लेकिन लैटिन की सूची में उस
किसी भी भाषा का ज़िक्र नहीं
है जिनकी तरफ़दारी आप लैटिन
में लिखने की कर रहे हैं। और
फिर आप उन कैलीग्राफ़र्स
(लिपिमुद्रकों ?) के बारे में
भी तो सोचिए! उर्दू की जो
ख़ूबसूरती फ़ारसी लिपि में
है वह और कहां ? अम्रत्य सेन
का संबंध भी उसी पीढ़ी से है
जब कंप्यूटर द्वारा लैटिन
के अलावा अन्य लिपियों में
लिखना कठिन था।
मैं आपके रोमन द्वारा अधिक
लोगों तक पहुंच पाने वाले
तर्क से तो सहमत हूं। लेकिन
यदि यह सबसे आवश्यक होता तो
मेरे विचार से सबसे पहले
यूनानी लोग लैटिन में लिखने
की सोचते।
शुरुआत से ही (http://shail.free.fr/hi/hindavi.html)
हिन्दुस्तानी किसी एक लिपि
की मोहताज नहीं थी और
देवनागरी न जानने वाले उसे
रोमन में लिखें या ऐसे लोगों
से विचारों का आदान-प्रदान
करने के लिए हम भी रोमन का
प्रयोग कर सकते हैं। लेकिन
हम सब (इस फ़ोरम पर) जो
देवनागरी लिखने और पढ़ने
में सक्षम हैं यहां किसी
अन्य लिपिकी मदद क्यों लें?
शैलेन्द्र
page = पगे or पेज (how do you tell a reader which word is
to be pronounced with which logic?)
> http://www.omniglot.com/writing/languages.htm#latin
> Dilchasp baatein maalum padengi.
maalum = मालूम or मालुम
padengi = पदेंगि or पडेंगी or
पड़ेंगी
> Jaisé : Arabi lipi mein likhi jané vali bhashaon mein na keval farsi, pashto, kashmiri, urdu, sindhi, panjabi adi zabanein hain, magar sanskrit bhi.
संस्कृत भी? आप क्या कहना
चाहते हैं? आप संस्कृत के
लिए किस लिपि की तरफ़दारी
करना चाहते हैं? कहने को तो
किसी भी भाषा को किसी भी
लिपि में लिखा जा सकता है,
जिसे दूसरी लिपि पढ़ने में
दिक्कत हो वह दूसरी भाषा को
अपनी लिपि में लिख सकता है।
पर जो पढ़ा लिखा हो, या जिस
में पढ़ने लिखने की क्षमता
हो, वह ऐसा क्यों करे। लोग
अंग्रेज़ी को भी देवनागरी
में लिखते हैं। दो दशक पहले
तक कश्मीरी पंडित केवल
उर्दू वाला पंचांग प्रयोग
करते थे, जिस में सारे
संस्कृत श्लोक नस्तालीक
में लिखे होते थे। इसी
प्रकार मैंने बंगालियों के
पास बांगला लिपि में और
गुजरातियों के पास गुजराती
लिपि की संस्कृत पुस्तकें
देखी हैं। यह सब व्यक्तिगत
या स्थानीय सुलभता की बात
है। संस्कृत की लिपि तो
देवनागरी ही रहेगी न? अपनी
या एक गुट विशेष की आसानी के
लिए कोई कैसे भी लिखे।
> Aap jaanté hongé ki sanskrit ka sahitya sabsé pehlé Bharat se baahar kaisé pahuncha ?
आप की रूही में धड़ल्ले से
diacritical marks का प्रयोग किया गया
है, और फिर भी न कोई consistency है, न
clariy। इस के इलावा ये diacritical marks
शायद आप के फ्रेंच कीबोर्ड
में आसानी से उपलब्ध हों, पर
मेरे कीबोर्ड में सरलता से
उपलब्ध नहीं है। यदि मुझे
कीबोर्ड बदलना ही है, या
विभिन्न keys को मिला कर एक
अक्षर बनाना है, तो मैं
क्यों न देवनागरी में ही
लिखूँ, जो मुझे अब बहुत ही
सरल लगता है। कोशिश करने भर
की बात है।
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देवनागरी के लाभ के बारे में
एक छोटा सा क़िस्सा -- कई साल
पहले मैं भारत से एक जर्मनी
की कंपनी के दौरे पर गया।
वहाँ एक व्यक्ति से मिला
जिस का नाम Junge था। वह अपना
नाम बताते ही कहने लगा कि
सभी विदेशी लोग (विशेषकर
अंग्रेज़ी भाषी) उस के नाम को
तोड़ मरोड़ कर बोलते हैं -
कोई जंग बोलता है, कोई जंज,
कोई जूंग तो कोई जूंज। j, u, g और
e के विभिन्न स्वरों को
विभिन्न तरीकों से मिला कर
कम से कम एक दर्जन तरीकों से
यह नाम बोला जा सकता है।
मैंने अपने दफ्तर जो
रिपोर्ट भेजी, उस में उस के
नाम के साथ ब्रैकेट में
देवनागरी में "युंगे" लिख
दिया। कितना आसान? क्या किसी
और लिपि में सही उच्चारण के
इतना करीब आना संभव था?
भवदीय,
- रमण