आस्ट्रेलिया में भारतीयों पर हमले में लेबनानियों का हाथ ?

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narayan prasad

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Oct 7, 2009, 8:24:44 PM10/7/09
to hindi...@yahoogroups.com, hi...@googlegroups.com

Yogendra Joshi

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Oct 8, 2009, 1:50:31 PM10/8/09
to hi...@googlegroups.com
नारायण प्रसादजी, खबर के सदर्भ में दो बातें कहनी है | प्रथम यह कि भारतीयों
पर हमले में लेबनानियों का हाथ होना यह किसी अमुक वक्ता का मत है या आधिकारिक
खुलासा है ? और द्वितीय यह कि जब `भारत संस्कारों का देश' कहा जाता है तो
उसका मतलब क्या है? यहां लोगों के आचरण में सब कुछ प्रसंशनीय है क्या? समाचार
के अनुसार जहां-तहां थूक देना हम भरतीयों की गंदी आदत है? इसे किस प्रकार का
संस्कार कहा जायेगा? हमारे यहां कानूनों का सम्मान न करना आम बात है, कमजोरों
का शोषण करना समर्थ जनों का विशेषाधिकर है, ऊंचनीच की भावना हममें कूटकूट कर
भरी हैं | देश में व्याप्त अनियंत्रित भ्रष्टाचार संस्कारशील समाज में नहीं
हो सकता ! ऐसे अनेकों उदाहरण खोजे जा सकते हैं | मैं अपने देश को संस्कारों
का देश कहने में हिचकता हूं | बुजुर्गों का पांव छूना पर्याप्त नहीं है, उससे
आगे भी बहूत कुछ होना चाहिए, जो हममें नहीं है | इन बातों पर विचार करिएगा |
- योगेन्द्र जोशी

Thu, 08 Oct 2009 05:54:44 +0530 को narayan prasad
<prasad...@yahoo.co.in> ने लिखा:

> http://in.jagran.yahoo.com/news/local/bihar/4_4_5847104.html
>
>
>
>
> >


--
ओपेरा के क्रांतिकारी ईमेल ग्राहक का उपयोग करते हुए:
http://www.opera.com/mail/

Vinay

unread,
Oct 8, 2009, 2:16:09 PM10/8/09
to हिंदी (Hindi)
यह चर्चा इस समूह के विषय से अलग है इसलिए इसे बंद किया जा रहा है. कृपया
आगे ध्यान रखें. इस समूह पर केवल भाषा (हिंदी) संबंधी विषय ही स्वीकार्य
हैं.
--

On Oct 8, 1:50 pm, "Yogendra Joshi" <yogendrapjo...@gmail.com> wrote:
> नारायण प्रसादजी, खबर के सदर्भ में दो बातें कहनी है | प्रथम यह कि भारतीयों  
> पर हमले में लेबनानियों का हाथ होना यह किसी अमुक वक्ता का मत है या आधिकारिक  
> खुलासा है ? और द्वितीय यह कि जब `भारत संस्कारों का देश' कहा जाता है तो  
> उसका मतलब क्या है? यहां लोगों के आचरण में सब कुछ प्रसंशनीय है क्या? समाचार  
> के अनुसार जहां-तहां थूक देना हम भरतीयों की गंदी आदत है? इसे किस प्रकार का  
> संस्कार कहा जायेगा? हमारे यहां कानूनों का सम्मान न करना आम बात है, कमजोरों  
> का शोषण करना समर्थ जनों का विशेषाधिकर है, ऊंचनीच की भावना हममें कूटकूट कर  
> भरी हैं | देश में व्याप्त अनियंत्रित भ्रष्टाचार संस्कारशील समाज में नहीं  
> हो सकता ! ऐसे अनेकों उदाहरण खोजे जा सकते हैं | मैं अपने देश को संस्कारों  
> का देश कहने में हिचकता हूं | बुजुर्गों का पांव छूना पर्याप्त नहीं है, उससे  
> आगे भी बहूत कुछ होना चाहिए, जो हममें नहीं है | इन बातों पर विचार करिएगा |  
> - योगेन्द्र जोशी
>
> Thu, 08 Oct 2009 05:54:44 +0530 को narayan prasad  

> <prasad_cw...@yahoo.co.in> ने लिखा:

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