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23 सितम्बर, 2010 तदनुसार 10 आश्विन ,विक्रमी सम्वत् 2067 गुलामी छोडो देश बचाओ | |
| पहले हम अंग्रेजों के गुलाम थे अब हम कहीं न कहीं राजनैतिक पार्टियों व कुछ राजनैतिक व्यक्तियों के गुलाम से बनकर रह गय हैं। याद रखना यदि किसी राजनैतिक पार्टी की नीयत, नीतियाँ सोच व विचार देशहित में नही हैं तो उस पार्टी व व्यक्ति को छोड दीजिये क्योंकि देश से बढकर पार्टी या व्यक्ति नहीं हैं। तुम किसी राजनैतिक पार्टी या व्यक्ति के बंधक या गुलाम बनकर नही रहना । यदि मैं और ये मेरा संगठन भी देशहित में काम ना करें तो मुझे और मेरे इस संगठन को भी छोड देना। |
| 27 सितम्बर, 2010 तदनुसार 14 आश्विन ,विक्रमी सम्वत् 2067 | |
| गुलामी छोड़ो, देश बचाओ | |
| पहले हम अंग्रेजों के गुलाम थे, अब हम कहीं न कहीं राजनैतिक पार्टियों व कुछ राजनैतिक व्यक्तियों के गुलाम से बनकर रह गए हैं। याद रखना यदि किसी राजनैतिक पार्टी की नीयत, नीतियाँ सोच व विचार देशहित में नहीं हैं तो उस पार्टी व व्यक्ति को छोड़ दीजिये क्योंकि देश से बढ़कर पार्टी या व्यक्ति नहीं है। तुम किसी राजनैतिक पार्टी या व्यक्ति के बंधक या गुलाम बनकर नहीं रहना। यदि में और ये मेरा संगथन भी देशहित में काम ना करें तो मुझे और मेरे इस संगठन को भी छोड़ देना। | |
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06/10/2010 मेरी प्रतिज्ञा | |
| मेरे सम्पूर्ण अस्तित्व मे मुझे अपना वतन दिखता है। मेरे वतन से मेरा तन है। मेरे ह्रदय, मन, मस्तिष्क, अस्थियाँ, मांसपेशिया व रक्त की एक-एक बूँद मैने देश की मिट्टी से पायी है अत: जब तक देह में प्राण रहेगा तथा खून की आखिरी बूंद शेष रहेगी मैं तब तह देश के लिए काम करुँगा। देश के लिए जिऊँगा तथा देश के सम्मान व स्वाभिमान के लिए मुझे अपने प्राणों की भी आहुति देनी पडे तो पीछे नही हटूँगा। |
आवश्यकता होने पर अपने प्राणो की आहुती हम भी देंगे स्वामी जी के साथ लेकिन देश, धर्म और देशवासियों के साथ धोखा करने वालों की भी एक-एक बूंद अब निचोड़ लेंगे|
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भारत स्वाभिमान न्यास से जुड़े सदस्यों के लिए खुला आमंत्रण
कृपया देखिये और अपने विचार अवश्य दीजिये |