परम पूज्य स्वामी जी के आज का विचार

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BHARAT SWABHIMAN

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Sep 24, 2010, 12:00:45 AM9/24/10
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 23 सितम्बर, 2010 तदनुसार 10 आश्विन ,विक्रमी सम्वत् 2067
गुलामी छोडो देश बचाओ
पहले हम अंग्रेजों के गुलाम थे अब हम कहीं न कहीं राजनैतिक पार्टियों व कुछ राजनैतिक व्यक्तियों के गुलाम से बनकर रह गय हैं। याद रखना यदि किसी राजनैतिक पार्टी की नीयत, नीतियाँ सोच व विचार देशहित में नही हैं तो उस पार्टी व व्यक्ति को छोड दीजिये क्योंकि देश से बढकर पार्टी या व्यक्ति नहीं हैं। तुम किसी राजनैतिक पार्टी या व्यक्ति के बंधक या गुलाम बनकर नही रहना । यदि मैं और ये मेरा संगठन भी देशहित में काम ना करें तो मुझे और मेरे इस संगठन को भी छोड देना।

Anil Mittal

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Sep 24, 2010, 8:11:59 AM9/24/10
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परम् पूजनीय स्वामी जी,
                                     सप्रेम ओम! शत शत नमन है। हमारे देश मे अधिकतर राजनीतिक दल पार्टी के रूप मे संगठित गिरोह की तरह कार्य कर रहे है, सत्ता पर पहुचने वाली पार्टीया सारी नैतिकता और आदर्शो को ताक पर रखकर भ्रष्टाचार एवं लूट मे लग जाते है। जब् भी कोई पार्टी के व्यक्ति का भेद खुलने लगता है, गिरोह रुपी संगठित पार्टी उसे बचाने के लिये सभी प्रकार के हथकण्डे 
अपनाती है। अन्ग्रेजो की बनायी हुइ सारी कुटिल दमन कारी नितीया एवं भ्रष्ट कानून उनकी मदद करते है, गुणी, प्रतिभावान, पराक्रमी, बहादुर देश भक्त नागरिक खून का घूट पीकर कुटिल व्यव्स्थाओ के शिकार हो जाते है। वास्तव मे सत्ता मे मन्त्रियो के पद पर चयन पार्टीयो के आधार पर न होकर प्रतिभा एवं गुणो के आधार पर होना चाहिये।भारत वर्ष मे आमूल चूल परिवर्तन के तहत सारी भ्रष्ट नीतियां, कानून, व्यवस्थाये मे बदलाव होना चाहिये। समाधान के मूल मे योग के सिवाय और कुछः नजर नही आता है।
जय भारत वन्देमातरम!
अनिल मित्तल

BHARAT SWABHIMAN

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Sep 28, 2010, 2:42:27 AM9/28/10
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27 सितम्बर, 2010 तदनुसार 14 आश्विन ,विक्रमी सम्वत् 2067
गुलामी छोड़ो, देश बचाओ
पहले हम अंग्रेजों के गुलाम थे, अब हम कहीं न कहीं राजनैतिक पार्टियों व कुछ राजनैतिक व्यक्तियों के गुलाम से बनकर रह गए हैं। याद रखना यदि किसी राजनैतिक पार्टी की नीयत, नीतियाँ सोच व विचार देशहित में नहीं हैं तो उस पार्टी व व्यक्ति को छोड़ दीजिये क्योंकि देश से बढ़कर पार्टी या व्यक्ति नहीं है। तुम किसी राजनैतिक पार्टी या व्यक्ति के बंधक या गुलाम बनकर नहीं रहना। यदि में और ये मेरा संगथन भी देशहित में काम ना करें तो मुझे और मेरे इस संगठन को भी छोड़ देना।

