bobby ramakant
unread,May 24, 2008, 11:30:16 PM5/24/08You do not have permission to delete messages in this group
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तपेदिक या टीबी समाचार सारांश: २५ मई २००८: अंक ५२
तपेदिक या टीबी समाचार सारांश
अंक ५२
रविवार, २५ मई २००८
जापान सरकार ने ग्लोबल फंड टू फाइट एड्स, टीबी और मलेरिया (GFATM) को
अमरीकी डालर ५६० मिलियन का अनुदान देने का वादा किया है. मगर सामाजिक
कार्यकर्ता और जन प्रतिनिधि इस बात से प्रसन्न नही हैं क्योकि २००५ में
जो G8 या आठ विकसित देशों के समूह ने अफ्रीका में एड्स अनुदान को दुगना
करने का वादा किया था, वह आज तक पूरा नही हुआ है (पुराने समाचार को पढ़ने
के लिये यहाँ क्लिक्क कीजिये ).
इस बार भी G8 की बैठक में आठों देशों ने ८० बिलियन अमरीकी डालर का अनुदान
देने की बात मंजूर की है परन्तु 'समय अवधि' नही स्पष्ट की है. इन देशों
ने कहा है कि आने वाले सालों में वें यह धनराशी एड्स, टीबी और मलेरिया को
नियंत्रित करने के लिये व्यय करेंगे।
'international standards for tb care' या तपेदिक से ग्रसित रोगियों की
देखभाल के लिये अंतर्राष्ट्रीय मापक के प्रमुख लेखक डॉ फिलिप होपेवेल्ल
को सन फ्रांसिस्को स्थित कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय का विशिष्ठ
पुरुस्कार मिला है. डॉ होपेवेल्ल अमरीका में ही नही बल्कि विश्व में टीबी
या तपेदिक नियंतरण को सुधारने के लिये समर्पित रहे हैं, और उनके द्वारा
लिखित यह मापक सभी देशों के लिये महत्त्वपूर्ण हैं.
International Standards for TB Care को डाऊनलोड करने के लिये यहाँ
क्लिक्क कीजिये।
कुछ ही दिन पहले चेन्नई में हो रही कार्यशाला में डॉ पाल सोमेर्फेल्ड ने
कहा था कि टीबी या तपेदिक से ग्रसित लोगों को और जिनको इससे संक्रमित
होने का खतरा है, टीबी कार्यक्रमों में शामिल करना जरुरी है. डॉ
होपेवेल्ल के मापक भी इस बात पर जोर देते हैं कि समुदाय की भागीदारी
प्रभावकारी टीबी या तपेदिक नियंतरण के लिये अतिआवश्यक है.
जिम्बाब्वे में एच.आई.वी संक्रमण का दर नीचे आ रहा है परन्तु टीबी या
तपेदिक से संक्रमित लोगों का दर बढ़ता जा रहा है, विशेषकर कि ड्रग
रेसिस्तंत टीबी या तपेदिक का दर.
एच.आई.वी से ग्रसित लोगों के संगठन ने और जिम्बाब्वे के सरकारी विभागों
ने भी इस बात पर जोर दिया है कि एच.आई.वी क्लीनिक में टीबी या तपेदिक की
जांच होनी चाहिए और उचित उपचार की भी सुविधा उपलब्ध होनी चाहिए.
आज भी, न केवल जिम्बाब्वे में, बल्कि विश्व में एच.आई.वी से ग्रसित लोगों
में टीबी या तपेदिक ही सबसे बड़ा मृत्यु का कारण है. टीबी या तपेदिक ही
एच.आई.वी से ग्रसित लोगों में सबसे प्रमुख अवसरवादी संक्रमण है.