नारायण प्रसादजी, खबर के सदर्भ में दो बातें कहनी है | प्रथम यह कि भारतीयों
पर हमले में लेबनानियों का हाथ होना यह किसी अमुक वक्ता का मत है या आधिकारिक
खुलासा है ? और द्वितीय यह कि जब `भारत संस्कारों का देश' कहा जाता है तो
उसका मतलब क्या है? यहां लोगों के आचरण में सब कुछ प्रसंशनीय है क्या? समाचार
के अनुसार जहां-तहां थूक देना हम भरतीयों की गंदी आदत है? इसे किस प्रकार का
संस्कार कहा जायेगा? हमारे यहां कानूनों का सम्मान न करना आम बात है, कमजोरों
का शोषण करना समर्थ जनों का विशेषाधिकर है, ऊंचनीच की भावना हममें कूटकूट कर
भरी हैं | देश में व्याप्त अनियंत्रित भ्रष्टाचार संस्कारशील समाज में नहीं
हो सकता ! ऐसे अनेकों उदाहरण खोजे जा सकते हैं | मैं अपने देश को संस्कारों
का देश कहने में हिचकता हूं | बुजुर्गों का पांव छूना पर्याप्त नहीं है, उससे
आगे भी बहूत कुछ होना चाहिए, जो हममें नहीं है | इन बातों पर विचार करिएगा |
- योगेन्द्र जोशी
Thu, 08 Oct 2009 05:54:44 +0530 को narayan prasad
<prasad_cw...@yahoo.co.in> ने लिखा:
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