BHARAT SWABHIMAN

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Oct 5, 2010, 11:34:25 PM10/5/10
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06/10/2010
मेरी प्रतिज्ञा
मेरे सम्पूर्ण अस्तित्व मे मुझे अपना वतन दिखता है। मेरे वतन से मेरा तन है। मेरे ह्रदय, मन, मस्तिष्क, अस्थियाँ, मांसपेशिया व रक्त की एक-एक बूँद मैने देश की मिट्टी से पायी है अत: जब तक देह में प्राण रहेगा तथा खून की आखिरी बूंद शेष रहेगी मैं तब तह देश के लिए काम करुँगा। देश के लिए जिऊँगा तथा देश के सम्मान व स्वाभिमान के लिए मुझे अपने प्राणों की भी आहुति देनी पडे तो पीछे नही हटूँगा।

Sudhir Sahni

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Oct 6, 2010, 7:50:39 AM10/6/10
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विचार ;देश के दुश्मनों को अपने प्राणों की आहुति देने के लिए मजबूर करूँगा.

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Ashwini Soni

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Oct 6, 2010, 12:19:11 PM10/6/10
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आवश्यकता होने पर अपने प्राणो की आहुती हम भी देंगे स्वामी जी के साथ लेकिन देश, धर्म और देशवासियों के साथ धोखा करने वालों की भी एक-एक बूंद अब निचोड़ लेंगे|

Kaushal Dubey

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Oct 7, 2010, 4:39:51 AM10/7/10
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ओम,
     भाई मै आप के विचार से सहमत हू॥
हम खुद तो नही मरेगे पर इन भ्रस्टाचारी को अवश्य ही मिटा कर ही दम लेगे॥
वन्देमतरं

2010/10/6 Ashwini Soni <ashwini...@gmail.com>
आवश्यकता होने पर अपने प्राणो की आहुती हम भी देंगे स्वामी जी के साथ लेकिन देश, धर्म और देशवासियों के साथ धोखा करने वालों की भी एक-एक बूंद अब निचोड़ लेंगे|

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Shankar Dutt Fulara

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Oct 7, 2010, 5:23:14 AM10/7/10
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बी.एस.टी. गूगल समुह के सभी सदस्यों के लिए जानकारी  | क्या  हम अपने ऐसे सद्विचारों को, जिनसे  आम जनता को भी जान कर प्रेरणा मिले, सीधे ब्लॉग में लिख सकते हैं ? अभी हम केवल समुह के सदस्य ही अपने इमेल बोक्स में अकेले एक दूसरे के विचारो को पढ़ पाते हैं,वैसे स्वामीजी का ब्लॉग भी है और भा,स्वा.आ क़ी वेब साईट भी है पर वह भी हमारी आवश्यकता को पूरी नहीं कर पा रहे, इसीलिए ग्रुप इमेल की आवश्यकता पड़ी पर उससे भी अच्छा है ब्लॉग का विकल्प | कृपया देख कर अपने सुझाव और सहमती-असहमति अवश्य दें |

भारत स्वाभिमान न्यास से जुड़े सदस्यों के लिए खुला आमंत्रण

कृपया देखिये और अपने विचार अवश्य दीजिये |
धन्यवाद |

शंकर दत्त फुलारा, विशिष्ट सदस्य भा.स्वा.ट्रस्ट, एवं यो.शि. , अध्यक्ष तहसील-भिकियासेन,जिला,अल्मोड़ा, उत्तराखंड | 


2010/10/7 Kaushal Dubey <kaushal...@gmail.com>

slaxmi shanbhag

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Oct 7, 2010, 5:33:33 AM10/7/10
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om, sar kata sakte hei lekin, sar zuka sakte nahi,
mai bhi bst nyas me ise liye pravesh kiya hai, mera khoon dena pade to behattar, achche kam ke liye, desh keliye, mere khoon ki muze parva nahi, aur ve bhi swamiji ke sanghatan ke liye, om. muje sirf ek maatra swamiji ke uppar hi vishwas hai, aur kisi ke uppar kisi partiyoke upar vishwas tilmaatra nahi hai.
pm


2010/10/7 Kaushal Dubey <kaushal...@gmail.com>
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