इंटरनेट पर सर्वभाषा अनुप्रयोग की दिशा में ऐतिहासिक निर्णय / Historical decision in direction of All Language Application on Internet

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LOCHAN MAKHIJA

unread,
Oct 28, 2009, 8:29:42 AM10/28/09
to allgr...@sidbi.in, allhindi...@sidbi.in, allis...@sidbi.in

नमस्‍कार,

आखिरखार, इंटरनेट पर सर्वभाषा उपयोग की दिशा में एक ऐतिहासिक और बहुप्रतीक्षिक निर्णय लिया जा चुका है...
अभी तक यदि आपकी वैबसाइट भले ही हिन्‍दी या अन्‍य किसी भाषा में हो, उसका नाम / वैबसाइट डोमेन / वैबसाइट पता/एड्रेस हमें रोमन में ही रजिस्‍टर कराना पड़ता था...
परन्‍तु अब इस मजबूरी से भी छुटकारा मिल गया है...
अब यदि आपकी वैबसाइट हिन्‍दी में या अन्‍य किसी भी भाषा में हो, आप अपना वैबसाइट नाम / वैबसाइट पता भी हिन्‍दी/देवनागरी या अपनी किसी भी लिपि में उसका रजिस्‍ट्रेशन करवा सकते हैं...
ईमेल पतों का सर्वभाषीकरण तो पहले ही हो गया था..
अब वैबसाइट नाम / डोमेन नाम आदि का भी सर्वभाषीकरण हो गया है.... 
डोमेन नाम .in का स्‍थान अब .भारत लेने वाला है..
अब हम अपनी संस्‍थाओं / कार्यालयों / बैंकों का वैबसाइट पता देवनागरी में निर्धारित कर सकते हैं, जैसे - सिडबी.भारत,  एसबीआई.भारत आदि ...
ज्ञात हो कि इंटरनेट पर अंग्रेजी/रोमन/लैटिन के प्रभुत्‍व को समाप्‍त करने के लिए काफी लंबी बहसें, लंबे संघर्ष ही नहीं, गहन तकनीकी व्‍यवस्‍थाएं भी करनी पड़ी हैं...
यह मांग / पस्‍ताव औपचारिक रूप से लगभग वर्ष 2008 से लम्बित था... अनौपचारिक रूप से तो काफी पहले से मांग थी...
अब सही अर्थों में इंटरनेट का लोकतंत्रीयकरण, स्‍थानीयकरण एवं मानवीयकरण संभव हो सकेगा... 
इस बारे में कुछ विस्‍तृत खबरें भी इस संदेश के साथ अवलोकनार्थ संलग्‍न हैं..
सादर.
 
- लोचन मखीजा, प्रबन्‍धक (हिन्‍दी)
  सिडबी, गुवाहाटी ( मोबाइल नं. 09957181130)
  सर्वे भवन्‍तु सुखिन: सर्वे सन्‍तु निरामया:          
  (मैं अभी 07.11.2009 तक ग्‍वालियर, म.प्र. में हूँ)
Soon, internet domain names in Hindi, Marathi - dnaindia_com.mht
Countries Not Using Roman Alphabet Offered Domain Names In Own Language, Script AHN.mht
एतिहासिक परिवर्तन Historical Change.doc.doc

