परोपकार सिर्फ नाम के लिए है, असली मकसद तो पैसा बनाना है ! ये पैसे के लोभियों ने पैसा कमाने के लिए राम और कृष्ण को भी नहीं छोड़ा ! हे राम

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Sangeeta G

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Oct 5, 2010, 10:12:55 AM10/5/10
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श्रेष्ठ भारत !

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परोपकार सिर्फ नाम के लिए है, असली मकसद तो पैसा बनाना है ! ये पैसे के लोभियों ने पैसा कमाने के लिए राम और कृष्ण को भी नहीं छोड़ा ! हे राम

Posted: 04 Oct 2010 03:16 AM PDT

लेखक: नवीन
समय: दोपहर : २:३०
दिनांक: ४ ओक्टोबर
नमस्कार मेरा नाम नवीन कुमार है और मैं भारत स्वाभिमान से जुडा हूँ और आज मैं इस्कॉन मंदिर(हरे रामा हरे कृष्णा) के बारे मे अपने कुछ विचार व्यक्त करना चाहता हु और वो इस प्रकार है करीब एक वर्ष पहले मैं एक डेरी कंपनी मे काम करता था और वो कंपनी स्वदेशी ही थी और वो कंपनी दूध पावडर बनाती है तो इस्कोन मंदिर की जो शाखाए होती है वो विद्यालय मे या अनाथ आश्रम मे बच्चो को खाना उपलब्ध कराती है मुफ्त में तो, मैं जब डेरी कंपनी मे था तब मुझे पता चला की उनको दूध पावडर की आवश्यकता रहती है तो मैंने उनकी शाखा के मेनेजर से मिलने का समय लिया और मिलने गया उनसे पूरे मूल्य के बारे मे मैंने बात की तो उन्होंने कहा की तुम्हारा उत्पाद तो बहुत महंगा है और वो सस्ता वाला मिल्क पावडर उपयोग करते थे तो मैंने उनसे कहा की महोदय ये अच्छी गुणवत्ता वाला प्रोडक्ट है इसलिए थोड़ा महंगा है इससे दुध अच्छा बनेगा तो उन्होंने जो जवाब मुझे दिया वो चोकाने वाला था उन्होंने कहा "देखिये नवीन सर मुझे गुणवत्ता नहीं चाहिए चीज कैसी भी दो अच्छी या खराब मुझे चलेगी अच्छी चीज बनेगी तो भी बच्चो को ही खानी है और खराब होगी तो भी बच्चो को ही खानी है मुझे पता है आपकी चीज अच्छी है मैंने इसके बारे मे काफी सुना है लेकिन मुझे पैसे पैसे का हिसाब उपर देना पड़ता है!" तो मैंने उनसे कहा "महोदय हिसाब की बात तो वहा पर आती है जहा पर व्यापार हो, पर आप व्यापार थोड़ी कर रहे हो आप तो चेरिटी चला रहे हो तो आप सस्ते और महंगे की बात क्यों कर रहे हो आपका बस एक ही उद्येश्य होना चाहीये की बच्चो को अच्छे से अच्छा भोजन प्राप्त हो" और मैंने उनसे पूछा की महोदय आप कोनसा पावडर उपयोग मे ले रहे हो और उन्होंने जिस प्रोडक्ट का नाम बताया वो पुरे बाजार मे सबसे घटिया गुणवत्ता का वाला पावडर था ६०-७० रुपये k. g. और हमारा था १८० रुपये k. g. तो आप सोचिये उस उत्पाद की गुणवत्ता कैसी होगी ? और जहा पर उनका कार्यालय था वो तीन मंजिला इमारत थी आलीशान, हर इमारत पर अलग अलग काम चलता था ! एक बात तो साफ़ है चेरिटी नाम के लिए है लोगो को दिखाने के लिए है, उनका असली मकसद पैसा कमाना है ! ये पैसे के लोभियों ने पैसा कमाने के लिए राम और कृष्ण को भी नहीं छोड़ा ! हे राम


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ashish srivastava

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Oct 6, 2010, 2:42:38 AM10/6/10
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जय भारत,
कृपा करके श्रेष्ठ भारत के लोगो में भारत का नक्शा सही करें! पाकिस्तान और बंगलादेश भारत का हिस्सा नहीं है! 

जय हिंद,
आशीष श्रीवास्तव 

2010/10/5 Sangeeta G <sange...@gmail.com>

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Sangeeta G

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Oct 6, 2010, 4:05:45 AM10/6/10
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ये ही असली भारत था और होगा भविष्य मे ! गांधीवादी विचार छोड़ दो ! 

2010/10/6 ashish srivastava <ashish.007...@gmail.com>

Anil Mittal

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Oct 6, 2010, 9:45:41 AM10/6/10
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श्रेष्ठ भारत समुदाय,
                            सप्रेम ओम! परोपकार सिर्फ़ नाम के लिये है, असली मकसद तो पैसा कमाना है
यह बिल्कुल सत्य है लगभग ९९ प्रतिशत संस्थाये, एनजीओ, स्वयम् सेवी संगठन सरकारी मिली भगत से यही कार्य कर रहे है। इसका मुझे बहुत कटु अनुभव है छः,ग, राज्य मे २००७ से मै लवारीश् मानसिक विक्षिप्त  महिलाओ के उत्थान हेतु कार्य कर रहा हुं इसके तहत मुख्यमन्त्री से लेकर छोटे अधिकारियो, विभिन्न एनजीओ संगठनो के संपर्क मे मै आया, राज्य पाल राजभवन के भी कई चक्कर काटे। मेरा अनुभव यही है, की परोपकार ये सब् सिर्फ़ नाम के लिये करते है असली मकसद तो पैसा कमाना ही होता है।
जय भारत वन्देमातरम!
अनिल मित्तल

Shankar Dutt Fulara

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Oct 7, 2010, 1:12:47 AM10/7/10
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बी.एस.टी. गूगल समुह के सभी सदस्यों के लिए जानकारी  | क्या  हम अपने ऐसे सद्विचारों को, जिनसे  आम जनता को भी जान कर प्रेरणा मिले, सीधे ब्लॉग में लिख सकते हैं ? अभी हम केवल समुह के सदस्य ही अपने इमेल बोक्स में अकेले एक दूसरे के विचारो को पढ़ पाते हैं,वैसे स्वामीजी का ब्लॉग भी है और भा,स्वा.आ क़ी वेब साईट भी है पर वह भी हमारी आवश्यकता को पूरी नहीं कर पा रहे, इसीलिए ग्रुप इमेल की आवश्यकता पड़ी पर उससे भी अच्छा है ब्लॉग का विकल्प | कृपया देख कर अपने सुझाव और सहमती-असहमति अवश्य दें |

स्वाभिमानी भारत

भारत स्वाभिमान न्यास से जुड़े सदस्यों के लिए खुला आमंत्रण

"स्वाभिमानी भारत"
कृपया देखिये और अपने विचार अवश्य दीजिये |
धन्यवाद |

शंकर दत्त फुलारा, विशिष्ट सदस्य भा.स्वा.ट्रस्ट, एवं यो.शि. , अध्यक्ष तहसील-भिकियासेन,जिला,अल्मोड़ा, उत्तराखंड |  


५ अक्तूबर २०१० ७:४२ अपराह्न को, Sangeeta G <sange...@gmail.com> ने लिखा:
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