सब्यसाचीजी,
प्रवंचन और प्रवंचना समानार्थी हैं और दोनों के अर्थ वही हैं जो वंचन और
वंचना के हैं । अर्थ हैं ठगी, छलावा, धोखा तथा ऐसा करने का भाव । वंचन/वंचना
के मामले में उपसर्ग ‘प्र’ के योग से कोई खास अंतर नहीं पड़ता है ।
आत्मप्रवंचना (self-deception) खुद को गलतफ़हमी में रखना आदि है ।
- योगेन्द्र जोशी
Fri, 28 Aug 2009 00:52:25 +0530 को Sabyasachi Mishra
<supersa...@gmail.com> ने लिखा:
> महोदय,
> प्रवंचन और प्रवंचना का क्या मतलब होता है, बताएँगे, क्योंकि मैं इनदोनों
> शब्दों का अर्थ नहीं जानता |
> भवदीय,
> साची
--
ओपेरा के क्रांतिकारी ईमेल ग्राहक का उपयोग करते हुए:
http://www.opera.com/mail/