LOCHAN MAKHIJA

unread,
Oct 28, 2009, 3:02:52 PM10/28/09
to Yogendra Joshi
नमस्‍कार योगेन्‍द्र जी,
  • आपने बिल्‍कुल सही कहा है कि भाषाई गौरव के क्षेत्र में चीन हमसे कहीं अधिक आगे है।
  • चीन ने अपने भाषाई गौरव के लिए केवल बातें ही नहीं, अपितु ठोस कार्रवाई भी की है।
  • डोमेन नाम की ही बात लें, तो चीन ने अपने स्‍तर पर अपने देश के लोगों के लिए चीनी में ही यह व्‍यवस्‍था किसी तरह करवा ली थी, चीनी जनता को रोमन में टाइप नहीं करना पड़ता था। पर अब चीन एवं उनके समकक्ष भाषाई गौरव रखने वाले अन्‍य राष्‍ट्रों जैसे - जापान आदि की मुहिम रंग लाई है।  
  • इस मुहिम को भारत एवं अन्‍य देशों का भी समर्थन रहा है, इसमें कोई दो राय नहीं है,
  • परन्‍तु मात्र समर्थन होना और एक जिजीविषा से मुहिम चलाना, इसमें काफी अंतर होता है।
  • जहां तक अपने देश में इस बदलाव का फायदा उठाने की बात है, मेरे विचार से हमें ज्‍़यादा निराश होने की जरूरत नहीं है। भारत में अब इंटरनेट वास्‍तव में आम जनता के हाथों में आने की प्रक्रिया से ही गुजर रहा है।
  • अगले लगभग 5 - 7 वर्षों के बाद, जब भारत सरकार एवं विभिन्‍न राज्‍य सरकारों द्वारा प्रारम्‍भ की जाने वाली ई-प्रशासन सम्‍बन्‍धी महत्‍वाकांक्षी परियोजनाओं का संचालन एवं उपयोग, अगले लगभग 5 - 7 वर्षों के बाद, जब आम जनता करेगी, तब इन सब छोटी-छोटी बातों का बड़ा महत्‍व सबके सामने आएगा।
  • अभी तक हुआ यह है कि कंप्‍यूटर/इंटरनेट आदि नगरों तक और नगरों में भी अंग्रेजीदां लोगों तक ही सीमित रहे हैं, इन संचार साधनों का जब ग्रावों-कस्‍बों में विस्‍तार व प्रचार-प्रसार होगा, उपयोग होगा तो इनका भारतीयकरण (दूसरे शब्‍दों में स्‍वभाषीकरण, सर्वभाषीकरण, स्‍थानीयकरण)  स्‍वमेव ही होता चला जाएगा।
  • इंटरनेट तो अभी भारत में बाल्‍यावस्‍था में है, और जब तक यह अंग्रेजी की गिरफ्त में रहेगा, तब तक बाल्‍यावस्‍था में ही बना रहेगा।
  • इंटरनेट को भारत में बड़ा होने, पल्‍लवित और पुष्पित होने के लिए यहां की मिट्टी और यहां के खाद-पानी की ज़रूरत तो होगी ही... इसके बिना इंटरनेट का यथार्थ एवं व्‍यापक उपयोग यहां हो ही नहीं पाएगा।
  • इस बात को यहां की सरकारें तो समझती ही हैं, तथाकथित बाज़ारी शक्तियां / मार्केट फोर्स भी इस तथ्‍य से भली-भांति परिचित हैं।
  • अत: हमें कोई निराश होने की जरूरत नहीं है, बस अपनी शक्ति से अपने काम में लगे रहना है। कोई रुचि ले या न ले, किसी का लगाव हो या न हो, किसी को फर्क पड़े या न पड़े, हमारी रुचि, हमारे लगाव और हमारी प्रतिबद्धता में कोई कमी नहीं आनी चाहिए। मेरे विचार से आज इसी बात की सबसे ज्‍़यादा आवश्‍यकता है।
  • आपने इस विषय में चीन की मुहिम के बारे में जो महत्‍वपूर्ण वैब-कडि़यां भेजी हैं, वे हमारे अन्‍य भाषा प्रेमीजनों के लिए भी उपयोगी एवं पढ़ने योग्‍य हैं, इसलिए आपके संदेश को मैं विस्‍तृत समूह में विचारार्थ अग्रेषित कर रहा हूँ। 
सादर,

- लोचन मखीजा, प्रबन्‍धक (हिन्‍दी)
  सिडबी, गुवाहाटी ( मोबाइल नं.  09957181130  09957181130 )
  सर्वे भवन्‍तु सुखिन: सर्वे सन्‍तु निरामया:          

