---------- Forwarded message ----------
From:
deepak aseem <deepak...@naidunia.com>
Date: 2010/8/11
Subject: Re: Fwd: श्री दीपक असीम जी
To: ANIL GAIKWAD <
anilgai...@gmail.com>
अनिल गायकवाड़ जी
सबसे पहले तो आपको धन्यवाद कि आपने मेल किया। नाराज़गी ज़ाहिर करने वाले मेल लिखने में ज्यादा साहस लगता है और अपने यहां असहमत होने की हिम्मत कम लोग करते हैं। आपको बधाई, साधुवाद।
हां, बाबा रामदेव से मेरी असहमतियां हैं। पहली असहमति यह कि बाबा का जोर अध्यात्म पर नहीं, स्वस्थ रहने पर है, मानो स्वस्थ रहना ही जीवन का एकमात्र उद्देश्य हो। स्वास्थ्य केवल एक घटक है। फिर हमारे पंतजलि ने भी योग का उपयोग समाधि के लिए किया था। बाबा समाधि की बात करते ही नहीं। हमारे सारे मनीषियों ने यही कहा है कि जीवन का लक्ष्य मोक्ष पाना है। बाबा ने स्वास्थ्य को ही मोक्ष के समकक्ष बना डाला है।
अब आपके प्रश्नों का बिंदुवार उत्तर दूंगा।
१ प्रातःकाल उठने में बुराई यह है कि नींद पूरी नहीं होती, दिमाग़ को आराम नहीं मिलता और आदमी चिड़चिड़ाता रहता है। आदिकाल में लोग शाम होते ही सो जाते थे। अब रात के बारह बजे के लगभग सोते हैं। देर से सोने वाले को ज्यादा नींद चाहिए। चार-पांच-छह बजे केवल बूढ़े उठ सकते हैं। जवानों को अधिक नींद की आवश्यकता होती है। जल्दी उठने वाले को कोई भी योग स्वस्थ नहीं कर सकता।
२ बुराई सुबह उठने में है। प्राणायाम और योग में कोई बुराई नहीं।
३ योग को दूर देशों में फैलाने में भी कोई बुराई नहीं।
४ आयुर्वेद की सबसे बड़ी बुराई यह है कि इसकी दवाइयां परीक्षित नहीं हैं। एलोपैथी में हर दवा का गहन परीक्षण होता है। जरा भी बुराई नज़र आए तो दवा बिक नहीं सकती। वे दवाएं अधिक जिम्मेदारी के साथ बाजार में उतरती हैं। ये आरोप गलत है कि सरकार ने आयुर्वेद का गला घोंटा। अनाड़ी वैद्यों के कारण ऐसा हुआ। लोग पागल नहीं हैं कि जिस दवा से आराम होता है, उसे न लेकर मंहगी और अंग्रेजी दवा लें। एलोपैथी भी इस अर्थ में आयुर्वेदिक है कि उसमें भी जड़ी बूटियों के रस और सत का उपयोग होता है, केवल नाम लैटीन में होते हैं। दवा बनाने के ढंग में भी फर्क है।
५ यह झूठ और अफवाह है कि गलत और प्रतिबंधित दवाएं भारत में बिक रही हैं। हमारा सिस्टम इतना कमजोर नहीं है। बिना परीक्षण यहां देशी और नकली दवा तो बिक सकती है, पर विदेशी दवा नहीं।
भारत को भारत कहने का आपका स्टेंड सही है। नाम अंग्रेजी में बदलना क्यों चाहिए? मगर हम खुद भी कभी भारत कहते हैं तो कभी हिंदुस्तान। हमें खुद ही एक शब्द बोलना चाहिए और मजबूर किया जाना चाहिए कि हम भारतीयों को इंडियन नहीं भारतीय कहा जाए और देश को भारत।
आपके बकाया सवालों के जवाब भी इन्हीं में निहित हैं।
आशा है स्वस्थ और सानंद होंगे।
मेल करने के लिए एक बार पुनः धन्यवाद।
---- Original message ----
Sent: 11 Aug 2010 14:18:04
Subject: =?UTF-8?B?RndkOiDgpLbgpY3gpLDgpYAg4KSm4KWA4KSq4KSVIOCkheCkuOClgOCkriDgpJzgpYAg?=
>---------- Forwarded message ----------
>From: ANIL GAIKWAD (
WWW.SAYBHARATNOW.HPAGE.COM)
>Date: 2010/8/9
>Subject: श्री दीपक असीम जी मेरे प्रश्नों का जवाब दीजिये
>To:
deepak...@naidunia.com>Cc:
bharatswab...@googlegroups.com
>
>
>श्री दीपक असीम जी,
>
>आप बाबा रामदेव पर व्यंगात्मक और नकारात्मक टिप्पणी कर रहे है, वह दुखद और
>असहनीय है,
>आप मुझे बताइए
>1. प्रातः काल उठने में क्या बुराई है ?
