<<यह पत्र मसिजीवी ने चिट्ठाचर्चा के चर्चाकार सदस्यों को प्रेषित किया था. मगर पाठकों
का भी उतना ही हक बनता है कि वे भी चिट्ठाचर्चा के अपने अनुभवों को साझा करें. इसीलिए
समूह पर अग्रेषित.>>
दोस्तो,
साझा चर्चाब्लॉग चिट्ठाचर्चा <http://chitthacharcha.blogspot.com/> जल्द ही
अपनी 1000वीं चर्चा प्रस्तुत करने जा रहा है... यूँ तो एक हजार भी एक अन्य संख्या ही
है किंतु यह एक अवसर भी है जरा मुड़कर पीछे देखने का, कैसे अंग्रेजी के चंद ब्लॉगरों ने
भारतीय बलॉग मेला प्रकरण में हिन्दी को क्षेत्रीय भाषा करार देकर उसे बहिष्कृत व
अपमानित करने की चेष्टा की तथा परिणामस्वरूप हिन्दी को ब्लॉग पोस्टों की चर्चा के
लिए आत्मनिर्भर होने की जरूरत महसूस हुई।
/भारतीय ब्लागमेला
<http://www.madmanweb.com/mt/mt-addcomments.cgi?entry_id=218&CommentsN...>//
//के सौजन्य से पता चला कि हिदी एक क्षेत्रीय भाषा है.यह भी सलाह मिली कि हिंदी
वालों को अपनी चर्चा के लिये अलग मंच तलाशना चाहिये.इस जानकारी से हमारे//मित्र
<http://akshargram.com/2005/01/05/132>// //कुछ खिन्न हुये.यह भी सोचा गया कि
हम सभी// //भारतीय भाषाओं <http://akshargram.com/2005/01/07/133>//से जुड़ने का
प्रयास करें.///
कुल जमा तीसेक ब्लॉग थे हिन्दी में जब चिट्ठाचर्चा शुरू हुई तब से अब तक चिट्ठाचर्चा ने
यात्रा तय की है, क्यों न चर्चा के सहस्त्रपोस्टमयी होने के अवसर का इस्तेमाल इस मंच
को लेकर अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए किया जाए। यदि लगभग पॉंच साल की
अपनी यात्रा में चिट्ठाचर्चा के इस मंच ने कभी आपके मन को झंकृत किया है, चर्चाकारों की
घंटों की मेहनत, सामुदायिकता, दृष्टिकोण या कोई भी पक्ष जिस पर आप राय देना चाहें या
इस मंच से शिकायत, अपेक्षाओं या भविष्य में इसे कैसा होना चाहिए...कुछ बताना चाहें तो
कृपया उठाएं कीबोर्ड (उठाना कहॉं जुड़ा तो है कम्पू देवता से :)) और खुद अपने ब्लॉग पर
एक पोस्ट चिट्ठाचर्चा की 'सहस्त्रापदी' पर। आइए इस अवसर को एक ब्लॉगराना उत्सव
बनाएं। अपनी पोस्ट का लिंक कृपया हमें अवश्य भेजें ताकि इस पर राय देने का अवसर हमें
मिल सके।
चर्चाकार