Re: हिंदी में लिखो ना

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bikash das

unread,
Aug 14, 2010, 4:21:41 PM8/14/10
to bharatswab...@googlegroups.com
Shankar ji apki bat sahi hai...
par phir bhi type to app english letters hi kar rahe ho....bhale hi bad me woh hindi ho jati hai par type to app english letters hi kar rahe ho....to mai app ko galat nahi kahta app ka kahna sahi hai...uchit hai,,,wajib hai....

lekin mujhe hindi mai type karne me uss din garb hoga jab hamare computers ke keyboard hindi me aur anya bharatiya vasao me honge....
tab me garb se hindi me app ko email karonga...aur app vi garb se use padhna....lekin tab tak mujhe maff kijiye....

aur mere veje gaye email ko hindi me(???) type karne ke liye dhanyabad....waise app ne mere email id ko nahi badla...woh bhu badal dete to achcha hota....

Jay Bharat,
app ka krutagya..
Bikash Kumar Das
msc.b...@gmail.com



2010/8/14 Shankar Dutt Fulara <shanka...@gmail.com>
मेरा सभी साथियों से ये अनुरोध है कि वे जब रोमन शब्दों में लिख ही रहे हैं तो उसे क्यों ना हिंदी में बदल कर भेजें |
उसके लिए लिखने वाले बौक्स  में उपर बार पट्टी में जो अ लिखा है उस पर क्लिक करके फिर आप जब बौक्स में लिखेंगे तो वह स्पेश दबाते ही हिंदी होता चला जायेगा | अगर कोई शब्द गलत हो जाये तो उसे ठीक करने के लिए जब बेक स्पेश दबाते हैं तो उसमे सही शब्द चुनने के लिए मिल जाते हैं अगर ना मिलें तो फिर स्पेलिंग सही करलें तो सही शब्द बन जाता है |
एक सूचना और ..... मैं अंग्रेजी में आये ईमेलों को अपने इन्बौक्स  में से हटा देता हूँ | कृपया अंग्रेजी के पत्र मेरे लिए मेल ना करें | 
मै स्वामीजी  का  एक  इंटरव्यू  देख रहा  था  जिसमे  स्वामीजी  पूछते  हैं ....आप   को  कैसा  बाबा  चाहिए ???
 
"राम  नाम  जप  ना ,
पराया  माल  अपना"
 
"मूंड  मुंडाए तीन  गुन 
सर  की  मिट  जाये  खाज ,
खाने  को  लड्डू  मिले,
लोग  कहें  महाराज |

या  फिर  जो  अच्छे विचार   में  जीता  हो ??? और  उनके  लिए  स्वामीजी  कहते 
हैं  ...

"जग  की  सेवा ,
खोज  अपनी ,
प्रीत  उससे  कीजिये ,
जिंदगी  का  राज  है ,
यह  जानकर  जी  लीजिये ,
साधना  की  राह  पर  साधन  किसी का  है  दिया ,
मैं   नहीं , मेरा  नहीं ,
यह  तन  किसी  का  है  दिया ,
यह  धन  किसी  का  है   दिया" .



जय  भारत ,
बिकाश  कुमार  दास
msc.b...@gmail.com

Shankar Dutt Fulara

unread,
Aug 15, 2010, 12:16:52 AM8/15/10
to bharatswab...@googlegroups.com
बिकास  जी, आपके नजरिये से अगर सोचें तो; हमें अपनी आजादी भी तभी मनानी चाहिए; जब हम पूर्ण रूप से अपने कानून, अपनी शिक्षा, अपनी न्याय व्यवस्था, अपनी भाषा - भूषा - भजन, और भी बहुत सी बातें जिन्हें हम थोड़ा बहुत मिलने पर उनका लाभ उठा रहे हैं |
महोदय, यह तो वैसे ही लगता है जैसे किसी भूखे को आधी रोटी मिले और वह उसे ठुकरा कर कहे मैं तो तब तक नहीं खाऊंगा जब तक पूरी रोटी नहीं मिलती |
वैसे आप अपने द्रष्टिकोण के लिए स्वतन्त्र हैं मेरा विचार आपकी सोच को गलत ठहराने के लिए नहीं है |
धन्यवाद |
 

१५ अगस्त २०१० १:५१ पूर्वाह्न को, bikash das <msc.b...@gmail.com> ने लिखा:

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To post ,send email to bharatswab...@googlegroups.com
Visit http://www.rajivdixit.com for Rajiv Dixit audio and videos lectures.

Navneet Kumar Verma

unread,
Aug 15, 2010, 9:45:01 AM8/15/10
to bharatswab...@googlegroups.com
शंकर जी,
मै आपके विचारों से सहमत हूँ हमें प्राप्त का त्याग नही करना चाहिए जितने
साधन उपलब्ध हैं उन्हीं से हिन्दी सरलता से लिखी जा सकती है यदि आपको की
बोर्ड हिंदी में चाहिए तो Osk कमांड Run में लिखने से आन स्क्रीन की
बोर्ड आ जाता है वहाँ से आप देखते हुए टाइप कर सकते हैं

>>> *"राम नाम जप ना ,


>>> पराया माल अपना"
>>>
>>> "मूंड मुंडाए तीन गुन
>>> सर की मिट जाये खाज ,
>>> खाने को लड्डू मिले,
>>> लोग कहें महाराज |
>>>
>>> या फिर जो अच्छे विचार में जीता हो ??? और उनके लिए स्वामीजी

>>> कहते * *हैं ...


>>>
>>> "जग की सेवा ,
>>> खोज अपनी ,
>>> प्रीत उससे कीजिये ,
>>> जिंदगी का राज है ,
>>> यह जानकर जी लीजिये ,
>>> साधना की राह पर साधन किसी का है दिया ,
>>> मैं नहीं , मेरा नहीं ,
>>> यह तन किसी का है दिया ,

>>> यह धन किसी का है दिया" .*


>>>
>>>
>>> जय भारत ,
>>> बिकाश कुमार दास
>>> msc.b...@gmail.com
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नवनीत कुमारः
प्रशिक्षित-स्नातक-शिक्षकः
केन्द्रीय विद्यालय संगठने
बरेली नगरे

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