मीडिया से सावधान

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Shankar Dutt Fulara

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Aug 10, 2010, 9:55:09 AM8/10/10
to bharatswab...@googlegroups.com
(साधारण जनता को, देश-समाज-संस्कृति-संस्कारों-भारत-भारतीयता और स्वदेशी के समर्थकों को इसअभारतीय मीडिया से सावधान रहना चाहिए । या ऐसा भी कह सकते हैं कि; भ्रष्टों के विरोधी, बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के विरोधी,पाश्चात्य संस्कारों के विरोधी,दवा कम्पनियों की लूट के "विरोधी लोगों" को इनसे सावधान रहना चाहिए ।) 
"एक तो मियाँ बावले ऊपर से चढा़ली भांग"
ऐसा ही कुछ हाल हमारे यहाँ के मीडिया का हो गया है ।  अब तो ऐसा लगने लगा है कि ; ये वास्तव में संस्कृति-समाज-संस्कार और देश विरोधी, आसुरी शक्तियों के हाथों बिका हुआ है।  या इसको संचालित करने वाले स्वयं यही तत्व हैं ।  "एक तो शिक्षा ही हमारे यहाँ दोष पूर्ण है फिर अनैतिकता और पाश्चात्य संस्कृति का हमला" बेचारे हमारे मीडिया वाले झेल नहीं पा रहे ।  
येमुठभेड़ में मरे अपराधी को , अपराधी नहीं मानते।  उस समाचार की व्याख्या करने में ये अपनी योग्यता ऐसे दिखाते हैं कि ; साधारण व्यक्ति तो रावण या राक्षस को भी निरीह मानने को मजबूर हो जायेऔर भगवान राम को तो ये चुटकियों में निर्दोषों का हत्यारा सिद्ध कर सकते हैं।  पर इस मामले में जरा डर है; जनता कहीं इनका उद्धार कर दे  वैसे इनके बहुत से आकाओं ने ये कोशिश, ‘भगवन राम को मर्यादा पुरुषोत्तम मानने कीआरम्भ से जारी रखी है, पर स्वयं अमर्यादितों की कौन सुने; इसलिए असफल ही रहे । 

हाँ; इनकी एक विशेषता तो माननी पड़ेगी, बेशर्मी में इनका कोई मुकाबला नहीं कर सकता ।  आज तक तो नहीं कर पाया।  कहते हैं; "बहाव के साथ बहने वाले की कोई पहचान नहीं होती" , इन्होने इस वाक्य को भी अपने संस्थान की टी आर पी बढ़ाने का नुस्खा बना लिया।  जनता कुछ भी चाहे या देश के लिए कुछ अच्छा होने जा रहा हो या धर्म-संस्कृति-समाज-देश का कुछ भला होने की बात हो; तो ये उसके विरोध में नजर आयेंगेबहाव में बहने से क्या लाभ ?
ये और इनके आका सोहराबुद्दीन की पहचान नहीं बताएँगे,उसके कर्म नहीं बताएँगे, पूरा एक घंटा चर्चा में निकाल देंगे।  अधिकारियों और सरकार की साजिशों  पर इनके तरकस में तीरों की कमी नहीं है।  सच मानो; वो तो वीरप्पन को पूरा देश पचास सालों से जनता था, वरना ये उसे भी निर्दोष सिद्ध करके; मारने वाले अधिकारीयों को कटघरे में खड़ा करवा देते
कई बार इनके आचरण को देख कर तो ये लगता है कीयेजानबूझ कर जनता को उकसाने की कोशिश कर रहे हैं।  ऐसा कई बार कर चुके हैं।  डेरा सच्चा सौदा वाला झगड़ा इसकी बानगी है और भी कई हैं।  कई बार इनकी ये कोशिश इनके लिए भी मुसीबत बन जाती है; जब जनता, या  किसी पार्टी के कार्यकर्त्ता इनके ऊपर ही पिल जाते हैं।  हो सकता है; ये भी ये जानबूझ कर करते हों, इन्होंने अपना संस्थान नया करवाना हो, बीमा कम्पनी द्वारा बीमा ले रखा हो।  तो; तोड़-फोड़ करवाने के लिए भड़काऊ समाचार दिए जाएँ, बस हो जायेगा काम
अब हमें मान लेना चाहिए; भारत का अधिकांश मीडिया  और मीडिया वाले भ्रष्ट हैं ।  इनके भ्रष्ट नेताओं, भ्रष्ट विदेशी कम्पनियों और भ्रष्ट अधिकारियों से आर्थिक हित जुड़े हुए हैं

साधारण जनता को, देश-समाज-संस्कृति-संस्कारों-भारत-भारतीयता और स्वदेशी के समर्थकों को इस अभारतीय मीडिया से सावधान रहना चाहिए । या ऐसा भी कह सकते हैं कि; भ्रष्टों के विरोधी, बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के विरोधी,पाश्चात्य संस्कारों के विरोधी,दवा कम्पनियों की लूट के "विरोधी लोगों" को इनसे सावधान रहना चाहिए । 

Shankar Dutt Fulara

unread,
Aug 10, 2010, 10:18:38 AM8/10/10
to bharatswab...@googlegroups.com


१० अगस्त २०१० ७:२५ अपराह्न को, Shankar Dutt Fulara <shanka...@gmail.com> ने लिखा:

himanshu sharma

unread,
Aug 12, 2010, 12:34:59 AM8/12/10
to bharatswab...@googlegroups.com
Fulara jee ur 100% correct.
.
--- On Tue, 10/8/10, Shankar Dutt Fulara <shanka...@gmail.com> wrote:
--
Manage emails receipt at http://groups.google.com/group/bharatswabhimantrust/subscribe
To post ,send email to bharatswab...@googlegroups.com
Visit http://www.rajivdixit.com for Rajiv Dixit audio and videos lectures.

Shankar Dutt Fulara

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Aug 12, 2010, 6:36:49 AM8/12/10
to bharatswab...@googlegroups.com


---------- अग्रेषित संदेश ----------
प्रेषक: himanshu sharma <lic_hi...@yahoo.com>
दिनांक: १२ अगस्त २०१० १०:०४ पूर्वाह्न
विषय: Re: [BST] मीडिया से सावधान
प्रति: bharatswab...@googlegroups.com


Fulara jee ur 100% correct.
.
--- On Tue, 10/8/10, Shankar Dutt Fulara <shanka...@gmail.com> wrote:

From: Shankar Dutt Fulara <shanka...@gmail.com>
Subject: [BST] मीडिया से सावधान
To: bharatswab...@googlegroups.com
Date: Tuesday, 10 August, 2010, 7:25 PM

(साधारण जनता को, देश-समाज-संस्कृति-संस्कारों-भारत-भारतीयता और स्वदेशी के समर्थकों को इसअभारतीय मीडिया से सावधान रहना चाहिए । या ऐसा भी कह सकते हैं कि; भ्रष्टों के विरोधी, बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के विरोधी,पाश्चात्य संस्कारों के विरोधी,दवा कम्पनियों की लूट के "विरोधी लोगों" को इनसे सावधान रहना चाहिए ।) 
"एक तो मियाँ बावले ऊपर से चढा़ली भांग"
ऐसा ही कुछ हाल हमारे यहाँ के मीडिया का हो गया है ।  अब तो ऐसा लगने लगा है कि ; ये वास्तव में संस्कृति-समाज-संस्कार और देश विरोधी, आसुरी शक्तियों के हाथों बिका हुआ है।  या इसको संचालित करने वाले स्वयं यही तत्व हैं ।  "एक तो शिक्षा ही हमारे यहाँ दोष पूर्ण है फिर अनैतिकता और पाश्चात्य संस्कृति का हमला" बेचारे हमारे मीडिया वाले झेल नहीं पा रहे ।  
येमुठभेड़ में मरे अपराधी को , अपराधी नहीं मानते।  उस समाचार की व्याख्या करने में ये अपनी योग्यता ऐसे दिखाते हैं कि ; साधारण व्यक्ति तो रावण या राक्षस को भी निरीह मानने को मजबूर हो जायेऔर भगवान राम को तो ये चुटकियों में निर्दोषों का हत्यारा सिद्ध कर सकते हैं।  पर इस मामले में जरा डर है; जनता कहीं इनका उद्धार कर दे  वैसे इनके बहुत से आकाओं ने ये कोशिश, ‘भगवन राम को मर्यादा पुरुषोत्तम मानने कीआरम्भ से जारी रखी है, पर स्वयं अमर्यादितों की कौन सुने; इसलिए असफल ही रहे । 

हाँ; इनकी एक विशेषता तो माननी पड़ेगी, बेशर्मी में इनका कोई मुकाबला नहीं कर सकता ।  आज तक तो नहीं कर पाया।  कहते हैं; "बहाव के साथ बहने वाले की कोई पहचान नहीं होती" , इन्होने इस वाक्य को भी अपने संस्थान की टी आर पी बढ़ाने का नुस्खा बना लिया।  जनता कुछ भी चाहे या देश के लिए कुछ अच्छा होने जा रहा हो या धर्म-संस्कृति-समाज-देश का कुछ भला होने की बात हो; तो ये उसके विरोध में नजर आयेंगेबहाव में बहने से क्या लाभ ?
ये और इनके आका सोहराबुद्दीन की पहचान नहीं बताएँगे,उसके कर्म नहीं बताएँगे, पूरा एक घंटा चर्चा में निकाल देंगे।  अधिकारियों और सरकार की साजिशों  पर इनके तरकस में तीरों की कमी नहीं है।  सच मानो; वो तो वीरप्पन को पूरा देश पचास सालों से जनता था, वरना ये उसे भी निर्दोष सिद्ध करके; मारने वाले अधिकारीयों को कटघरे में खड़ा करवा देते
कई बार इनके आचरण को देख कर तो ये लगता है कीयेजानबूझ कर जनता को उकसाने की कोशिश कर रहे हैं।  ऐसा कई बार कर चुके हैं।  डेरा सच्चा सौदा वाला झगड़ा इसकी बानगी है और भी कई हैं।  कई बार इनकी ये कोशिश इनके लिए भी मुसीबत बन जाती है; जब जनता, या  किसी पार्टी के कार्यकर्त्ता इनके ऊपर ही पिल जाते हैं।  हो सकता है; ये भी ये जानबूझ कर करते हों, इन्होंने अपना संस्थान नया करवाना हो, बीमा कम्पनी द्वारा बीमा ले रखा हो।  तो; तोड़-फोड़ करवाने के लिए भड़काऊ समाचार दिए जाएँ, बस हो जायेगा काम
अब हमें मान लेना चाहिए; भारत का अधिकांश मीडिया  और मीडिया वाले भ्रष्ट हैं ।  इनके भ्रष्ट नेताओं, भ्रष्ट विदेशी कम्पनियों और भ्रष्ट अधिकारियों से आर्थिक हित जुड़े हुए हैं

साधारण <SPAN style="COLOR: rgb(102,0,0); FONT-WEIGHT: bold" id=yiv331

dsp_d...@engineer.com

unread,
Aug 15, 2010, 4:04:31 AM8/15/10
to bharatswab...@googlegroups.com
कितना कहना चाहता हु,पर कैसे बताऊ- ऐसी हालत है जैसी १५ अगस्त १९४७ के बाद हर सच्चे  भारतीयों की हो गयी होगी |
आज १५ अगस्त है ,पर दिल खुश नहीं |
आधी जिंदगी गयी गुलामी में |
समज में जब आयी  भारत और उसकी गरिमा को ,ये आज़ादी अब लग रही हे अधूरी |
प्रभु से प्रार्थना हे मुझे  मेरा भारत वापस दे दो ,मेरा खून चाहे तो पूरा ले लो |
भारत के विरोंकी कसम- जिऊंगा तो भारत के लिया और मारूंगा तो भारत के लिया |
महसूस करो क्रांतिकारियों के दर्द को जिनको लिटाया था कांटो की शैया पर, दर्द होता हे ना जब कांटा चुबता  है |
भारत में हो तो भारतीय भाषा बोलो,फिरंगियों को अब भगाना - तन मन और विचारोंसे |
व्यर्थ हे वो विचार जिसमे भारतीयता न हो |
क्या मिला ६३ सालों में भूख ,लाचारी ,पीढा ,अशिक्षा - कुछ १% काले फिरंगियों की वजह से |
हम तो समज गए पर अब समझाना अपने भाइय्यों को ,अंग्रजो ने हम पर राज़ किया क्यों की वे चालाक थे और हम भोले |
लेकिन अब हमारा वक्त हे - इनका षड़यंत्र से वाकिब हे ,गलती अब नहीं दोहराएँगे ,क्रांति करनी हे विचारों से - सतर्क रहना हमेशा से |
दुविधा में हो तो प्रार्थना करो प्रभु से ,आशीर्वाद लो बाबजी से |
कठिन परिस्तिथियों में ध्यान रहे बलिदोंका ,अभी सपना साकार करना हे क्रन्तिकारों का |
 
Lets convert India into भारत |
 
वन्दे मातरम!
जय भारत !

bikash das

unread,
Aug 15, 2010, 12:16:02 PM8/15/10
to bharatswab...@googlegroups.com
Bolo bharat mata ki jay...
Vande mataram...


Bikash Kumar Das
msc.b...@gmail.com



2010/8/15 Sudhir Sahni <sudhirs...@gmail.com>


---------- Forwarded message ----------
b
Date: 2010/8/15
Subject: [BST] १५ अगस्त क्या बताता है ?
To: bharatswab...@googlegroups.com
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