२८ अक्तूबर २००९ १०:११ PM को, Yogendra Joshi <yogendr...@gmail.com> ने लिखा:
जानकारी के लिए धन्यवाद मखीजाजी |
मैंने काफ़ी समय पहले एक लेख पढ़ा था कि रोमन से भिन्न अन्य लिपियों के प्रयोग की मुहिम चीन ने छेड़ीं है | देखें http://www.icann.org/en/announcements/idn-tld-cdnc.pdf | वस्तुतः चीन ने स्वतन्त्र रूप से आगे बढ़ना आरंभ कर दिया था | अकेले रोमन के पक्षधरों के लिए यह चिंता और असमंजस की बात थी | तब अंतरराष्ट्रीय संस्था Internet Corporation for Assigned Names and Numbers (ICANN - http://www.icann.org/en/general/background.htm) समस्या के समाधान में जुट गयी |  
एक बात गौर करने योग्य है | चीन भाषाई गौरव में हमसे कहीं आगे है | वह देश पूरी ताकत और लगन से अपनी भाषा को न केवल प्रयोग में ले रहा है अपितु उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुदृण रूप से स्थापित कर रहा है |  चीनी भाषा आज अमेरिका में सबसे अधिक सीखी जाने वाली विदेशी भाषा है |
अपने देश की बात ही विचित्र है | यहां तो लोगों को हिंदी बोलने और देवनागरी लिखने से ही परहेज है | डोमेन नेम देवनागरी में लिखना संभव हो गया तो क्या हुआ ? लगाव किसे है | डोमेन नेम में `भारत' जुड़ भी जाये तो क्या, शेष कार्य तो अंग्रेजी में ही होने हैं |
- योगेन्द्र जोशी

२८ अक्तूबर २००९ ५:५९ PM को, LOCHAN MAKHIJA <lochan....@gmail.com> ने लिखा:

नमस्‍कार,

आखिरकार, इंटरनेट पर सर्वभाषा उपयोग की दिशा में एक ऐतिहासिक और बहुप्रतीक्षित निर्णय लिया जा चुका है...
अभी तक यदि आपकी वैबसाइट भले ही हिन्‍दी या अन्‍य किसी भाषा में हो, उसका नाम / वैबसाइट डोमेन / वैबसाइट पता/एड्रेस हमें रोमन में ही रजिस्‍टर कराना पड़ता था...
परन्‍तु अब इस मजबूरी से भी छुटकारा मिल गया है...
अब यदि आपकी वैबसाइट हिन्‍दी में या अन्‍य किसी भी भाषा में हो, आप अपना वैबसाइट नाम / वैबसाइट पता भी हिन्‍दी/देवनागरी या अपनी किसी भी लिपि में उसका रजिस्‍ट्रेशन करवा सकते हैं...
ईमेल पतों का सर्वभाषीकरण तो पहले ही हो गया था..
अब वैबसाइट नाम / डोमेन नाम आदि का भी सर्वभाषीकरण हो गया है.... 
डोमेन नाम .in का स्‍थान अब .भारत लेने वाला है..
अब हम अपनी संस्‍थाओं / कार्यालयों / बैंकों का वैबसाइट पता देवनागरी में निर्धारित कर सकते हैं, जैसे - सिडबी.भारत,  एसबीआई.भारत आदि ...
ज्ञात हो कि इंटरनेट पर अंग्रेजी/रोमन/लैटिन के प्रभुत्‍व को समाप्‍त करने के लिए काफी लंबी बहसें, लंबे संघर्ष ही नहीं, गहन तकनीकी व्‍यवस्‍थाएं भी करनी पड़ी हैं...
यह मांग / प्रस्‍ताव औपचारिक रूप से लगभग वर्ष 2008 से लम्बित था... अनौपचारिक रूप से तो काफी पहले से मांग थी...
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