भ्रष्टाचारियों के दमन के लिए ,
शांति के पथ पर चलकर क्रांति नही होती
यदि ऐसा होता तो कोरवों के विरुद्ध
कुरुक्षेत्र मे महाभारत की लड़ाई नही होती
आज फिर इतिहास दोहरा रहा हें
कोरवों की तरह भ्रष्टाचारी फन फेला रहा हें
श्रीकृष्ण की तरह शांति की चाह मे
रामदेव और अन्ना अपमानित हो रहे हें
इसलिए अब नए इतिहास के लिए
हर नोजवान देशभक्त आरपार की क्रांति के लिए
रणक्षेत्र मे जाने को कफन सिर पर बाँधे बेठा हें
जय माँ भारती( दिनेश पाठक )