Hi All,
Mai Ajay bhaisaheb se poore tarha sahamatee rakhta hoo.
Unhone jo kaha vo sahi hai.. humay English to bolne he padatee hai aur use ke karan India ko itna business milta hia.
Lekin humay humaree sanskar nahi bhoolna chayee aur apne bachoo ko bhe sikhana chayeea…
Dhanayavaad!!!
Saurabh Asthana | Delivery Lead
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From: prakriti-a-call-to-...@googlegroups.com [mailto:prakriti-a-call-to-...@googlegroups.com] On Behalf Of Kanotra Ajay
Sent: Wednesday, May 19, 2010 3:11 PM
To: Prakriti (A call to return to the nature); Hemant Choudhary
Cc: prakriti-a-call-to-...@googlegroups.com
Subject: RE: Stop Teaching Twinkle Twinkle Little Star, start ??? ???? ??????? ?? ?? ????? ???? ???? ??
I agree with Hemant ki Hindi se prem ke liye English ko chodna zaroori nahin hai.. Even if adopting English was a mistake we have too far now and there are some benefits of knowing English in the global world. But the major shift that we need to work on is it take pride in Hindi and promoting it… Unfortunately many times we take pride is knowing less Hindi and more English.. Usko badlna bahut zaroori hai….And we can start that only with our Kids…If we wait too long to make this shift…we will make the task that much difficult…..
Love!!
Ajay Kanotra
Delivery Manager – IT Application Delivery
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Hadapsar, Pune (INDIA) – 411013
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Email id: Kanot...@JohnDeere.comFrom: prakriti-a-call-to-...@googlegroups.com [mailto:prakriti-a-call-to-...@googlegroups.com] On Behalf Of Prakriti (A call to return to the nature)
Sent: Wednesday, May 19, 2010 3:04 PM
To: Hemant Choudhary
Cc: prakriti-a-call-to-...@googlegroups.com
Subject: Re: Stop Teaching Twinkle Twinkle Little Star, start खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी
प्रिय चौधरी जी,
अंग्रेजी में मैं ने पढ़ाई नहीं की और मेरे लिए अंग्रेजी की पहली परीक्षा मेरे पोस्ट ग्रैजुएशन की थी परन्तु मैं फर्राटेदार अंग्रेजी बोल सकता हूँ और अंग्रेजी में पढ़ाई करनेवालों से ज्यादा शुद्ध व्याकरण के साथ अंग्रेजी भाषा बोल सकता हूँ. अंग्रेजी के अलावा और भी दूसरी विदेशी भाषाएँ भी मैंने सीखी हैं तभी मेरा यह दृष्टिकोण बना है की अंग्रेजी तो एकदम निकृष्ट (थर्ड क्लास) भाषा है.
कोई भी देश तब तक तरक्की नहीं कर सकता जबतक उसके लोगों में अपनी मातृभाषा के प्रति प्रेम, और अपनी मातृभाषा में पढने, सोचने और काम करनी की आज़ादी ना हो. आज हम पश्चिम के नकलची मात्र रह गए हैं और अपनी मौलिकता को खो बैठे हैं. इसका कारण अंग्रेजी के प्रति प्रेम और अपनी मातृभाषा के प्रति उपेक्षा का भाव है.
जब तक बच्चों के ह्रदय में देश प्रेम और देशभक्तों के प्रति प्रेम नहीं उमडेगा, देश का भला नहीं होगा. आज यही हो रहा है. आज के बच्चों से पूछिए की झाँसी की रानी कौन थी, शिवाजी, महाराणा प्रताप, शहीद भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, खुदीराम बोस, लाला लाजपत राय इत्यादि कौन थे, तो निश्चित ही पता नहीं हो, पर ब्रिटनी स्पीयर्स और माइकल जैक्सन के खानदान की कहानी पता होगी. भारत में कितनी ऋतुएं हैं, भारत के महीने और दिनों के नाम तो सौ प्रतिशत एक ग्रैजूएत भी नहीं बता सकता. भारत के बारे में तो आज की पीढ़ी यहाँ तक कहती है की अगर अंग्रेज नहीं आते तो हम सभ्य ही नहीं रहते.
