इस समूह में आप
हिंदी और अनुवाद के सभी पहलुओं पर विचार-विमर्श कर सकते है।
हिंदी की प्रगति के लिए हमें मिल-जुलकर प्रयत्न करना होगा। मानक हिंदी, व्याकरण आदि से संबंधित ऐसे अनेक प्रश्न हैं जिनपर विचार-विमर्श करना आवश्यक है। भाषा गतिशील होती है। व्याकरण भी समय के साथ बदलता है। हम हिंदी के आधुनिक और व्याकरणसम्मत रूप की जानकारी प्राप्त करने के लिए केवल व्याकरण की पुस्तकों पर निर्भर नहीं हो सकते हैं। आज इंटरनेट के माध्यम से अपने विचारों को दूसरों तक पहुँचाना बहुत आसान हो गया है। मैं आशा करता हूँ कि इस समूह के सदस्य भाषा के संदर्भ में यथास्थितिवाद का विरोध करते हुए संवाद और विचार-विमर्श की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे।