योगिराज स्वामी रामदेव

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Navneet Kumar Verma

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Aug 24, 2010, 3:50:16 AM8/24/10
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धन लोभी भेडिए हैं देश को चला रहे |
जनता के धन को ये लूट लूट खा रहे |
संसद में खुद की ये सेलरी बढ़ा रहे |
जनता है भूखी सोती मूर्तियाँ गढ़ा रहे |
CWG नाम से ये करोड़ों उड़ा रहे |
अन्न भगवान को ये दुष्ट ही सड़ा रहे |
चारों तरफ अव्यवस्था, भ्रष्टाचार छाया है |
युग को बदलने को योगिराज आया है |

आज तक रोग बढ़े रोगी बढ़ते जा रहे |
भौतिकवादी सोच से बस भोगी बनते जा रहे |
आसुरी चिकित्सा से सब लोग तिलमिला रहे |
डाक्टरों की फीस से हम लोग बिलबिला रहे |
एलोपैथ कुछ नहीं बस स्वार्थीयों की माया है |
युग को ...

आर्य भारतीय नहीं थे पढ़ाया जाता है |
अंडे मांस मीन खाओ ये सिखाया जाता है |
व्यर्थ के प्रलापों भरा राजनीति शास्त्र है |
अर्थशास्त्र कैसे कहें ये अनर्थशास्त्र है |
हिंदी को भुलाके हमने आंग्ल से क्या पाया है |
युग को...

रक्षा बंधन पर्व पर विशेष
रचयिता नवनीत

--
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*नवनीत कुमार
प्रशिक्षित-स्नातक-शिक्षक
केन्द्रीय विद्यालय बरेली*

B P DOBHAL

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Aug 25, 2010, 1:14:21 AM8/25/10
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महोदय,सादर प्रणाम आज आप की कविता पढ़ी, एक सामियक दृष्टी की कविता हँ I आपका ये भी एक  रूप हँ , का पता चला, बहुत-बहुत धन्यबाद 
                                                                            जय भारत 
                                                                            बी पी डोभाल,ऋषिकेश

2010/8/24 Navneet Kumar Verma <nnk...@gmail.com>
धन लोभी भेडिए हैं देश को चला रहे |
जनता के धन को ये लूट लूट खा रहे |
संसद में खुद की ये सेलरी बढ़ा रहे |

जनता है भूखी सोती मूर्तियाँ गढ़ा रहे |
CWG नाम से ये करोड़ों उड़ा रहे |

अन्न भगवान को ये दुष्ट ही सड़ा रहे |
चारों तरफ अव्यवस्था, भ्रष्टाचार छाया है |
युग को बदलने को योगिराज आया है |

आज तक रोग बढ़े रोगी बढ़ते जा रहे |

भौतिकवादी सोच से बस भोगी बनते जा रहे |
आसुरी चिकित्सा से सब लोग तिलमिला रहे |
डाक्टरों की फीस से हम लोग बिलबिला रहे |
एलोपैथ कुछ नहीं बस स्वार्थीयों की माया है |
युग को ...

आर्य भारतीय नहीं थे पढ़ाया जाता है |

अंडे मांस मीन खाओ ये सिखाया जाता है |
व्यर्थ के प्रलापों भरा राजनीति शास्त्र है |
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हिंदी को भुलाके हमने आंग्ल से क्या पाया है |
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DD Sharma

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Aug 26, 2010, 7:56:11 AM8/26/10
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नवनीत जी !!!
बहुत अच्छी कविता है ! मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ कि भारत स्वाभिमान के लिए इस तरह की कवितायेँ लिखते रहिये!!
धन्यवाद !!!!

2010/8/24 Navneet Kumar Verma <nnk...@gmail.com>
धन लोभी भेडिए हैं देश को चला रहे |

suraj kumar

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Aug 26, 2010, 12:15:04 PM8/26/10
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प्रणाम नवनीत जी !!!
बहुत अच्छी कविता है ! मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ कि भारत स्वाभिमान के लिए इस तरह की कवितायेँ लिखते रहिये!! आप कि कविता में आप का देश के लिए जो दीवानापन साफ़ साफ़  दिखाई देता है| अभी भी देश में देश भक्तो की कमी नही है, प्रणाम है उन सभी को जो अपने वतन के लिए कुछ करना चाहते है|

आपका एक मित्र
सूरज सिंह
जय हिंद जय भारत



2010/8/26 DD Sharma <sharm...@gmail.com>

THE SHUBHAM VERMA

unread,
Aug 27, 2010, 12:29:21 AM8/27/10
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bahut badiya
JAI HIND JAI BHARAT

bstvizag2 ap

unread,
Aug 27, 2010, 4:32:46 AM8/27/10
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नवनीत जी
  यह कविता जनजागृति का काम करेगा |इसे पत्रक में छपवाकर बंटवाये ,भारत स्वाभिमान जगाने में मदद करेगा |गाँव  गाँव कविता पहुंचेगा तो लोगो का स्वाभिमान जागेगा |
जयराम उपाध्याय जिला प्रभारी विसखापतानाम
९३९६५६७९४८

2010/8/26 DD Sharma <sharm...@gmail.com>

Vijay Deshmukh

unread,
Aug 27, 2010, 9:13:39 AM8/27/10
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Apaki rachana hame bahut pasand aayee.
Hamari aapako shubh kamnaye.

2010/8/24 Navneet Kumar Verma <nnk...@gmail.com>
धन लोभी भेडिए हैं देश को चला रहे |
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--
 Prof. Vijay K deshmukh,
 Lecturer in Botany,
 Sangamner College.

यशपाल सोलंकी

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Aug 27, 2010, 11:53:01 AM8/27/10
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अगर आपको मिडिया न्यूज चेनलों / विदेशी / व् अन्य पर आने वाली खबरे / कार्यक्रम बकवास लगती है तो आप उन खबरों को तुरंत बंद कर दीजिये और दूसरी चेनल देखिये, इससे क्या होगा की वे लोग रिव्यू करेंगे और आगे से वेसी खबरे नहीं दिखायेंगे, ये टी आर पी का खेल है, सभी को अच्छी तरह पता है की समाज व् संस्कृती से खिलवाड़ करने के लिए साजिशे की जा रही है, ये रियलिटी, ये राखी, शिल्पा, केटरीना, सलमान , बॉलीवुड से सम्बंधित बकवास बाजारू, बिकाऊ खबरे ,वे  कृपया आप लोग मत देखिये, रामदेवजी के चेनल तो है न ! और वेसे ही नकारात्मक टिप्पणिया आप हिंदी एवं सभी ऑनलाइन समाचार पत्रों पर भी भेज सकते है की भैय्या ये खबरे आप बंद कर दो या मत प्रसारित करो. 


जनहित में जारी ! 
श्रेष्ट-भारत 

Rajesh Tripathi

unread,
Aug 27, 2010, 1:31:45 PM8/27/10
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नवनीत जी ,
आपकी कविता बहुत अच्छी है और जन जाग्रति के लिए बहुत उपयुक्त है |
आप इसी तरह की और कवितायेँ लिखते रहिये और भारत स्वाभिमान के आन्दोलन में अपना अमूल्य योगदान इसी तरह से करते रहिये
राजेश


2010/8/24 Navneet Kumar Verma <nnk...@gmail.com>
धन लोभी भेडिए हैं देश को चला रहे |
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