अंग्रेजी से बैर करना जरूरी नहीं है पर बिना जरूरत अंग्रेजी को अपने बच्चों के मत्थे मढना भी जरूरी नहीं है. साथ ही अपनी मातृभाषा के प्रति हीन भावना भरना अत्यंत ही बड़ा पाप है.
सधन्यवाद,
राकेश चन्द्र2010/5/19 Hemant Choudhary <hemant.c...@gmail.com>
Aisa nahin kar sakte bachchhon ke saath. Komal hriday wale bachchhon ko "Twinkle twinkle little star" nahin sikha kar veer ras ki kavita sikhana kya jaroori hai? Sirf English se dvesh ke kaaran aisa kahna theek nahin hai.
Hamne to English seekh lee. Aane walee peedhi agar English nahin seekhegi to baki duniya ke logon ke saath kaise baat karegi? Hindi ke saath prem karna achchhi baat hai aur jaroori bhi hai. Magar iske liye English se bair mujhe jaroori nahin lagta hai.
-Hemant Choudhary
2010/5/18 Prakriti (A call to return to the nature) <prakri...@gmail.com>
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी
- Subhadra Kumari Chauhanसिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी
बूढ़े भारत में आई फिर से नयी जवानी थीगुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी
दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थीचमक उठी सन सत्तावन में, वह तलवार पुरानी थी
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थीकानपूर के नाना की, मुँहबोली बहन छबीली थी
लक्ष्मीबाई नाम, पिता की वह संतान अकेली थी
नाना के सँग पढ़ती थी वह, नाना के सँग खेली थी
बरछी ढाल, कृपाण, कटारी उसकी यही सहेली थीवीर शिवाजी की गाथायें उसकी याद ज़बानी थी
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थीलक्ष्मी थी या दुर्गा थी, वह स्वयं वीरता की अवतार
देख मराठे पुलकित होते उसकी तलवारों के वार
नकली युद्ध व्यूह की रचना और खेलना खूब शिकार
सैन्य घेरना, दुर्ग तोड़ना ये थे उसके प्रिय खिलवाड़महाराष्टर कुल देवी उसकी भी आराध्य भवानी थी
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थीहुई वीरता की वैभव के साथ सगाई झांसी में
ब्याह हुआ रानी बन आयी लक्ष्मीबाई झांसी में
राजमहल में बजी बधाई खुशियाँ छायी झांसी में
सुघट बुंदेलों की विरुदावलि सी वह आयी झांसी मेंचित्रा ने अर्जुन को पाया, शिव से मिली भवानी थी
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थीउदित हुआ सौभाग्य, मुदित महलों में उजयाली छायी
किंतु कालगति चुपके चुपके काली घटा घेर लायीतीर चलाने वाले कर में उसे चूड़ियाँ कब भायी
रानी विधवा हुई, हाय विधि को भी नहीं दया आयीनिसंतान मरे राजाजी रानी शोक समानी थी
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थीबुझा दीप झाँसी का तब डलहौज़ी मन में हर्षाया
राज्य हड़प करने का उसने यह अच्छा अवसर पायाफ़ौरन फौजें भेज दुर्ग पर अपना झंडा फहराया
लावारिस का वारिस बनकर ब्रिटिश राज्य झांसी आयाअश्रुपूर्ण रानी ने देखा झांसी हुई बिरानी थी
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थीअनुनय विनय नहीं सुनती है, विकट फिरंगी की माया
व्यापारी बन दया चाहता था जब यह भारत आया
डलहौज़ी ने पैर पसारे, अब तो पलट गई काया
राजाओं नव्वाबों को भी उसने पैरों ठुकरायारानी दासी बनी, बनी यह दासी अब महरानी थी
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थीछिनी राजधानी दिल्ली की, लखनऊ छीना बातों बात
कैद पेशवा था बिठुर में, हुआ नागपुर का भी घात
उदैपुर, तंजौर, सतारा, कर्नाटक की कौन बिसात?
