, जिससे की रोमन लिपि में लिखा गया पता तथा देवनागरी लिपि में लिखा हुआ पता अलग-अलग न पहचाना जाये.... इस पर कार्य चल रहा है... उम्मीद की जा रही है की निकट भविष्य में यह संभव भी हो जाये....
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Kisi kisi ki email me parichay, naam aadi hindi mein hota hai. email to aam taur par english mein hota hai. Hindi mein email pata kaise banta hai.
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From: Dinesh R Saroj <dineshrsa...@gmail.com>
>To: hindibhasha@googlegroups.com
>Sent: Tuesday, September 22, 2009 8:54:19 AM
>Subject: [Hindi Bhasha] Re: "नवरात्र की ढेरों शुभकामनाएँ"
> एवं "ईद मुबारक हो!!!"
>>नमस्कार जीवनजी,
>हिन्दी में लिखने के लिए आप http://www.google.com/transliterate/indic का उपयोग कर सकते हैं| टाइप हो जाने के बाद उसे compose box में कॉपी/पेस्ट कर दें| gmail में आपको यह सुविधा सीधे compose box में ही मिल जाता है|
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>>Sent: Monday, September 21, 2009 9:04:03 AM
>>Subject: [Hindi Bhasha] "नवरात्र की ढेरों शुभकामनाएँ" एवं "ईद
>> मुबारक हो!!!"
>>हर दुआ कुबूल हो आपकी,
>>हर तमन्ना साकार हो,
>>महफिलों सी रहे रोशन जिंदगी,
>>कभी न जीवन में वीरानी हो,
>>हमारे तरफ से आप सभी को
>>"नवरात्र की ढेरों शुभकामनाएँ"
>>एवं
>> "ईद मुबारक हो!!!"
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>>Dinesh Saroj
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