>2. प्रातः काल उठकर ध्यान, प्राणायाम और योगासन करने में क्या बुराई है ?
>3. ध्यान, प्राणायाम और योगासन को आस्था टीवी के माध्यम से भारत ही नहीं विश्व
>के कोने-कोने में निशुल्क उपलब्ध कराने में आपको क्या बुराई नजर आती है ?
>4. आयुर्वेद का इंडियन सरकार ने गला घोंट दिया, यदि बाबा रामदेव इसको
>प्रोत्साहन दे रहे तो इसमें क्या बुराई है ?
>5. स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता लाने में क्या बुराई है ?
>6. क्या आप नहीं जानते इंडियन डॉक्टर विश्व में कुछ प्रतिबंधित दवाये भारतीयों
>को धडल्ले से खिला रहे उसकी जवाबदारी किसकी है ? सर्दी, खांसी, जुकाम को
>घरेलु तरीके से ठीक करने में क्या बुराई है ?
>7. ध्यान, प्राणायाम और योगासन बच्चो को सिखाने में क्या बुराई है ?
>8. हम महंगे इंडियन जिम्नेसियम की फ़ीस नहीं भर सकते, क्या आप हर भारतीय को फ्री
>सुविधा प्रदान कर सकते है ? कभी नहीं ? लेकिन अब हम ध्यान, प्राणायाम और
>योगासन की शिक्षा निशुल्क प्राप्त कर रहे है, इसमें क्या बुराई है ?
>9. एक बार इंडियन हॉस्पिटल में भर्ती होने पर लगभग १०,०००/- दस हज़ार रूपये का
>का खर्च आता है जबकि पीलिया जैसी जानलेवा बीमारी आयुर्वेद से नाममात्र खर्चे
>पर ठीक हो जाती है, इसमें क्या बुराई है ?
>10. क्या आप भारतीय जनता को निशुल्क Phygiotherepist उपलब्ध करा सकते, है नहीं
>? हम अपने घर पर शारीरिक व्यायाम कर लेते है इसमे क्या बुराई है ?
>
>और सबसे बड़ी बात भारत नाम की
>
>मै आप से पूछना चाहता हूँ आपका नाम हिंदी में दीपक असीम है क्या अंग्रेजी में
>Candle Aseem होगा, नहीं ना फिर भारत अंग्रेजी में India कैसे हो जायेगा ?
>आजादी के बाद से भारतीय बच्चो को क्यों गलत शिक्षा दे रहे हो ? मैंने सैकड़ो
>इंडियन से यह प्रश्न किया है ? अधिक जानकारी के लिए मेरी वेबसाइट देखिये
>
www.saybharatnow.hpage.com>भारत बोलो आन्दोलन
>
>'स्वामी रामदेवजी' भी मेरी बातो से सहमत है और मै बाबा के विचारो से सहमत हूँ.
>Made in India को Made in Bharat बनायेगे और विश्व को बताएँगे हम भारतीय है
>इंडियन नहीं
>
>क्या आप मुझे बताएँगे की अंग्रेज क्यों हमें *ब्लडी इंडियन* क्यों कहते थे ?
>मुझे अब लगता है वे सही कहते थे क्योकिं इंडियन, भारतीय की टांग खीचकर गिराने
>में अपने आप को बाहदुर और बुद्धिमान समझता है.
>
>हम आस्तिक है, अन्धविशवासी नहीं..
>हम भारतीय है, इंडियन नहीं..
>दूध से जले है, छाछ भी फूँककर पियेंगे..
>वक्त आ गया है, अब भारतीय भी जियेंगे..
>भारत स्वाभिमान आन्दोलन
>
>
http://www.bharat-swabhiman.com/forum/viewtopic.php?f=22&t=1009>
>कहने बहुत कुछ है, जो लगातार जारी रहेगा,
>हर भारतीय, भारत स्वाभिमान से रहेगा,
>
>दीपक असीम जी आपके जवाब का इंतजार रहेगा
>
>भारत स्वाभिमानी
>अनिल गायकवाड
>इंदौर
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