जबकि सिंध, पंजाब ब्रह्म पर अभी हुआ था वज्र-निपातबंगाले, मद्रास आदि की भी तो वही कहानी थी
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थीरानी रोयीं रनवासों में, बेगम ग़म से थीं बेज़ार
उनके गहने कपड़े बिकते थे कलकत्ते के बाज़ारसरे आम नीलाम छापते थे अंग्रेज़ों के अखबार
नागपूर के ज़ेवर ले लो लखनऊ के लो नौलख हारयों परदे की इज़्ज़त परदेशी के हाथ बिकानी थी
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थीकुटियों में भी विषम वेदना, महलों में आहत अपमान
वीर सैनिकों के मन में था अपने पुरखों का अभिमान
नाना धुंधूपंत पेशवा जुटा रहा था सब सामान
बहिन छबीली ने रण चण्डी का कर दिया प्रकट आहवानहुआ यज्ञ प्रारम्भ उन्हें तो सोई ज्योति जगानी थी
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थीमहलों ने दी आग, झोंपड़ी ने ज्वाला सुलगाई थी
यह स्वतंत्रता की चिन्गारी अंतरतम से आई थी
झांसी चेती, दिल्ली चेती, लखनऊ लपटें छाई थी
मेरठ, कानपूर, पटना ने भारी धूम मचाई थीजबलपूर, कोल्हापूर में भी कुछ हलचल उकसानी थी
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थीइस स्वतंत्रता महायज्ञ में कई वीरवर आए काम
नाना धुंधूपंत, ताँतिया, चतुर अज़ीमुल्ला सरनाम
अहमदशाह मौलवी, ठाकुर कुँवरसिंह सैनिक अभिराम
भारत के इतिहास गगन में अमर रहेंगे जिनके नामलेकिन आज जुर्म कहलाती उनकी जो कुरबानी थी
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थीइनकी गाथा छोड़, चले हम झाँसी के मैदानों में
जहाँ खड़ी है लक्ष्मीबाई मर्द बनी मर्दानों में
लेफ्टिनेंट वाकर आ पहुँचा, आगे बड़ा जवानों में
रानी ने तलवार खींच ली, हुया द्वन्द्ध असमानों मेंज़ख्मी होकर वाकर भागा, उसे अजब हैरानी थी
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थीरानी बढ़ी कालपी आयी, कर सौ मील निरंतर पार
घोड़ा थक कर गिरा भूमि पर गया स्वर्ग तत्काल सिधार
यमुना तट पर अंग्रेज़ों ने फिर खायी रानी से हार
विजयी रानी आगे चल दी, किया ग्वालियर पर अधिकारअंग्रेज़ों के मित्र सिंधिया ने छोड़ी राजधानी थी
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थीविजय मिली पर अंग्रेज़ों की, फिर सेना घिर आई थी
अबके जनरल स्मिथ सम्मुख था, उसने मुहँ की खाई थी
काना और मंदरा सखियाँ रानी के संग आई थी
युद्ध श्रेत्र में उन दोनों ने भारी मार मचाई थीपर पीछे ह्यूरोज़ आ गया, हाय घिरी अब रानी थी
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थीतो भी रानी मार काट कर चलती बनी सैन्य के पार
किन्तु सामने नाला आया, था वह संकट विषम अपार
घोड़ा अड़ा नया घोड़ा था, इतने में आ गये सवार
रानी एक शत्रु बहुतेरे, होने लगे वार पर वारघायल होकर गिरी सिंहनी उसे वीरगति पानी थी
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थीरानी गयी सिधार चिता अब उसकी दिव्य सवारी थी
मिला तेज से तेज, तेज की वह सच्ची अधिकारी थी
अभी उम्र कुल तेइस की थी, मनुष नहीं अवतारी थी
हमको जीवित करने आयी, बन स्वतंत्रता नारी थीदिखा गई पथ, सिखा गई हमको जो सीख सिखानी थी
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थीजाओ रानी याद रखेंगे हम कृतज्ञ भारतवासी
यह तेरा बलिदान जगायेगा स्वतंत्रता अविनाशी
होये चुप इतिहास, लगे सच्चाई को चाहे फाँसी
हो मदमाती विजय, मिटा दे गोलों से चाहे झांसीतेरा स्मारक तू ही होगी, तू खुद अमिट निशानी थी
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी
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Prakriti
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