श्रेष्ठ भारत !
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Posted: 06 Oct 2010 06:17 AM PDT लेखक: यशपाल सोलंकी समय: दोपहर : २:३० दिनांक: ७ ओक्टोबर १० ![]() पत्रकारिता क्या है ? -- आधुनिक सभ्यता का एक प्रमुख व्यवसाय है जिसमें समाचारों का एकत्रीकरण, लिखना, रिपोर्ट करना, सम्पादित करना और सम्यक प्रस्तुतीकरण आदि सम्मिलित हैं। ये जो देश है जो आज पूरा "इंडिया" होता जा रहा है यहाँ पर पत्रकारिता मे बाजारू प्रतिस्पर्धा हो रही है, बड़े बड़े समाचार समुह ने जनता हित को ताक पर रखकर अपने हितों को सर्वोपरि माना है, हर समाचार पत्र और चेनल अपने नंबर और स्थति, अस्तित्व को लेकर चिंतित है और आए दिन अपने समाचार पत्रो और चेनलों मे स्वयं को श्रेष्ठ साबित करता है की देखो विरोधी पत्र के इतने ग्राहक हमारे इतने ग्राहक... वगेरह-वगेरह...असली और निष्पक्ष पत्रकारिता तो जैसे खोकर रह गई है भारत की पत्रकारिता बाजारू हो चुकी है और समाचार समूह भी, भारत के समाचार पात्रो को जनता ने सराहा तो यहाँ पर ये पत्र और चेनल सातवे आसमान पर पहुच गए अपने आप को समाज सुधारक बताने लगें, कई समूह ऐसे भी है जो नई सोच अपनाने का दावा करते है, पत्रकारिता का ऐसा भी वर्ग है जो नई सोच के नाम पर अमन की आशा ( जो कभी नहीं पूरी होगी ?) की आढ़ मे दुश्मनों से गलें लगा बैठे है क्या यह उन आतंकवादी हमलो मे घायल हुए या अपनों को खो चुके परिजनो के लिए एक आघात और विश्वघात से कम है क्या ? जब ७५ प्रतिशत से ज्यादा भारतीय पाकिस्तान से अमन नहीं चाहता तो आप क्या चाहते है ? इन्हे दुनियाँ मे नंबर १ समाचार पत्र बनना है, ये लोग एसी सोच अपनाने का दावा तो करते है साथ ही साथ इनके पीछे भी लाखो लोग भी है जिनहे भले ही भारत के इतिहास के बारें मे पूर्ण जानकारी हो ना हो या अब तक पाकिस्तान ने कितने भारतीयो का खून बहाया है यह भले ही ना पता हो लेकिन वे पाकिस्तान के साथ दोस्ती का हाथ बढ़ाने वाले उन पत्रकारों, समूहो के साथ है, इसका कारण यह नहीं है की वे लोग पाकिस्तान से दोस्ती चाहते है या उन्हे पाकिस्तान से प्यार है या फिर भारत से नफरत है, कारण यह है की वो लोग बॉलीवुड की संस्कृति को देश के ऊपर रखते है, बॉलीवुड समाचारपत्र एक दूसरे के पूरक है बॉलीवुड के बिना मीडिया की रोजी नहीं और मीडिया के बिना बॉलीवुड की और बॉलीवुड का पाकिस्तान प्रेम जग-जाहीर है सच कहा जाए तो "इंडिया का मुख पत्र है ये बॉलीवुड" क्या यह एक प्रकार की गद्दारी नहीं देश से ? पूरे बॉलीवुड मे ऐसे लोग नहीं है कुछ कीड़े भरें है जो एक मिशनरिज की तरह लोगो के दिमाग को नपुसक बना रहे है धीरे-धीरे । इस्राइल और फलिस्तीन मे कौनसी संस्कृतिक दोस्ती है ? जबकि उन दोनों देशो के बीच मे नागरिकों का उतना खून नहीं बहा का जीतने भारत के नागरिकों का, सभी बात जानते है लेकिन क्या है की भारतीयो के अंदर अहिंसा के लचीले ग_वादी कीड़े है जो समय समय पर उछलते है, भारतीयो की हजारो सालो से चली आ रही गुलामी के कारण है, पहले अइयाश, अधर्मी राजाओ महाराजों की गुलामी की फिर आतंकी मुसलमानो के गुलाम बने फिर अंग्रेज़ो के गुलाम, अब भी नहीं सुधर रहे है, अब भी कौनसे आजाद है ? अंदर बेठे सजा काट रहे दुश्मनों को भी फांसी दिलाने से डरते है । दुश्मन राष्ट्र को इन्हे दुश्मन कहने से परहेज है और उल्टे घांव और निर्लज होने के बाद भी अमन की आशा से खेलते है ये पैसे और इज्जत के लोभी, जबकि दुश्मन पाकिस्तान मे तो बचपन से ही यह घुट्टी पिलाई जाती है की हमारा दुश्मन देश है भारत...इन सभी सबूतो और तथ्यों के जानने के बाद भी हमारे यहाँ पर के सेकुलर ( sickular ) बाज नहीं आएंगे मुफ्त की प्रसिद्धि पाने से, आपकी नजर मे पाकिस्तान के एक कट्टर नेता और भारत की जाने माने सेकुलर चेनल की एक रेपोर्टर के बीच मे मित्रता को आप क्या मानेंगे ? इससे आप क्या अर्थ निकालेंगे ? जबकि आम जनता तो उनसे नफरत करती है, उस महिला पत्रकार के मित्रो मे से ७० प्रतिशत मित्र शत्रु देश पाकिस्तान से है लेकिन उसके मित्र चीन और बांग्लादेश से क्यों नहीं है वे भी तो पडॉशी देश है, आइये उस महिला के मित्रो के मित्रो के बारें मे पढ़ते है आप चाहे तो यहाँ से भी देख सकते है
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